Dadhi much muslims keep beard not moustache - दरअसल यह कहा जाता हैं कि हिन्दू धर्म ही सबसे पुराना और सनातन धर्म हैं. हिन्दू धर्म का इतिहास कितना पुराना हैं इस बात की पुष्टि अभी तक नहीं हुई हैं, वही इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना हैं. वेद व्यास जी अभी तक 18 पुराण लिख चुके हैं और भविष्य पुराण उनमे से एक हैं. हिन्दू धर्म के अंतर्गत कई तरह के पुराण और ग्रन्थ लिखे गए हैंऔर उन्ही ग्रन्थों में से एक भविष्य पुराण में इस्लाम से जुड़ी भविष्यवाणी पहले ही कर दी थी.

इस पुराण में लगभग 50000 श्लोक थे लेकिन तक्षशिला विश्व विद्यालय में रखे इस ग्रन्थ को मुग़ल शासन काल में जला दिया गया पर उस किताब में से 129 अध्याय और लगभग 14000 श्लोक बच गए थे. इस किताब में यह पहले से ही उल्लेखित था कि उस वक़्त के तात्कालीन राजा हर्षवर्धन के साथ और कई राजा, अलाउदीन, तुगलक, तैमुर, बाबर, और अकबर जैसे मुगलों का इस काल आना होगा. इस पुराण में ईसाई धर्म के प्रमुख ईसा मसीह के जन्म का भी प्रमाण मिलता हैं.

लेकिन इससे पहले भी अपने भारत देश की शक्ति कम होती देख एक और राजा हुए, जो राजा भोज के नाम से जाने गए और उन्होंने तय किया कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए दुनिया जीतने निकलना ही पड़ेगा. अपनी दस हज़ार सेना को साथ लेकर कई विद्वानों और कालीदास जैसे बुध्हिजीवी राजा के साथ आगे बढ़े.सिन्धु नदी पार करके गंधार और कशमीर में शठ राजाओं को हरा कर राजा भोज की सेना ईरान और अरब होते हुए मक्का पहुची. वहां के मरुस्थल में पहुच कर जब वहां उन्होंने एक शिवलिंग देखा तो उसकी पूजा करते हुए वह भगवान् शिव का ध्यान करने लगे भगवान् शिव भी राजा भोज की प्रार्थना सुनकर उनसे बात करने आये और उनसे कहा कि तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहियें था वत्स. तुम्हे मक्केश्वेर (जिसे आज हम मक्का के नाम से जानते हैं) के बजाये उज्जैन महाकालेश्वेर को पूजना चाहियें. इस स्थान पर अब एक राक्षस त्रिपुरासुर, जिसका मैंने वध किया था, उसके मानने वालें लोगों को असुरराज बाली से संरक्षण प्राप्त हो रहा हैं और इस समुदाय का प्रमुख “महा-मद” (मद से भरा हुआ व्यक्ति जिसे आज मोहम्मद भी कहते हैं) उत्पात मचा रहा हैं इसलिए तुम इस मलेच्छ जगह से चले जाओ.

भगवान् शिव की बात सुनकर राजा भोज जब लौटने लगे - तब “महा-मद” वहा आ गया और राजा भोज से कहा कि आप का आर्यधर्म विश्व का सर्वश्रेष्ट धर्म हैं, लेकिन मैं आपके शिव की मदद से ही एक ऐसे धर्म की स्थापना करूँगा जो अपनी क्रूरता के लिए जाना जायेगा. इसे मानने वालो को अपना लिंगाछेदन (खतना) कर के, बिना तिलक और बिना मुछों के सिर्फ दाढ़ी रखना अनिवार्य होगा. मेरा यह सम्प्रदाय उन्हें बहुत प्रिय होगा जिसे कुछ भी खाना (मांस) स्वीकार्य होगा और अपनी इस बात का यकीन दिलाने के लिए मैं आपके देश में आकर अपने मूंछ के बाल को त्याग दूँगा. कश्मीर के हजरत बल मज्जिद में आज भी हजरत मोहम्मद के मुछों के उन बालों को सुरक्षित रखा गया हैं. हजरत के उस बाल को “मोई-ए-मुकद्दस” के नाम से जाना जाता हैं. हर मुस्लिमों के लिए उस बाल का दर्शन हो सके इसके लिए साल में एक या दो बार ही उस बक्से को खोला जाता हैं.

जानकारी ली गई - dailyhunt hindi, youngisthan आपके दुबारा दी गई जानकारी का हमें इंतज़ार हे

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  1. Are kuch bhi anap shnap likh dete ho pehle pta to kar Liya kro ki Sahi article likha ja sake.muslim mucch isliye nhi rakhta taaki khate waqt ya Pani pite waqt koi Baal ya Gandhi usme no gir Jaye daddi muh se niche ka hissab hai isliye Wah aasani se dekha ja Sakta hai waise bhi daddi or much rakhna apni pasand pr hai koi rakhna chahe to rakhe nhi uski iccha.agar jawab achha lga ho to apna article delete kr Dena ved Puran padne chala hai anpad khi ka.

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  2. Jb musalmano ke bare mein pata n to please ulta sidha n likho

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  3. Apko abhi islam ke bare m koi jankari nahi h or jab jankari na ho to comment na kare

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  4. sir main aapki jankari se sehmat hun par ab aap ye batao ki in malechho ka anth kis prakar hoga kuch dharm guru kehte hain ki bhavishya puran me likha hai ki kalyug ke anth me bhagwan vishnu ka kalki avtar hoga jo keval teen din me dharti par se sabhi malechhon ka safaya kar denge or kuch kehte hain ki makka me makkeshwar mahadev ka jo shiv ling hai us par ganga jal or doodh se abhishek karne par shiv shankar prakat hokar sabhi malechhon ka nash kar denge

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  5. bhayya bholenath kewal india me hi pae jate h ,acha huwa islam me murtiyo ko nahi pujte varna tum log sari murtiyo par apna malikana hk jata dete,islam ne to sirf ek hi patther ko samman diya h use hm pujte nahi, use bhi tum ne shiv ling ki upma dedi pure saudi ullu ke patthe h unhe ye nahi malum ki jis pather ko vo kai 100salo se pujte arahe h vo ek ling h in mahashay ko pata h kitni ghatiya soch h, apne dharm ki ijjat badani ho to shastro me likhi koi sachi our achi bat karo manghadant kahaniya mat banao kher tumhari galati nahi hamare desh me kahaniyo par jyada viswas kiya jyata h, me kisi dharam ki burai nahi karunga lekin ha esi harkato se tumhari bato pr koi viswas nahi karega koi pada likha hindu bhi nahi, bat rahi musalman ki to musalman ka iman itna majboot he is ki jad itni majbut h ki in bato koi bacha bhi padega to has dega, our kuch sunana h ke kafi h,

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  6. क्या आपको शिव लिंग का हिन्दी मतलब पता है? शिव भी एक संस्कार्त का वर्ड है ओर लिंग भी किसी अच्छे गियानी से पता करो भाई इसका हिन्दी मीनिंग क्या है ओर हाँ भाई नाम के गियानी से न करना उससे करना जिसने सनातन धरम को पढ़ा हो ओर सनातन धरम मे महारत रखता हो।


