कहानी अकबर और बीरबल की: हाथ के बाल..Akbar-Birbal Story in Hindi


एक दफ़ा अकबर ने बीरबल से पूछा- “मेरी हथेली में बाल क्यों नही हैं?” अजीब सा प्रश्न था, लेकिन पूछा भी तो बीरबल से था. तुरंत उत्तर मिला, जहापनाह, आप अपने हाथो से निरंतर दान करते है, इसीलिए आपकी हथेलीयो के बाल घिस गए हैं.”'बात तो ठीक है, लेकिन बीरबल जो देते नही है उनकी हथेलियों में बाल भी क्यों नही होते?” सम्राट ने अगला सवाल किया. “बादशाह! वे लोग लेते हैं इसलिए लेते-लेते उनके बाल घिस जाते हैं” बीरबल ने उत्तर दिया. अकबर ने कहाँ, ”यह भी ठीक है, लेकिन जो न देते हैं ओर न लेते हैं उनकी हथेलियाँ में बाल क्यों नही होते? बीरबल ने जो जबाब दिया वह गंभीरता से ग्रहण करने लायक है. बीरबल ने कहाँ, “जहापनाह, वे हाथ मलतें रह जाते हैं इसलिए उनकी हथेलियों में बाल नही होते.

हम भी कही हाथ मलते न रह जाए. प्रकृति हमें देती है, नदी हमें देती है, वृक्ष-ज़मीन ओर आकाश भी हमें देते हैं, फिर हम देने में कंज़ूसि क्यों करे. हम देने की भाषा सीखें, देने का पाठ पढ़ें. हमारे पास ज़रूरत से ज़्यादा वस्त्र हैं तो फटेहाल ज़िंदगी जीने वालों की सहायता करें. अगर आपके पास पचास साड़ियाँ हैं तो उनमे से पाँच साड़ियाँ झोंपड-पटटी में जाकर उन्हें दे दें, जिन महिलाओं के दो साड़ियों भी नही हैं. लोगों की मदद करे, क्योकि आपका जन्म कुछ अच्छा करने के लिए ही हुए हे.

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