कुछ आदते आपकी मुस्कान को बिगाड़ सकती हैं और जिंदगी के स्वाद को भी. इनसे दूरी बना ले. दंत चिकित्सक के पास पहुचने वाले अधिकांश मरीजो को पायरिया की समस्या होती ही है. यह समस्या अपनी ही कुछ गलतियों व् आदतों के चलते जाने-अनजाने में होती है, पर थोड़ी-सी जागरूकता और थोड़ा-सा अपनी आदतों में सुधार कमजोर होते दाँतो को वापस स्वस्थ बना सकता है. जाने क्या हैं ये आदतें.
1. रात को ब्रश न करना
आमतौर पर कम ही लोग रात को ब्रश करते हैं, जबकि सिद्दांतत: रात में दाँतो की सफाई सुबह से भी अधिक महत्वपूर्ण है. चूंकि दिन में हम बार-बार कुछ-न कुछ खाते-पीते रहते हैं, तो मुहं के सूक्ष्म जीवों को दाँतो में कैविटी बनाने का मौका नही मिल पाता. जबकि रात में भोजन के बाद दांत साफ न किए जाए तो वे दाँतो में रहकर उन्हें नुकसान पहुचाते हैं. इससे कैविटी, पायरिया व् मुह से बदबू जैसी समस्याएं होती है. ऐसे में सुबह भले हल्का ब्रश किया जाए, पर रात में अच्छी तरह ब्रश करने आवश्यक है.

2. फ्लॉस न करना
फ्लॉस यानी की धागे से दाँतो के बीच फंसी गंदगी को निकालना. भारत में यह कम लोग करते हैं. जबकि दाँतो के स्वास्थ्य के लिए यह महत्वपूर्ण है. फ्लॉस करने से दाँत हमेशा साफ रहते है और किसी प्रकार की कैविटी नही बन पाती.इसे रोजाना रात में करे.

3.अधिक एसिडिटी
आप सोचेंगे कि पेट की जलन और गैस से दाँतो का क्या लेना-देना. परन्तु ये समस्याए लम्बे समय तक रहे, तो दाँतो के इनेमल को खराब कर देती हैं. ऐसे में छोटी-सी समस्या के प्रति भी जागरूक रहना जरूरी है.

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4. दर्द को नजर अंदाज करना
अक्सर लोग दाँतो के हल्के दर्द को नजरअंदाज करते हैं या छोटा-मोटा घरेलू उपाय लेकर ठीक करने की कोशिश करते हैं. इस तरह के उपाय से दाँतो में सुराग बढ़ता जाता है और लोग चिकित्सक के पास तब जाते हैं. जब समस्या बहुत बढ़ चुकी होती है. इसके बजाय तब ही डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए, जब दर्द हल्का हो क्योकि उस समय हल्की-फुल्की कैविटी हो तो फिलिंग करके ठीक की जा सकती है. देर होने से दर्द तो बढ़ता ही है, खर्च भी अधिक होता है.

5.दिखावे में दाँतो को दर्द देना
अक्सर युवा दिखावे में कोल्ड ड्रिंक की बोतल दाँतो से खोलते हैं व् महिलाओ व् बड़े-बूढ़े में सुपारी खाने की आदत होती है. उन्हें इस बात को समझना चाहिए की दांत इतनी कठोर वस्तुओं के लिए नही बने हैं. ऐसा करने पर दाँतो के इनेमल खराब होने व् उनमे दरारे पड़ने की आशंका होती है, जिसके नतीजे में 'सेंस्टिविटी' हो सकती है. यह अधिक हो तो फिर रूट केनाल ट्रीटमेंट करना पड़ता है. इसी तरह बर्फ चबाने से भी बचे. उससे भी इनेमल को नुकसान पहुचाना है.

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