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  7. शायद आप यह बात जानकर हैरत करें लेकिन सच्चाई यही है कि वेदों और पुराणों में पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के आगमन से बरसों पहले उनके आने की भविष्यवाणी की गई है।
    मुहम्मद सल्ल0 अरब में छठी शताब्दी में पैदा हुए, मगर इससे बहुत पहले उनके आगमन की भविष्यवाणी वेदों में की गई हैं। महाऋषि व्यास के अठारह पुराणों में से एक पुराण ‘भविष्य पुराण’ हैं। उसका एक श्लोक यह हैं:
    ‘‘एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रो के साथ आयेंगे। उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तान क्षेत्र में आयेंगे। (भविष्य पुराण अ0 323 सू0 5 से 8)
    स्पष्ट रूप से इस श्लोक और सूत्र मे नाम और स्थान के संकेत हैं। आने वाले महान पुरूष की अन्य निशानियॉ यह बयान हुई हैं।
    ‘ पैदाइशी तौर पर उनका खतना किया हुआ होगा। उनके जटा नही होगी। वह दाढ़ी रखे हुए होंगे। गोश्त खायेंगे। अपना संदेश स्पष्ट शब्दो मे जोरदार तरीके से प्रसारित करेंगे। अपने संदेश के मानने वालों को मुसलाई नाम से पुकारेंगे। (अध्याय 3 श्लोक 25, सूत्र )
    इस श्लोक को ध्यान पूर्वक देखिए। खतने का रिवाज हिंदुओं में नही था। जटा यहॉ धार्मिक निशान था। आने वाले महान पुरूष अर्थात मुहम्मद सल्ल0 के अन्दर ये सभी बाते स्पष्ट रूप से पाई जाती हैं । फिर इस संदेश के मानने वालो के लिए मुसलाई का नाम हैं। यह शब्द मुस्लिम और मुसलमान की ओर संकेत करता है।
    अथर्व वेद अध्याय 20 में हम निम्नलिखित श्लोक देख सकते हैं•
    हे भक्तो! इसको ध्यान से सुनो। प्रशंसा किया गया, प्रशंसा किया जाने वाला वह महामहे ऋषि साठ हजार नब्बे लोगो के बीच आयेगा।
    मुहम्मद के मायने हैं जिसकी प्रशंसा की गई हो। आप स0 की पैदाइश के समय मक्का की आबादी साठ हजार थी।
    वे बीस नर और मादा ऊटो पर सवारी करेंगे। उनकी प्रशंसा और बड़ाई स्वर्ग तक होगी। उस महा ऋषि के सौ सोने के आभूषण होंगे।
    ऊट पर सवारी करने वाले महा ऋषि को हम भारत में नही पाते।
    अत: यह संकेत मुहम्मद स0 ही की ओर हैं। सौ सोने के आभूषण से अभिप्रेत हबशा की हिजरत में जाने वाले आप सल्ल0 के सौ प्राणोत्सगी मित्र हैं।
    दस मोतियों के हार, तीन सौ अरबी घोड़े , दस हजार गाये उनके यहॉ होगी।
    दस मोतियों के हार से संकेत आप स0 के उन दस मित्रों की ओर हैं जिन्हे दुनिया ही मे जन्नत की खुशखबरी दी गई।
    बद्र की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले 313 सहाबा को तीन सौ अरबी घोड़ो की उपमा दी गई हैं। दस हजार गायों से अभिप्रेत यह हैं कि आप सल्ल0 के अनुयायियों की संख्या बहुत अधिक होगी।

    कुरआन मजीद नबी सल्ल0 को ‘जगत के लिए रहमत’ के नाम से याद करता हैं।
    ऋग्वेद मे भी हैं:
    रहमत का नाम पाने वाला, प्रशंसा किया हुआ दस हजार साथियों के साथ आएगा।
    (मंत्र 5 सूत्र 28)
    इसी तरह वेद में महामहे और महामद के नाम से भी आप स0 के आगमन का उल्लेख हैं.

    पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. के बारे में कई भारतीय धर्मग्रंथों में भविष्यवाणी की गई है। इसके लिए आप डॉ. एम.ए. श्रीवास्तव की पुस्तक 'हजरत मुहम्मद और भारतीय धर्मग्रंथ' जरूर पढें

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  8. हिदुं धर्म और इसलाम धर्म मे औरतों के अधिकार *
    .

    1.हिदुं धर्म मे पति के मरने के बाद लडकी को पति के साथ चिता मे जिंदा जला देते बाद मे मुसलमान राजाओं और अगंरेजो ने इस भयानक रिवाज को समाप्त किया
    2. हिंदु धर्म मे विधवा लडकी को दोबारा शादी का अधिकार नहीं है जबकि इसलाम धर्म मे 4 महीने के बाद दोबारा शादी कर सकती है ।
    3. इसलाम धर्म मे एक पुरूष 4 लडकियों से जरूरत के तहत शादी कर सकता लेकिन ये इसलाम मे 4 लडकियों से शादी करना जरूरी नहीं हैं Quraan ही पृ्थ्वी पर एक मात्र केवल एेसी किताब जो कहती है कि तुम केवल एक ही औरत से शादी करो बाईबल और वेद के अनुसार आप हजारों औरतों से शादी कर सकते हो
    5. जबकि हिदुं धर्म मे आप 100, 500 ,1000 , 15000 हजार औरतो से शादी कर सकते हो
    6 अगर आप महाभारत अनुशासन पर्व Chapter no. 15 पढते हैं तो इसमें लिखा है कि Shree Krishna के 16000 हजार बिवियाँ थी ।
    8. महाराजा दशरथ के 3 बिवियाँ थी ।
    9 अगर आप भागवत पुराण शलोक नबंर 9/6/25-28,30 पढते है तो उसमें लिखा है कि युवानाशव नामक एक राजा था उसके 100 बिवियाँ थी
    10. हिंदु धर्म मे औरतों का जमीन जायदाद मे कोई हिस्सा नहीं है । जबकि इसलाम धर्म दुनिया का पहला धर्म है जिसने 1450 साल पहले औरतों को औलाद कम ज़यादा या होने न होने के ऐतिबार से 12.50% से लेकर 50% percent तक पति और बाप की तमाम माल और जायदाद हिस्सा दिया है
    11. इसलाम मे औरत काजी के जरिए तलाक ले सकती या अपने पति से अलग हो सकती लेकिन हिदुं धर्म मे औरत को ये अधिकार नहीं है,ज़िन्दगी भर ज़ुल्म सहती रहे
    12. हिंदू धर्म मे एक औरत 5 पति रख सकती है जैसे दृोपति (Dropti) के 5 पति थे 5 पाडँव जबकि इसलाम मे एक औरत सिर्फ एक ही पति रख सकती है दूसरा हरगिज नहीं । इसलिए के अगर एक से ज़यादा पति हो तो बच्चा किस का है ये पता नहीं चलेगा और बाप एक ही होता है
    13. अगर आप भगवत गीता (9/32) उसमें लिखा है कि औरत की उतपत्ति पाप योनि से हुई है जबकि इसलाम धर्म में कहा गया कि ई

    श्वर ने मर्द औरत को समान रूप से बनाया है ।
    15. रामचरितमानस ( 59/5) में कहा गया है कि ढोल , गँवारू , शुद्र , पशु और नारी ये सकल ताड़न के अधिकारी हैं । जबकि इसलाम में कहा कि इनके साथ अच्छा सलूक करो

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  9. यजुर्वेद - अध्याय- 32: - भगवान सुप्रीम या सर्वोच्च आत्मा की 'प्रतिमा' (मूर्ति) या भौतिक आकृति नहीं है patthar bhagwan nahi haichahe wo kala pattahar hi kyu na ho

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  10. AAP KE KUCH ANS. SAHI BUT KUCH ME GALT HAI

