मिर्जा गालिब के शेर हिन्दी शायरी Mirza ghalib shayari hindi pdf birth date

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Mirza ghalib shayari hindi pdf birth date 27 दिसंबर 1797 आगरा के एक सैन्य परिवार में उर्दू के लोकप्रिय शायर मिर्जा गालिब का जन्म हुआ तो आज कुछ उनके जम्दीन के मोके पर चुनिंदा शेर

Mirza ghalib shayari sher 2019

कैदे-हयात बंदे-.गम, अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले आदमी, .गम से निजात पाए क्यों

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

रंज से खूंगर हुआ इंसां तो मिट जाता है गम
मुश्किलें मुझपे पड़ीं इतनी कि आसां हो गईं

निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

दिल-ए-नादां, तुझे हुआ क्या है
आखिर इस दर्द की दवा क्या है

गालिबे-खस्ता के बगैर कौन-से काम बंद हैं
रोइए जार-जार क्या, कीजिए हाय-हाय क्यों

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमां, लेकिन फिर भी कम निकले

तुम सलामत रहो हजार बरस
हर बरस के हों दिन पचास हजार

मेहरबां होके बुलाओ मुझे, चाहो जिस वक्त
मैं गया वक्त नहीं हूं, कि फिर आ भी न सकूं

या रब, न वह समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात
दे और दिल उनको, जो न दे मुझको जबां और

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
 आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

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