कोरोना महामारी के समय में पढ़ना पढ़ाना मुश्किल | corona time me study kaise kare


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देश में कोरोना महामारी ने अपनी दूसरी लहर से लोगों का जन –जीवन बुरी तरह से प्रभावित किया है , जिसमें शिक्षा एक बार फिर से ध्वस्त हो गयी है । कुछ समय पहले ही बड़ी कक्षाओं के लिए स्कूल खुले थे ,लेकिन वायरस का संक्रमण बढ़ने के कारण वे फिर से बंद हो गए हैं 
सीबीएससी की कक्षा10वीं की परीक्षा रद्द ऑर 12वीं की परीक्षा को भी स्थगित कर दी गयी है। पिछले साल कोरोना के फैलाव के साथ ही मार्च में स्कूल बंद कर दिये गए थे , उसी समय से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सी गयी है । राज्यों द्वारा स्कूलों को खोलने की कोशिश की गयी, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने एक बार फिर से बच्चों को घर में कैद कर दिया है । 

बच्चों को घर में बंद रहने के कारण उनके व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिल रहा है । वे निरंतर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं , क्योंकि वे बाहर निकलकर दोस्तों के साथ मेल –मुलाक़ात नहीं कर पा रहे हैं , जिससे बच्चे बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

पिछले साल मार्च में जैसे ही कोरना ने देश भर में अपना पैर पसारना शुरू किया ,तभी सरकार के द्वारा लौकडाउन लगाया गया । ऐसे में पढ़ाई के लिए केंद्र ऑर राज्य सरकारों ने ऑनलाइन पद्धति का प्रावधान करके शिक्षा को संभालने की कोशिश की, हालांकि हमारा शिक्षा व्यवस्था इसके लिए तैयार नहीं था । इसमें चुनौतियाँ बहुत थी । ऑनलाइन शिक्षा के लिए नहीं कोई सिलेबस तैयार थे ऑर न हीं पढ़ाने के लिए शिक्षक तैयार थे । परंतु इस महामारी के समय में शिक्षा को सही दिशा में कायम रखने के लिए ऑनलाइन पद्धति बहुत हद तक सफल भी हुआ ,लेकिन अभी भी तैयारी में संपूर्णता का अभाव ही दिखता है । 

ऑनलाइन शिक्षा एक अलग विधा है ,परंतु पश्चिमी देशों में दशकों से इस माध्यम के सहारे शिक्षा देने का कार्य चल रहा है । ऑनलाइन शिक्षा के पाठ्यक्रम अलग होता है ऑर इसमें पढ़ने ऑर पढ़ाने के तरीके भी अलग होते हैं । भारत में ऑनलाइन का माध्यम बहुत ही सीमित मात्रा में उपलब्ध है । टीवी के माध्यम से भारत में शिक्षा का प्रयोग काफी समय से चल रहा है । दूरदर्शन पर पहले से ही ज्ञान दर्शन जैसे कार्यक्रम आया करते थे ,पर वे बहुत सफल सिद्ध नहीं हुए । टीवी से पढ़ाई की अपनी दिक्कतें हैं एक तो घर में टीवी सेट होनी चाहिए ,निरंतर बिजली की आपूर्ति ऑर घर में टीवी के सामने बच्चों को बैठाने लायक माहौल का होना आवश्यक है ।

ऑनलाइन शिक्षा हमारे देश में इसलिए सम्पूर्ण संभव नहीं लगता है कि आज भी एक बड़ा तबका के पास न तो स्मार्ट फोन है न कंप्यूटर ऑर नहीं इन्टरनेट की सुविधा मौजूद है । देश में सरकारी ऑर प्राइवेट स्कूलों में काफी अंतर देखने को मिलते हैं । प्राइवेट स्कूल मोटी फीस वसूलते हैं ऑर उनके पास संसाधनों की कमी नहीं होती है ,वहीं सरकारी स्कूल में तो अभी तक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष हो रहा है । 

ऑर वे सरकारी स्कूल कैसे ऑनलाइन के माध्यम को अपना सकेंगे । एक तो पहले से ही सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के मामलों में अति पिछड़ा है ऑर ऐसे में कोरोना ने ऑर प्राइवेट स्कूलों ऑर सरकारी स्कूलों के बीच गहरी खाई पैदा कर दी है ।

सवाल यह है कि प्राइवेट में पढ़ने वाले बच्चे तो ऑनलाइन के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने में सक्षम हो जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे लोग जो अपनी बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने में सक्षम नहीं होने के कारण उनके बच्चे आज कोरोना महामारी के दौरान शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं । लोगों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नहीं सुविधा है, नहीं सरकारी स्कूल के पास व्यवस्था है ,जहां वे अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं । इस तरह के माहौल में शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

यह कैसे कह सकते हैं कि कोरोना महामारी कब तक पूरी तरह समाप्त होगी ,जिससे सामान्य रूप से स्कूल खुले ऑर बच्चे स्कूल जाकर पढे । कोरोना ने तो जीवन को पूर्णतः प्रभावित किया हीं है ,वहीं शिक्षा को भी नुकसान पहुंचाया है । हम एक साल में भी पढ़ाई के माध्यमों को ऑनलाइन में परिवर्तित करने में सक्षम नहीं हो पाये हैं ,जो चिंतनीय है । इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ,इसे समाधान करने की जरूरत है ।

लेख - ज्योति रंजन पाठक -औथर व स्तंभकार

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