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    1. proof karo mae kya kahta hu ye zaruri nahi hai mae kiske hawale se kahta hu ye zaruri hai

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  11. स्वेतश्वर उपनिषद अध्याय 6; shloka 9। वह इस दुनिया में कोई मालिक नहीं, कोई शासक नहीं है, न ही उसके लिए कोई प्रतीक है वह कारण है, सभी कारणों का कारण है उसके पास उसके ऊपर कोई पिता या नियंत्रक नहीं है

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  12. kahne ka matlab hai ki bhagwan na paida hota hai aur nahi marta hai uske koi bachche koi pita biwi koi mata nahi wah annat hai स्वेतश्वर उपनिषद अध्याय 6 श्लोक 9 ka arth

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  13. मुहम्मद (सल्ल॰) और वेद

    वेदों में नराशंस या मुहम्मद (सल्ल॰) के आने की भविष्यवाणी कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है, बल्कि धर्मिक ग्रंथों में ईशदूतों (पैग़म्बरों) के आगमन की पूर्व सूचना मिलती रही है। यह ज़रूर चमत्कारिक बात है कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के आने की भविष्यवाणी जितनी अधिक धार्मिक ग्रंथों में की गई है, उतनी किसी अन्य पैग़म्बर के बारे में नहीं की गई। ईसाइयों, यहूदियों और बौद्धों के धार्मिक ग्रंथों में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के अंतिम ईशदूत के रूप में आगमन की भविष्यवाणियां की गई हैं।
    वेदों का ‘नराशंस’ शब्द ‘नर’ और ‘आशंस’ दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘नर’ का अर्थ मनुष्य होता है और ‘आशंस’ का अर्थ ‘प्रशंसित’। सायण ने ‘नराशंस’ का अर्थ ‘मनुष्यों द्वारा प्रशंसित’ बताया है।1 यह शब्द कर्मधारय समास है, जिसका विच्छेद ‘नरश्चासौ आशंसः’ अर्थात प्रशंसित मनुष्य होगा। डॉ॰ वेद प्रकाश उपाध्याय कहते हैं कि ‘‘इसीलिए इस शब्द से किसी देवता को भी न समझना चाहिए। ‘नराशंस’ शब्द स्वतः ही इस बात को स्पष्ट कर देता है कि ‘प्रशंसित’ शब्द जिसका विशेषण है, वह मनुष्य है। यदि कोई ‘नर’ शब्द को देववाचक मानें तो उसके समाधान में इतना स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि ‘नर’ शब्द न तो देवता का पर्यायवाची शब्द ही है और न तो देवयोनियों के अंतर्गत कोई विशेष जाति।’’ 2
    ‘नर’ शब्द का अर्थ मनुष्य होता है, क्योंकि ‘नर’ शब्द मनुष्य के पर्यायवाची शब्दों में से एक है। ‘नराशंस’ की तरह ‘मुहम्मद’ शब्द का अर्थ ‘प्रशंसित’ होता है। ‘मुहम्मद’ शब्द ‘हम्द’ धतु से बना है, जिसका अर्थ प्रशंसा करना होता है। ऋग्वेद में ‘कीरि’ नाम आया है, जिसका अर्थ है ईश्वर-प्रशंसक। अहमद शब्द का भी यही अर्थ है। अहमद, मुहम्मद साहब का एक नाम है।3
    वेदों में ऋग्वेद सबसे पुराना है। उसमें ‘नराशंस’ शब्द से शुरू होने वाले आठ मंत्र हैं। ऋग्वेद के प्रथम मंडल, 13वें सूक्त, तीसरे मंत्र और 18वें सूक्त, नवें मंत्र तथा 106वें सूक्त, चैथे मंत्र में ‘नराशंस’ का वर्णन आया है। ऋग्वेद के द्वितीय मंडल के तीसरे सूक्त, दूसरे मंत्र, 5वें मंडल के पांचवें सूक्त, दूसरे मंत्र, सातवें मंडल के दूसरे सूक्त, दूसरे मंत्र, 10वें, मंडल के 64वें सूक्त, तीसरे मंत्र और 142वें सूक्त, दूसरे मंत्र में भी ‘नराशंस’ विषयक वर्णन आए हैं। सामवेद संहिता के 1319वें मंत्र में और वाजसनेयी संहिता के 28वें अध्याय के 27वें मंत्र में भी ‘नराशंस’ के बारे में ज़िक्र आया है। तैत्तिरीय आरण्यक और शतपथ ब्राह्मण ग्रंथों के अलावा यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में भी ‘नराशंस’ का उल्लेख किया गया है।

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  14. नराशंस’ की चारित्रिक विशेषताओं की
    हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) से साम्यता

    वेदों में ‘नराशंस’ की स्तुति किए जाने का उल्लेख है। वैसे ऋग्वेद काल या कृतयुग में यज्ञों के दौरान ‘नराशंस’ का आह्नान किया जाता था। इसके लिए ‘प्रिय’ शब्द का इस्तेमाल होता था। ‘नराशंस’ की चारित्रिक विशेषताओं की हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) से तुलना इस प्रकार है—

    (1) वाणी की मधुरता

    ऋग्वेद में ‘नराशंस को ‘मधुजिह्न’ कहा गया है4, यानी उसमें वाणी की मधुरता होगी। मधुर-भाषिता उसके व्यक्तित्व की ख़ास पहचान होगी। सभी जानते हैं कि मुहम्मद (सल्ल॰) की वाणी में काफ़ी मिठास थी।

    (2) अप्रत्यक्ष ज्ञान रखनेवाला

    ‘नराशंस’ को अप्रत्यक्ष ज्ञान रखनेवाला बताया गया है। इस ज्ञान को रखनेवाला कवि भी कहलाता है। ऋग्वेद संहिता में ‘नराशंस’ को कवि बताया गया है।5 हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को अल्लाह ने कुछ अवसरों पर परोक्ष बातों की जानकारी प्रदान की थी, अतः पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल॰) ने रोमियों और ईरानियों के युद्ध में रूमियों की हार और नव वर्ष के अन्दर ही रूमियों की होनेवाली विजय की पूर्व जानकारी दी थी। नीनवा की लड़ाई में रूमियों की जीत 657 ई॰ में हुई थी। पवित्र क़ुरआन की सूरा रूम इसी से संबंधित है। रूमियों की पराजय के पश्चात पुनः विजय प्राप्त कर लेने का उल्लेख आया है। इसके साथ ही निकट भविष्य में इन्कार करनेवालों पर मुसलमानों के विजयी होने की भविष्यवाणी की गई है।
    वे ईश्वर को सबसे अध्कि प्यारे और उसे जाननेवाले थे। वे नबी थे। ‘नबी’ शब्द ‘नबा’ धातु से बना हुआ शब्द है, जिसका अर्थ सन्देश देनेवाला होता है। आप (सल्ल॰) ईश्वर के सन्देशवाहक थे। आचार्य रजनीश के शब्दों में ‘आप ईश्वर तक पहुंचने की बांसुरी’ हैं जिसमें फूंक किसी और की है।’’

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  15. ऋग्वेद में नराशंस को ‘पापों से लोगों को हटानेवाला’ बताया गया है।8 यह कहने की ज़रूरत ही नहीं है कि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) की समस्त शिक्षाएं और आप (सल्ल॰) पर अवतरित क़ुरआन समग्र जीवन को पापों से उबार देता है। यह सन्मार्ग का आईना (दर्पण) है जिसे ‘देखकर’ और उस पर अमल करके व्यक्ति को तमाम पापों से छुटकारा मिल जाता है। उसकी दुनियावी (सांसारिक) और मरने के बाद की ज़िन्दगी ख़ुशहाल हो जाती है। इस्लाम जुआ, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से लोगों को रोकता है तथा अवैध कमाई से प्राप्त धन को खाने, ब्याज लेने और किसी का हक़ मारने को निषिद्ध ठहराता है। वह अत्याचार, दमन और शोषण से मुक्त समाज की स्थापना करता है।

