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कमलनाथ आरोप सिख दंगे Kamal nath 1984 sikh riots case full story

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1984 anti-sikh riots 1984 anti sikh riots full story hindi 1984 anti-sikh riots कमलनाथ पर आरोप थे कि सिख दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाब गंज की घेराबंदी के दौरान वे वहां दो घंटे तक मौजूद थे और उन्होंने भीड़ का संचालन किया। कमलनाथ ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया था, उनका कहना था कि वे वहां पार्टी के कहने पर भीड़ को गुरुद्वारे पर हमला करने से रोकने के लिए गए थे। सज्जन सिंह को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद भाजपा को बैठे-बैठाए कमलनाथ के खिलाफ एक मुद्दा मिल गया है।

आगे पढ़े - किस जाती के है कमलनाथ 

 Kamal nath 1984 sikh riots case full story hindi

 कांग्रेस द्वारा मप्र के सीएम के लिए कमलनाथ के नाम का ऐलान होने के बाद चंडीगढ़ में शिरोमणी अकाली दल, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और आप के विधायक सुखपाल खैरा ने इसका विरोध किया था। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कमलनाथ दिल्ली के रक़ाबगंज गुरुद्वारे पर हुए हमले में शामिल थे. उधर, बीबीसी पर उपलब्‍ध जानकारी के अनुसार,

आम आदमी पार्टी के नेता और जाने माने वकील एचएस फूलका ने वर्ष 2006 में एक गवाह अदालत के सामने पेश किया था, जिसका नाम मुख्त्यार सिंह बताया जाता है. इस गवाह के बयान के आधार पर ही कमलनाथ का नाम सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में शामिल किया. कमलनाथ ने पार्टी को भेजे गए पत्र में सफ़ाई देने की कोशिश करते हुए आरोप लगाया कि एच एस फूलका अब आम आदमी पार्टी में हैं, इसलिए वे फिर से उनपर आरोप लगा रहे है.

 एनडीए शासनकाल में सिख विरोधी दंगों की जांच कर रहे नानावटी कमीशन के सामने कमलनाथ की पेशी भी हुई थी. उससे भी पहले न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा की कमेटी के सामने भी कमलनाथ की पेशी हो चुकी है, जब पत्रकार संजय सूरी बतौर एक गवाह उपस्थित हुए थे और उन्होंने कमलनाथ की पहचान की थी. कमलनाथ बताते हैं, 'मेरे खिलाफ़ 2005 तक इस बारे में एक भी एफआईआर नहीं थी. इस मामले में पहली बार मेरा नाम 1984 की घटना के 21 साल बाद उछला गया है.

पिछली एनडीए सरकार द्वारा गठित नानावटी कमीशन की जांच के बाद मेरे खिलाफ़ किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं मिला. कमलनाथ ने इस बात पर आश्‍चर्य जताया कि तब किसी ने उनका विरोध नहीं किया, जब वो दिल्ली प्रदेश के प्रभारी थे. कमलनाथ को मिला था पंजाब का जिम्मा, छोड़ना पड़ा था पद कमलनाथ को आल इण्डिया कांग्रेस कमिटी का पंजाब प्रभारी भी बनाया गया था. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बिना सोचे-समझे आनन फ़ानन लिया गया था, क्योंकि 1984 के सिख दंगों में कमलनाथ पर आरोप लगे थे. हालांकि कमलनाथ इन आरोपों से इंकार करते हैं.

हायतौबा मचने के बाद कमलनाथ ने अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष को भेज दिया. कांग्रेस के नेताओं ने ही इस फैसले की तीखी आलोचना की थी. यूपीए के शासनकाल में मंत्री रहे मनोहर सिंह गिल ने कहा था, कमलनाथ की नियुक्ति 'सिखों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने' के जैसा है. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का कहना था कि ऐसा कर कांग्रेस ने सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. जबकि आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि कमलनाथ को कांग्रेस 'दंगों के लिए इस तरह पुरुस्कृत' कर रही है.

 पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने जताया था विरोध 

 पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरेंद्र ने सोनिया गांधी से मिलकर फैसले पर नाराजगी जताई थी. कमलनाथ पर आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने निशाना साधा और आरोप लगाया कि सिख विरोधी दंगों में शामिल किसी को कांग्रेस पंजाब का प्रभारी कैसे बना सकती है.

