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अनुसूचित जनजाति कानून या हरिजन एक्ट - के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध किए जाने वाले नए अपराधों में आता है harijan act ka durupyog sc st land act in uttar pradesh in hindi sc st news in hindi sc st act section 3 in hindi false sc st atrocity case st in hindi
  1. जाति सूचक गाली देना
  2. समुदाय के लोगों को जूते की माला पहनाना
  3. उन्हें सिंचाई सुविधाओं तक जाने से रोकना
  4. वन अधिकारों से वंचित करने रखना
  5. मानव और पशु नरकंकाल को निपटाने और लाने-ले जाने के लिए तथा बाध्य करना
  6. कब्र खोदने के लिए बाध्य करना
  7. सिर पर मैला ढोने की प्रथा का उपयोग और अनुमति देना
  8. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को देवदासी के रूप में समर्पित करना

  1. जादू-टोना अत्याचार को बढ़ावा देना
  2. सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करना 
  3. चुनाव लड़ने में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकना
  4. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की महिलाओं को वस्त्र हरण कर आहत करना
  5. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के किसी सदस्य को घर गांव और आवास छोड़ने के लिए बाध्य करना
  6. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के धार्मिक भावनाअों को ठेस पहुंचाना
  7. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्य के विरुद्ध यौन दुर्व्यवहार करना
  8. यौन दुर्व्यवहार भाव से उन्हें छूना और भाषा का उपयोग करना है
में शामिल है अगर इस कानून में यह भी कहा गया है कि अगर कोई गैर दल‍ित या गैर आदिवासी पब्‍ल‍िक सर्वेंट दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर अपनी जिम्‍मेदारियों का ठीक ढंग से पालन नहीं करता तो उसे छह महीने से लेकर एक साल तक की जेल हो सकती है। नए कानून के तहत एससी और एसटी के खिलाफ मामलों के लिए अलग से कोर्ट बनाने का भी प्रावधान है। इन अदालतों को मामले पर खुद से संज्ञान लेने की आजादी होगी। चार्जशीट दाखिल करने के दो महीने के अंदर ये कोर्ट सुनवाई पूरी कर लेंगे

अभी 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने sc st act में संसोधन किया उसके अनुसार -

SC- ST एक्ट 1989 के तहत हुए अपराध में सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश दिये हैं। SC ने कहा कि अब इस तरह के मामलों में गिरफ्तारी से पहले जांच जरूरी होगी और गिरफ्तारी से पहले जमानत दी जा सकती है। इस मामले से जुड़े केस को दर्ज करने से पहले DSP स्तर का पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा। इसलिए किसी सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले उसके सीनियर से अनुमति जरूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को माना कि एक्ट के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आ रही थीं

  महाराष्ट्र की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस दौरान कुछ सवाल उठाए। गौरतलब है कि एससी/एसटी एक्ट के तहत कई मामले फर्जी भी सामने आ चुके हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ लोग अपने फायदे और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

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