    (5) पत्नियों की साम्यता

    ‘नराशंस’ के पास 12 पत्नियां होंगी, इस बात की पुष्टि भी अथर्ववेद के उसी मंत्र से होती है जिस मंत्र में उसके सवारी के रूप में ऊंट के प्रयोग करने की बात का उल्लेख है। यह मंत्र इस प्रकार है—
    उष्ट्रा यस्य प्रवाहिणो वधूमन्तो द्विर्दश।
    वर्ष्मा रथस्य नि जिहीडते दिव ईषमाणा उपस्पृशः।
    —अथर्ववेद कुन्ताप सूक्त: 20/127/2
    अर्थात, जिसकी सवारी में दो ख़ूबसूरत ऊंटनियां हैं। या जो अपनी बारह पत्नियों समेत ऊंटों पर सवारी करता है उसकी मान-प्रतिष्ठा की ऊंचाई अपनी तेज़ रफ्तार से आसमान को छूकर नीचे उतरती है।
    इस मंत्र के अनुरूप हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) की बारह पत्नियां थीं।
    आप (सल्ल॰) की पत्नियों के नाम क्रम से इस प्रकार हैं—1. हज़रत ख़दीजा (रज़ि॰), 2. हज़रत सौदा (रज़ि॰), 3. हज़रत आइशा (रज़ि॰), 4. हज़रत हफ्सा (रज़ि॰), 5. हज़रत उम्मे सलमा (रज़ि॰), 6. हज़रत उम्मे हबीबा (रज़ि॰), 7. हज़रत ज़ैनब बिन्त जहश (रज़ि॰), 8. हज़रत ज़ैनब बिन्त ख़ुज़ैमा (रज़ि॰), 9. हज़रत जुवैरिया (रज़ि॰), 10. हज़रत सफीया (रज़ि॰), 11. हज़रत रैहाना (रज़ि॰) और 12. हज़रत मैमूना (रज़ि॰)9 उल्लेखनीय है कि और किसी भी धार्मिक व्यक्ति की बारह पत्नियां नहीं थीं। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में कुछ महापुरुषों के पास सैकड़ों पत्नियां होने का विवरण मिलता है।

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  16. अथर्ववेद में अन्योक्ति अलंकार के माध्यम से नराशंस के बारे में पहचान की कतिपय बातें भी बताई गई हैं।
    कुन्ताप सूक्त में है—
    इदं जना उप श्रुत नराशंस स्तविष्यते।
    इसका अर्थ बताते हुए पं॰ क्षेम करण दास त्रिवेदी लिखते हैं—‘‘हे मनुष्यो! यह आदर से सुनो कि मनुष्यों में प्रशंसा वाला पुरुष बड़ाई किया जाएगा।’’ 10
    एक अन्य मंत्र में कहा गया है—
    एष इषाय मामहे शतं निष्कान् दश स्रजः।
    त्रीणि शतान्यर्वतां सहस्रा दश गोनाम्।। (अथर्ववेद: 20/127/3)
    अर्थात, ईश्वर मामहे ऋषि को सौ सोने के सिक्के देगा, दस हज़ार गायें देगा, तीन सौ अरबी घोड़े देगा और दस हार ।
    यहां मामहे ऋषि से मतलब मुहम्मद (सल्ल॰) से है। आप (सल्ल॰) को ईश्वर द्वारा सौ स्वर्ण मुद्राएं देने का तात्पर्य ऐसे श्रेष्ठ व्यक्ति से है जो रत्नवत महत्व के हों। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) जो शिक्षाएं लोगों को देते थे उनकी सुरक्षा का कार्य सौ व्यक्ति करते थे। ये अस्हाबे सुफ्फ़ः कहलाते थे। ये लोगों को शिक्षाओं की जानकारी भी देते थे और शिक्षाओं की रक्षा भी करते थे।
    इसी प्रकार दस हज़ार गो प्रदान किए जाने का अर्थ ‘अच्छे व्यक्ति दिए जाने से है। ‘गो’ अलंकारिक शब्द है, जो साधारणतया अच्छे व्यक्ति के अर्थ में प्रयुक्त होता है। मुहम्मद (सल्ल॰) की शिक्षाओं के अनुयायियों की संख्या आपके जीवन काल के अंतिम चरण में दस हज़ार थी। मक्का को जीतने के लिए मदीना से जाते समय आपके सहायकों की संख्या दस हज़ार थी। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के दस हज़ार अनुयायी जब मक्का पहुंचे तो वहां न किसी प्रकार का युद्ध हुआ न ही किसी अनुयायी ने किसी को नष्ट किया, इसी कारण से उन दस हज़ार लोगों को गो कहा गया।
    नराशंस को तीन सौ अर्वन की प्राप्ति का अर्थ ऐसे वीर योद्धाओं की प्राप्ति है जो घोड़े की तरह तेज़ हों। ‘अर्वन शब्द का शाब्दिक अर्थ घोड़ा होता है। यह भी गो की भांति अलंकारिक शब्द है। बद्र की लड़ाई में मुहम्मद (सल्ल॰) के साथियों (सहाबा) की संख्या तीन सौ थी।
    नराशंस को दस स्रजः या गले का हार दिए जाने से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति हैं, जो गले के हार के समान हों और नराशंस को प्रिय हों। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के दस ऐसे व्यक्ति थे, जो उन पर अपने प्राणों को भी समर्पित करने को तैयार रहते थे। वे गले के हार की तरह मुहम्मद (सल्ल॰) के चारों तरफ़ हमेशा रहते थे। ये दसों व्यक्ति अशरः मुबश्शरः कहे जाते हैं। ये हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के वे साथी (सहाबी) हैं, जिन्हें जन्नत की ख़ुशख़बरी दी गई।
    इनके नाम हैं—हज़रत अबूबक्र (रज़ि॰), हज़रत उमर (रज़ि॰), हज़रत उस्मान बिन अफ्फान (रज़ि॰), हज़रत तलहा (रज़ि॰), हज़रत अली (रज़ि॰), हज़रत सअद बिन अबी वक़्क़ास (रज़ि॰), हज़रत सईद बिन ज़ैद (रज़ि॰), हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ (रज़ि॰), हज़रत अबू उबैदा बिन जर्राह (रज़ि॰) और हज़रत ज़ुबैर (रज़ि॰)।
    अथर्ववेद के एक मंत्र में कहा गया है कि ‘ऐ लोगो, यह (ख़ुशख़बरी) ध्यानपूर्वक सुनो, नराशंस की प्रशंसा की जाएगी। साठ हज़ार नब्बे दुश्मनों में इस हिजरत करनेवाले, अमल फैलानेवाले को हम (सुरक्षा) में लेते हैं। ऋग्वेद के एक मंत्र में भी मामहे ऋषि के दस हज़ार साथियों (सहाबा) का ज़िक्र आया है। मंत्र इस प्रकार है—
    अनस्वन्ता सतपतिर्मामहे मे गावा चेतिष्ठो असुरो मघोनः।
    त्रैवृष्णो अग्ने दशभिः सहस्त्रैर्वैश्वानरः त्र्यरुणाश्चिकेत।।
    (ऋग्वेद म॰ 5, सू॰ 27, मंत्र 1)
    अर्थात, हक़परस्त, अत्यंत विवेकशील, शक्तिशाली, दानी मामहे ऋषि ने कलाम (वाणी) के साथ मुझे सुशोभित किया। सर्वशक्तिमान, सब ख़ूबियां रखनेवाला, सारे संसार के लिए कृपामय’ दस हज़ार सहयोगियों (सहाबा) के साथ मशहूर हो गया।
    मामहे ऋषि हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) ही हैं। डॉ॰ वेद प्रकाश उपाध्याय ने भी मामहे ऋषि को मुहम्मद (सल्ल॰) ही माना है।

