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क्या है ऑपरेशन शेरवाल what is operation sherwaal

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Operation sherwaal माली की सरकार ने इस्लामिक विद्रोहियों के कब्जे से अपने क्षेत्रों को मुक्त कराने के लिए विदेशी सैनिक मदद की गुहार लगाई। ऐसे ही परिस्थितियों में इस्लामी आतंकवादियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने और उस क्षेत्र से उन को बाहर करने के उद्देश्य के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 20 सितंबर 2012 को प्रस्ताव संख्या 2085 पारित किया। इसी प्रस्ताव के अनुरूप 11 जनवरी 2013 को फ्रांसीसी सेना ने माली में ऑपरेशन शेरवाल प्रारंभ किया।

शीघ्र ही अफ्रीकन यूनियन देशों की सेनाएं इस उद्देश्य से नियुक्त की गई। नेशनल मूवमेंट फॉर द लिबरेशन ऑफ आजाबाद ने भी विदेशी सेना की सहायता की और 8 फरवरी 2013 तक इस्लामिक आतंकी समूहों के कब्जे से माली के क्षेत्रों को मुक्त करा लिया।

माली का विद्रोही संकट
फ्रांस से वर्ष १९६० में स्वतंत्र हुए पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में जनवरी 2013 में संकट गहरा गया। पिछले कई वर्षों से यहां कई इस्लामी विद्रोही गुट सक्रिय है और उन्होंने टिंबकटू जैसे कई शहरों पर कबजा कर वहां की सूफी ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर को काफी नुकसान पहुंचाया है। माली के अंतरिम राष्ट्रपति के आग्रह पर फ्रांस ने वहां सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। वहा मुख्यता तीन विद्रोही गुट अंसार दिने, मूवमेंट फॉर यूनिटी एंड जिहाद इन वेस्ट अफ्रीका और अलकायदा इन इस्लामिक मगरिब सक्रिय थे।

जिनमें अंसार दिने सर्वप्रमुख था। फ्रांसीसी सेना जिसे 4 माह पूर्व माली के उत्तर में इस्लामी आतंकवादियों के विरुद्ध सैन्य अभियान के लिए भेजा गया था, का अभियान 25 मई 2013 को समाप्त हो गया। इन आतंकवादियों की गतिविधियों को समाप्त करने के लिए फ्रांस द्वारा ऑपरेशन शेरवाल के बाद सेना को वापस बुलाने की घोषणा की गई।


कैसे हुई गृह-युद्ध शुरुआत
माली में साल 2012 से पहले तुवारेग समुदाय और कट्टरपंथी विद्रोहियों में संघर्ष शुरू हुआ। हिंसक गुटों ने तख्तापलट का फायदा उठाया और ऐतिहासिक शहर टिंबकटू पर कब्जा कर लिया। दो और शहरों को विद्रोहियों ने अपने कब्जे में कर लिया। इसके बाद तुवारेग विद्रोही अलग-अलग पड़ गए और शस्त्र विद्रोह पूरी तरह अल कायदा से जुड़े संगठनों के नियंत्रण में आ गया। कट्टरपंथियों ने टिंबकटू की ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ डाला। उन्हें इस्लाम के विरुद्ध बताया गया। कट्टरपंथियों ने अपने नियंत्रण वाले इलाके में शरिया कानून लागू कर दिया। पत्थर मारने और सिर अलग करने की सजा भी लागू कर दी।

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