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शांत बीमारी के नाम से पहचाने जाने वाले हैपेटाइटिस के मरीज भारत में भी बड़ी संख्या में हे. यह लिवर में हैपेटाइटिस वायरस के संक्रमण से होती हे. इसके चार प्रकार हे- हैपेटाइटिस ए , बी, सी और ई. वायरस ए और ई खाने पिने की चीज, दूषित पानी से फैलते हे. वही वायरस बी और सी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में रक्त के जरिये पहुँचते हे, जैसे - चोट लगने पर संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आना, संक्रमित इंजेक्शन, खून या उसके अवयव चढ़ाया जाना, गर्भवती माँ से बच्चे को होने की आशंका भी बहुत अधिक होती हे.  

 खतरा 
हैपेटाइटिस ए और ई से कम खतरा होता हे, क्योकि लिवर का सही उपचार किया जाये तो यह दो से तीन हफ्ते में ठीक हो सकते हे. हैपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण खतरनाक होता हे, क्योकि ज्यादा समय तक रहता हे और लिवर को नुकसान पहुंचता हे. साथ ही जब तक संक्रमण से लिवर को अच्छा खासा नुकसान नहीं पहुँचता तब तक लक्षण दिखाई नहीं देते हे. ऐसी स्थिति में सिर्फ स्क्रीनिंग द्वारा ही हैपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण का पता चलता हे. यदि ध्यान ना दिया जाये और सही इलाज ना मिले तो लिवर काम करना बंद कर सकता हे और मृत्यु की आशंका बढ़ जाती हे.  

लक्षण
संक्रमण होने पर पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन, कम भूख लगने, वजन घटने और पीलिया होने के लक्षण दीखते हे.  

बचाव
साफ सफाई रखें. बाहर के खान-पान से बचे, घर में सभी की जांच कराएं और पॉजिटिव पाए जाने पर उपचार कराएं. पहले से बचाव के लिए वेक्सिनेशन ली जा सकती हे.

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