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  17. 1. नराशंसः यो नरैः प्रशस्यते। (सायण भाष्य, ऋग्वेद संहिता, 5/5/2)। मूल मंत्र इस प्रकार है—‘‘नराशंसः सुषूदतीमं यज्ञमदाभ्यः। कविर्हि मधुहस्त्य।’’ ‘‘नराशंस’’ शब्द का अर्थ स्वामी दयानन्द सरस्वती ने भी मनुष्यों द्वारा प्रशंसित बताया है।
    (ऋग्वेद हिन्दी भाष्य, पृ॰ 25, प्रकाशक: सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा)
    2. ‘नराशंस और अंतिम ऋषि’, पृ॰ 5
    3. पं॰ रवीन्द्रनाथ त्रिपाठी ‘कान्ति’ के 28 अक्तूबर-4 नवम्बर 1990 के अंक में। ऋग्वेद का मूल श्लोक यह है—यो रघ्रस्योचोदितायः कृशस्य यो ब्रह्मणो नाधमानस्य कीरेः।। (ऋग्वेद, 2/12/6)
    4. नराशंस मिहप्रियम स्मिन्यज्ञ उप ह्नये। मधुजिह्नं हविष्कृतम्। (ऋग्वेद संहिता, 1/13/3)
    5. नराशंसः सुदूषूदतीमं यज्ञमदाम्यः। कविर्हि मधुहस्त्यः। (ऋग्वेद संहिता, 5/5/2)
    6. नराशंसः प्रतिधमान्यञ्ञन तिस्रो दिवः प्रति मह्रा स्वर्चिः।। (ऋग्वेद संहिता, 2/3/2)
    7. नराशंसः प्रतिधमान्यञ्ञन तिस्रो दिवः प्रति मह्रा स्वर्चिः।। (ऋग्वेद संहिता, 2/3/2)
    8. नराशंसं वाजिनं वाजयन्निह क्षयद्वीरं पूषणं सुम्नैरीमहे।
    रथं न दुर्गाद् वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अहंसो निष्पिपर्तन।।
    (ऋग्वेद, 1/106/4)
    9. अल्लामा इब्ने ज़री की किताब में यही क्रम है।
    10. अथर्ववेद हिन्दी भाष्य, पृ॰ 1401, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, नई दिल्ली।

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  18. पुराणों के प्रमाण

    भविष्य पुराण और हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰)
    केवल वेद ही नहीं बल्कि पुराणों में भी हज़रत मुहम्मद साहब का कार्यस्थल रेगिस्तानी क्षेत्र में होने का उल्लेख आता है। भविष्य पुराण में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ‘एक-दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रों के साथ आएंगे। उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तानी क्षेत्र में आएंगे।1 इस अध्याय का श्लोक 6,7,8 भी मुहम्मद साहब के विषय में है। पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल॰) के जन्म स्थान सहित अन्य साम्यताएं कल्कि अवतार से भी मिलती हैं, जिसका वर्णन कल्कि पुराण में है। इसकी चर्चा बाद में की जाएगी।
    यहां यह उल्लेख कर देना उचित होगा कि भविष्य पुराण में कई नबियों (ईशदूतों) की जीवन-गाथा है। इस्लाम पर भी विस्तृत अध्याय है। इस पुराण में बिल्कुल सटीक तौर पर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) के विषय की बातें आती हैं। इसमें जहां महामद आचार्य के नाम की मुहम्मद शब्द से निकटता है, वहीं पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल॰) की पहचान की अन्य बातें बिल्कुल सत्य उतरती हैं। इनमें ज़रा भी व्याख्या की ज़रूरत नहीं है। भविष्य पुराण के अनुसार, शालिवाहन (सात वाहन) वंशी राजा भोज दिग्विजय करता हुआ समुद्र पार (अरब) पहुंचेगा। इसी दौरान (उच्च कोटि के) आचार्य शिष्यों से घिरे हुए महामद (मुहम्मद सल्ल॰) नाम से विख्यात आचार्य को देखेगा। भविष्य पुराण (प्रतिसर्ग पर्व 3, अध्याय 3, खंड 3, कलियुगीयेतिहास समुच्चय) भविष्य पुराण में कहा गया है—

    लिंड्गच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी स दूषकः।
    उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनो मम ।25।
    विना कौलं च पशवस्तेषां भक्ष्या मता मम।
    मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति।26।।
    तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषकाः।
    इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृतः।। (श्लोक 25-27)

    इन श्लोकों का भावार्थ इस प्रकार है—‘हमारे लोगों का ख़तना होगा, वे शिखाहीन होंगे, वे दाढ़ी रखेंगे, ऊंचे स्वर में आलाप करेंगे यानी अज़ान देंगे। शाकाहारी और मांसाहारी (दोनों) होंगे, किन्तु उनके लिए बिना कौल यानी मंत्र से पवित्र किए बिना कोई पशु भक्ष्य (खाने योग्य) नहीं होगा (वे हलाल मांस खाएंगे)। इस प्रकार हमारे मत के अनुसार हमारे अनुयायियों का मुस्लिम संस्कार होगा। उन्हीं से मुसलवन्त यानी निष्ठावानों का धर्म फैलेगा और ऐसा मेरे कहने से पैशाच धर्म का अंत होगा।’ 2
    भविष्य पुराण की इन भविष्यवाणियों की हर चीज़ इतनी स्पष्ट है कि ये स्वतः ही हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) पर खरी उतरती हैं। अतः आप (सल्ल॰) की अंतिम ऋषि (पैग़म्बर) के रूप में पहचान भी स्पष्ट हो जाती है। ऐसी भी शंका नहीं है कि इन पुराणों की रचना इस्लाम के आगमन के बाद हुई है। वेद और इस तरह के कुछ पुराण इस्लाम से काफी पहले के हैं।

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  19. कल्कि अवतार और हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰)

    संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान डॉ॰ वेद प्रकाश उपाध्याय ने अपने एक शोध पत्र में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को कल्कि अवतार बताया है। कल्कि और मुहम्मद (सल्ल॰) की विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन करके डॉ॰ उपाध्याय ने यह सिद्ध कर दिया है कि कल्कि का अवतार हो चुका है और वे हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) ही हैं। इस शोध पत्र की भूमिका में वे लिखते हैं—
    ‘‘वैज्ञानिक अणु विस्फोटों से जो सत्यानाश संभव है, उसका निराकरण धार्मिक एकता संबंधी विचारों से हो जाता है। जल में रहकर मगर से बैर उचित नहीं, इस कारण मैंने वह शोध किया जो धार्मिक एकता का आधार है। राष्ट्रीय एकता के समर्थकों द्वारा इस शोध पत्र पर कोई आपत्ति नहीं होगी। आपत्ति होगी तो कूपमण्डूक लोगों को, यदि वे कूप के बाहर निकलकर संसार को देखें तो कूप को ही संसार मानने की उनकी भावना हीन हो जाएगी।’’...‘‘मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस शोध पुस्तक के अवलोकन से भारतीय समाज में ही नहीं, बल्कि अखिल भूमण्डल में एकता की लहर दौड़ पड़ेगी और धर्म के नाम पर होने वाले कलह शांत होंगे।’
    यहां पर इस शोध पत्र की ख़ास बातें और अन्य स्रोतों से प्राप्त तद् विषयक सामग्री पेश की जा रही है।