सज्जन कुमार 1984 केस क्या है sajjan kumar wiki congress case

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Sajjan kumar case 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे फैले थे। इस दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर में पांच सिखों- केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या हुई थी।

 इस मामले में केहर सिंह की विधवा और गुरप्रीत सिंह की मां जगदीश कौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित परिवार की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश के आधार पर सीबीआई ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ 2005 में एफआईआर दर्ज की थी।

13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘1947 में बंटवारे के वक्त कई लोगों का कत्लेआम किया गया था। इसके 37 साल बाद दिल्ली ऐसी ही त्रासदी की गवाह बनी। आरोपी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर सुनवाई से बच निकले।’’

 sajjan kumar wiki congress case सज्जन को गवाह ने पहचान लिया था 

 पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की एक गवाह चाम कौर ने सज्जन को पहचान लिया था। चाम ने बयान दिया था- घटनास्थल पर मौजूद सज्जन ने वहां मौजूद दंगाइयों से कहा था कि सिखों ने हमारी मां (इंदिरा गांधी) का कत्ल किया है, इसलिए इन्हें नहीं छोड़ना। बाद में भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया।

हाईकोर्ट ने सज्जन के अलावा तीन अन्य दोषियों- कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और कांग्रेस के पार्षद बलवान खोखर की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। बाकी दो दोषियों- पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा तीन साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी।

  ‘मौत की सजा तक जारी रहेगी लड़ाई’

 अभियोजन के वकील एचएस फूलका और अकाली नेता मानजिंदर सिंह सिरसा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सज्जन और जगदीश टाइटलर को मौत की सजा दिलाने तक उनकी जंग जारी रहेगी। वे गांधी परिवार को भी जेल पहुंचाकर रहेंगे।

अशोक गहलोत की जाति कास्ट जीवनी ashok gehlot caste ki jati

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Ashok gehlot आइये जाने ashok gehlot caste ashok gehlot son ashok gehlot previous offices ashok gehlot daughter ashok gehlot caste in hindi ashok gehlot news ashok gehlot whatsapp number ashok gehlot twitterअशोक गेहलोत जन्म 3 मई 1951 को जोधपुर राजस्थान में हुआ भारतीय राजनीतिज्ञ रहे हैं। वह कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं वह जोधपुर के सरदारपुरा क्षेत्र राजस्थान के विधान सभा के सदस्य से चुने गए है अशोक गेहलोत  के पिता जादूगर थे

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शुरू में अशोक गहलोत ने भी जादू अपने पिता से सीखा पर उनका जादू आज राजस्थान की राजनीती में फेर बदल कर रहा है

आगे पढ़े -  कैसे बने बड़े नेता बनने के लिए ये गुण

परिवार में कौन कौन है ashok gehlot caste ki jati


पिता (Father) : बाबू लक्ष्मण सिंह गेहलोत
माता (Mother) : नाम ज्ञात नहीं
भाई (Brother) : अग्रसेन गहलोत
बहन (Sister) : कोई नहीं
पत्नी (Wife) : सुनीता गहलोत
(Children) : बेटा – वैभव गहलोत

  Ashok gehlot caste माली जाति से है एवं गोत्र गहलोत है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य हैं 1989 में, बहुत ही कम समय के लिए उन्होंने राजस्थान के गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला अशोक पहली बार वर्ष 1998 से 2003 तक और फिर वर्ष 2008 से 2013 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री बने

मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गहलोत ने राजस्थान में आए सूखे के दौरान “7 million-days” कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने भारत सेवा संस्थान की स्थापना की, जो राजीव गांधी मेमोरियल बुक बैंक के माध्यम से मुफ्त पुस्तकें प्रदान करता है और एम्बुलेंस सेवाएं भी प्रदान करता है। वर्ष 2018 में, अशोक गहलोत को विवादित बयान देने के लिए ऑनलाइन ट्रॉल किया गया था, जिसके बाद लोगों ने उनका # वैज्ञानिक गहलोत के रूप में मजाक करना शुरू कर दिया। जिस वीडियो काफी ट्रॉल किया गया। जिसके बाद गहलोत ने ट्विटर पर सटीक अपने भाषण की असली वीडियो को पोस्ट किया था 

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