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  20. कल्कि के अवतरित होने का समय उस माहौल में बताया गया है, जबकि बर्बरता का साम्राज्य होगा। लोगों में हिंसा व अराजकता का बोलबाला होगा। पेड़ों का न फलना, न फूलना। अगर फल-फूल आएं भी तो बहुत कम। दूसरों को मारकर उनका धन लूट लेना और लड़कियों को पैदा होते ही पृथ्वी में गाड़ देना। एक ईश्वर को छोड़कर कई देवी-देवताओं की पूजा, पेड़-पौधों एवं पत्थरों को भगवान मानने की प्रवृत्ति, भलाई की आड़ में बुराई करने की प्रवृत्ति, असमानता आदि। ऐसे ही नाज़ुक दौर में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) भेजे गए थे।
    सातवीं शताब्दी के शुरू में रोमन और पर्सियन साम्राज्यों की जितनी बुरी अवस्था थी, उतनी शायद कभी नहीं हुई। बाइजेन्टाइन साम्राज्य के क्षीण हो जाने से संपूर्ण शासन भ्रष्ट हो चुका था। पादरियों के दुष्कर्मों और दुष्टताओं के फलस्वरूप ईसाई धर्म बहुत गिर गया था। पारस्परिक संघर्षों और शत्रुता के कारण अफरा-तफरी का आलम था। ऐसे समय में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) भेजे गए। इस्लाम धर्म रोमन साम्राज्य के संघर्षों से दूर था। इस धर्म के भाग्य में यही लिखा था कि यह तूफान की तरह से संपूर्ण पृथ्वी पर छा जाएगा और अपने समक्ष बहुत-से साम्राज्यों, शासकों और प्रथाओं को इस तरह उड़ा देगा जैसे कि आंधी मिट्टी को उड़ा देती है।1 इसी प्रकार ‘‘सेल’’ ने क़ुरआन के अनुवाद की प्रस्तावना में लिखा है—‘‘गिरजाघर के पादरियों ने धर्म के टुकड़े-टुकड़े कर डाले थे और शांति प्रेम एवं अच्छाइयां लुप्त हो गई थीं। वे मूल धर्म को भूल गए थे। धर्म के विषय में अपने तरह-तरह के विचार बनाए हुए परस्पर कलह करते रहते थे। इसी पृथ्वी में रोमन गिरजाघरों में बहुत-सी भ्रम की बातें धर्म के रूप में मानी जाने लगीं और मूर्ति-पूजा बहुत ही निर्लज्जता से की जाने लगी।2 इसके परिणामस्वरूप एक ईश्वर के स्थान पर तीन ईश्वर हो गए और मरयम को ईश्वर की मां समझा जाने लगा। अज्ञानता के इस दौर में अल्लाह ने अपना अंतिम रसूल भेजा।
    दूसरी बात ध्यान देने की यह है कि अंतिम अवतार उस समय होगा, जबकि युद्धों में तलवार का इस्तेमाल होता होगा और घोड़ों की सवारी की जाती हो। भागवत पुराण में उल्लेख है कि ‘देवताओं द्वारा दिए गए वेगगामी घोड़े पर चढ़कर आठों ऐश्वर्यों और गुणों से युक्त जगत्पति तलवार से दुष्टों का दमन करेंगे।3 तलवारों और घोड़ों का युग तो अब समाप्त हो चुका है। आज से लगभग चैदह सौ वर्ष पूर्व तलवारों और घोड़ों का प्रयोग होता था। उसके लगभग सौ वर्ष बाद से बारूद का निर्माण सोडा और कोयला मिलाकर होने लगा था। वर्तमान समय में तो घोड़ों और तलवारों का स्थान टैंकों और मिसाइलों आदि ने ले लिया है।

    कल्कि का अवतार-स्थान

    कल्कि के अवतार का स्थान शंभल ग्राम में होने का उल्लेख कल्कि एवं भागवत पुराण में किया गया है। यहां पहले यह निश्चय करना आवश्यक है कि शंभल ग्राम का नाम है या किसी ग्राम का विशेषण। डॉ॰ वेद प्रकाश उपाध्याय के मतानुसार ‘शंभल’ किसी ग्राम का नाम नहीं हो सकता, क्योंकि यदि केवल किसी ग्राम विशेष को ‘शंभल’ नाम दिया गया होता तो उसकी स्थिति भी बताई गई होती। भारत में खोजने पर यदि कोई ‘शंभल’ नामक ग्राम मिलता है तो वहां आज से लगभग चैदह सौ वर्ष पहले कोई पुरुष ऐसा नहीं पैदा हुआ जो लोगों का उद्धारक हो। फिर अंतिम अवतार कोई खेल तो नहीं है कि अवतार हो जाए और समाज में ज़रा-सा परिवर्तन भी न हो, अतः ‘शंभल’ शब्द को विशेषण मानकर उसकी व्युत्पत्ति पर विचार करना आवश्यक है।
    (1) ‘शंभल’ शब्द ‘शम्’ (शांत करना) धातु से बना है अर्थात, जिस स्थान में शांति मिले।
     (2) सम् उपसर्गपूर्वक ‘वृ’ धातु में अप् प्रत्यय के संयोग से निष्पन्न शब्द ‘संवर’ हुआ। वबयोरभेदः और रलयोरभेदः के सिद्धांत से शंभल शब्द की निष्पत्ति हुई, जिसका अर्थ हुआ ’जो अपनी ओर लोगों को खींचता है या जिसके द्वारा किसी को चुना जाता है।’
    (2) ‘शम्वर’ शब्द का निघण्टु (1/12/88) में उदकनामों के पाठ हैं। ‘र’ और ‘ल’ में अभेद होने के कारण शंभल का अर्थ होगा जल का समीपवर्ती स्थान’।4
    इस प्रकार वह स्थान जिसके आसपास जल हो और वह स्थान अत्यंत आकर्षण एवं शांतिदायक हो, वही शंभल होगा। अवतार की भूमि पवित्र होती है। ‘शंभल’ का शाब्दिक अर्थ है—शांति का स्थान। मक्का को अरबी में ‘दारुल अमन’ कहा जाता है, जिसका अर्थ शांति का घर होता है। मक्का में प्राचीन काल से कअबा स्थित था जो मक्कावासियों के समक्ष प्रतिष्ठित व आदरणीय भी था तथा श्रद्धा व आस्था का पात्र भी। अतः वहां रक्तपात व युद्ध निषिद्ध था। मक्का मुहम्मद (सल्ल॰) का कार्य स्थल रहा है।

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  21. जन्म तिथि

    कल्कि पुराण में अंतिम अवतार के जन्म का भी उल्लेख किया गया है। इस पुराण के द्वितीय अध्याय के श्लोक 15 में वर्णित है—
    द्वादश्यां शुक्ल पक्षस्य, माधवे मासि माधवम्।
    जातो ददृशतुः पुत्रं पितरौ हृष्टमानसौ।।
    अर्थात ‘‘जिसके जन्म लेने से दुखी मानवता का कल्याण होगा, उसका जन्म मधुमास के शुक्ल पक्ष और रबी फसल में चन्द्रमा की 12वीं तिथि को होगा।’’ एक अन्य श्लोक में है कि कल्कि शंभल में विष्णुयश नामक पुरोहित के यहां जन्म लेंगे।5
    हज़रत मुहम्मद साहब (सल्ल॰) का जन्म 12 रबीउल अव्वल को हुआ। रबीउल अव्वल का अर्थ होता है: मधुमास का हर्षोल्लास का महीना। आप (सल्ल॰) मक्का में पैदा हुए। विष्णुयशसः कल्कि के पिता का नाम है, जबकि मुहम्मद साहब के पिता का नाम अब्दुल्लाह था। जो अर्थ विष्णुयश का होता है वही अब्दुल्लाह का। विष्णु यानी अल्लाह और यश यानी बन्दा=अर्थात् अल्लाह का बन्दा=अब्दुल्लाह।
    इसी तरह कल्कि की माता का नाम सुमति (सोमवती) आया है जिसका अर्थ है—शांति एवं मननशील स्वभाववाली। आप (सल्ल॰) की माता का नाम भी आमिना था जिसका अर्थ है शांतिवाली।

    अंतिम अवतार की विशेषताएं

    कल्कि की विशेषताएं हज़रत मुहम्मद साहब (सल्ल॰) के जीवन (सीरत) से मिलती-जुलती हैं। इन विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन यहां पेश किया जा रहा है।
    1. अश्वारोही और खड्गधरी : पहले लिखा जा चुका है कि भागवत पुराण में अंतिम अवतार के अश्वारोही और खड्गधरी होने का उल्लेख है। उसकी सवारी ऐसे घोड़े की होगी जो तेज़ गति से चलनेवाला होगा और देवताओं द्वारा प्रदत्त होगा। तलवार से वह दुष्टों का संहार करेगा। घोड़े पर चढ़कर तलवार से दुष्टों का दमन करेगा। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को भी फ़रिश्तों द्वारा घोड़ा प्राप्त हुआ था, जिसका नाम बुर्राक़ था। उस पर बैठकर अंतिम रसूल (सल्ल॰) ने रात्रि को तीर्थ यात्रा की थी। इसे ‘मेराज’ भी कहते हैं। इस रात आपकी अल्लाह से बातचीत हुई थी और आपको बैतुल-मक़्दिस (यरुशलम) भी ले जाया गया था।
    मुहम्मद साहब को घोड़े अधिक प्रिय थे। आपके पास सात घोड़े थे। हज़रत अनस (रज़ि॰) से रिवायत है कि मैंने हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को देखा कि घोड़े पर सवार थे और गले में तलवार लटकाए हुए थे।6 आपके पास नौ तलवारें थीं। कुल परम्परा से प्राप्त तलवारें जुल्फिक़ार नामक तलवार, क़लईया नामवाली तलवार।
    2. दुष्टों का दमन : कल्कि के प्रमुख विशेषताओं में एक विशेषता यह भी है कि यह दुष्टों का ही दमन करेगा।7 धर्म के प्रसार और दुष्टों के दमन में मदद के लिए देवता भी आकाश से उतर आएंगे।8 हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) ने दुष्टों का दमन किया। उन्होंने डकैतों, लुटेरों और अन्य असामाजिक तत्वों को सुधारकर मानवता का पाठ पढ़ाया और उन्हें सत्य मार्ग दिखाया। हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) ने ऐसे कुसंस्कृत लोगों को सुसंस्कार से रहना सिखाया। औरतों को उनका हक़ दिलाया। एकेश्वर के साथ तमाम देवताओं के घालमेल का आपने ज़ोरदार खंडन अर्थात् प्राचीनतम एकेश्वरत्व को पूर्णतया शुद्ध किया तथा कहा कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं है, बल्कि सनातन धर्म है। दुष्टों के दमन में आपको फ़रिश्तों की मदद मिली। क़ुरआन मजीद में अल्लाह कहता है कि अल्लाह ने तुमको बद्र की लड़ाई में मदद दी और तुम बहुत कम संख्या में थे, तो तुमको चाहिए कि तुम अल्लाह ही से डरो और उसी के शुक्रगुज़ार होओ। जब तुम मोमिनों से कह रहे थे कि क्या तुम्हारे लिए काफी नहीं है कि तुम्हारा रब तुमको तीन हज़ार फ़रिश्ते भेजकर मदद करे, बल्कि अगर उस पर सब्र करो और अल्लाह से डरते रहो, तो अल्लाह तुम्हारी मदद पांच हज़ार फ़रिश्तों से करेगा।9
    सूरः अहज़ाब में भी हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को ईश्वर की मदद मिलने का उल्लेख है। इस सूरः की आयत संख्या 9 में वर्णित है कि ‘‘ऐ ईमानवालो! अल्लाह की उस कृपा का स्मरण करो, जब तुम्हारे विरुद्ध सेनाएं आईं तो हमने भी उनके विरुद्ध आंधी और ऐसी सेनाएं भेजीं, जिनको तुम नहीं देखते थे, और जो कुछ तुम कर रहे थे, वह अल्लाह देख रहा था।’’ इस प्रकार दुष्टों का नाश करने में ईश्वर ने हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) की मदद के लिए अपने फ़रिश्ते और अपनी सेनाएं भेजी।
    3. जगत्पति : पति शब्द ‘पा’ (रक्षा करना) धातु में उति ‘प्रत्यय’ के संयोग से बना है। जगत का अर्थ है संसार। अतः जगत्पति का अर्थ हुआ संसार की रक्षा करनेवाला। भागवत पुराण में अंतिम अवतार कल्कि को जगत्पति भी कहा गया है।10
    हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) जगत्पति11 हैं, क्योंकि उन्होंने पतनशील समाज को पतनग्रस्त होने से बचाया। उसकी रक्षा की और संमार्ग दिखाया। आप सारे संसार के लोगों के लिए ईश्वर का संदेश लेकर आए। क़ुरआन में है—‘‘ऐ मुहम्मद एलान कर दो कि सारी दुनिया के लिए नबी होकर तुम आए हो।’’ 12 एक अन्य स्थान पर है—‘‘अत्यंत बरकत वाला है वह जिसने अपने बंदे पर पवित्रा ग्रंथ क़ुरआन उतारा ताकि संपूर्ण संसार के लिए (पाप व दुष्कर्म के भीषण परिणाम से) सचेत करने वाला हो।13

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  22. Muhammed (saw) ka zikr Hindu Mazhabi Kitaab mein
    2 November 2011 at 00:47
    Muhammed (saw) ka zikr Hindu Mazhabi Kitaab mein janney se pahley hamarey liye yeh jaan’na zarori hai k “Avataar” ka kya matlab hota hai

    Avataar ek Sanskrit word hai jo bana hai Av-tra se jis ka matlab hota hai “To sent Down” hindi mein hota hai “nichey Bhejna”

    Oxford Dictionary:

    According to Hindu mythology

    Avataar ka matlab hota hai Bhagwaan insaan ka roop le kar is zameen par ata hai or burai ko nasht karta hai

    Or Aksar Hindu apni is baat ko sabit karney k liya Bhagavad Gita k ek Shloka ka Sahara letey hai

    Bhagavad Gita Chapter: 4 Verse: 7-8

    Yada - Yada hi dharamastya

    Glaney Bhawati Bharata

    Sam bhawani yu’gey - yu’gey



    Is ko dubara dohraya hai Bhagavad Purana mein

    Bhagavad Purana Khand: 9 Addhyay: 24 Shloka: 56



    Yada - Yada hi dharamastya

    Glaney Bhawati Bharata

    Sam bhawani yu’gey - yu’gey

    Is Shloka ka matlab hota hai Jab – Jab Zulm bhadey ga Oh! Bhaarta or jab bhi neki ghatey gi main roop dharan karo ga acchahi ka saath deney k liye or sacchey dharam ko kayam karney k liye, har yug mein main roop dharan karo ga

    Is se zikr Ata hai Avataar ka lekin Hindu Vidhwaan mein is baat ko le kar Ikhtelaaf hai, jo Veda ko strictly follow kartey hai woh kahtey hai k Bhagwaan Insaan ka roop nehi leta kyu k Avataar ka zikr Veda mein kahi nehi hai isi liye Bhagwaan insaan nehi Banta Balkey insano mein se kisi ko bhi chunta hai or us k zar’ye se who burai ko nasht karta hai

    Muhammed (saw) ka zikr Bhavishya Purana mein…



    Bhavishya Purana Parv 3 Khand 3 Addhyay 3 Shloka 5-8

    Ek Malecha (Foreigner) aye ga, jo Marusthal (Registaan) se aye ga. Apney sathiyon k saath, or os ka naam hoga Muhammed (saw), or Raja Bhoj is Maha Dave Arab ka Istekbaal karey gey or os ko Panchgavya mein nahlaye gey, or izzat k saath os ko tohfa dey gey or kahey gey k aap insaniyat k liye ek misaal hai, or aap insaniyat k liye Rahmet hai or aap ne ek badi tadaat mein acchey log ko ekhatta kiya, ta k aap dushmano ko

    khatam kar sakey.



    Bhavishya Purana Parv 3 Khand 3 Addhyay 3 Shloka 10-27

    Malecha is Zameen ko kharab kar chukey, ek shaks main ne bheja tha jo galat log ko sidhi rah par le kar aya, lekin abhi dushmano ne ek badey dushman ko bheja hai or in dushmano ko nasht karey gey ek admi jis ka naam hai Muhammed (saw).

    Or woh logo ko sidhi rah dikhaye gey or Aye! Raja Bhoj tumhey Pishacha ki Zameen par janey ki zarorat nehi hai main khud tum ko isi jagah paak karo ga, or ek insaan atey hai ek farishtey k roop mein or kahtey hai mujhey bheja hai Ishwar Parmatma ney Aarya dharam ka’em karney k liye (Deen-UL-Haq) or mera man’ney waley woh shaks hai jis ki khatna ho chuki hai, jis k sir pey shendi nehi hai, jo daadi rakhta hai, jo inkelaab barpa karta hai, jo acchey kaam karta hai, jo logo ko “Namaz” ki taraf bulata hai, jo sari Halaal cheez khata hai lekin suwar ka gosh nehi khata, who bhaaji paala-ghaas poos khaney se paak nehi hota hai lekin jang k maidan mein hissa lene se paak hota hai in insaano ka naam hia “Musalmaan”.

    Muhammed (saw) ka zikr Bhagwat Purana mein…



    Bhagwat Purana Book: 12 Hymn: 2 Veres: 18-20

    Vishnuyaas k ghar mein Jo ek nek Brahman hai or sambhala shahar k ameer (chief) hai us k ghar mein paida hoga kalki Avataar or in k paas 8 sifaat hongi or yeh aye ga ek ghodey par sidhey haath mein talwaar le kar or dushman KO khatam karein gey

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  23. i) Wisdom

    ii) Self control

    iii) Respected lineage

    iv) Revel Knowledge

    v) Velour

    vi) Measured Speech

    vii) At most Charity

    viii) Gratefulness



    Bhagwat Purana Khand: 1 Addhyay: 3 Shloka: 25

    Kalyug mein jab Raja chor jesa bartao karein gey vishnuyaas k ghar mein paida hongey kalki Avataar.

    Muhammed (saw) ka zikr Veda mein…



    Atharvaveda Book: 20 hymn: 127 Veres: 1-14

    Isey kaha jata hai Kuntap Sukta…

    Kuntap- Mushkilaat ko dhoor karna-

    peat mein chupey howey gudoodh

    (Kuch mantra hai jis ka matlab aap nehi samajh paye gey, kuch waqt k baad aap ko pata chalein ga us k kya maani hai)

    Dunya ka beech ka hissa (Makka) center of the world



    Atharvaveda Book: 20 hymn: 127 Veres: 1

    Woh hai narashansa (Tareef k layek) woh hai Kaurama (woh Jo aman KO phaylaye) or os k 60,000 dushman hai



    Atharvaveda Book: 20 hymn: 127 Veres: 2

    Yeh rishi camel par sawaar ho kar aye ga

    (Koi bhi Brahman camel ki sawari nehi kar sakta kyu ki yeh likha hai Manusmriti mein)



    Manusmriti Chapter: 11 Verse: 202

    Brahman k liye camel or ass ki sawari haram hai

    (Is baat se yeh saaf hai k who rishi Brahman nehi hai)



    Atharvaveda Book: 20 hymn: 127 Veres: 3

    Woh hai mamah rishi

    (Mamah Ka matlab hota hai Mahan or dusra matlab hota hai Muhammed)

    Mantra mein mamah ka lafz istemaal howa hai, koi bhi Indian rishi ka naam mamah nehi tha, Mamah lafz aya hai Mah se jis ka matlab hota hai bohot izat wala



    Atharvaveda Book: 20 hymn: 127 Veres: 4

    Vachyesv rebh, ‘Oh! Woh hai tareef k layek

    (Arabic mein hota hai Muhammed)

    Atharvaveda Book: 20 hymn: 21 Veres: 6

    WO log jab suneingey tareef jang k Maidaan mein to UN ka hosala badhey ga or woh jeet jayein gey 10,000 dushman k khilaaf bina koi jang k ‘jo lad rahey thay “Karo” k khilaaf’

    (yahan par baat ho rahi hai battle of Ahzab ki jis mein dushmano ki tadaad 10,000 hi thi or musalmaan woh jang bina kisi jang ladey hi jang jeet gaye thay Qur’an mein saaf likha hai Ch. 33 V. 22 mein k jab musalmaan dushmano ko dekhteiy hai to un ki himmat afzai hoti hai)

    Atharvaveda Book: 20 hymn: 21 Veres: 7

    Parmatma ki madat se woh 20 Raja KO nasht karein gey or 60,099 dushman KO mare gey Jo “Abhunda” k khilaaf thay

    (Is mantra mein rishi k liye ek lafz ka istemaal kiya Gaya hai Jo hai “Abhunda” jis ka matlab hota hai orphan, yateem or tareef k layek)



    Rigveda Chapter: 1 Hymn: 53 Veres: 9

    Ishwar ki madat se woh 20 Raja KO nasht karein gey or 60,099 dushman KO mare gey Jo “Sushrama” k khilaaf thay

    (Is Shloka mein rishi k liye ek or lafz ka istemaal howa hai Jo hai “Sushrama” jis ka matlab hota hai woh insaan Jo tareef k layek ho or Arabic mein hota hai Muhammed)

    Samveda Agnimantra Veres: 64

    Yeh rishi apni maa ka doodh nehi piye ga

    (Muhammed (saw) ne apni maa ka doodh nehi piya tha, da’ee Halima ne pilaya tha)

    Muhammed (saw) ka zikr naam se Ahmed

    Samveda Uttar chit Veres: 1500

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  24. Samveda Indra Chapter: 2 Veres: 152

    Yajurveda Chapter: 31 Verse: 18

    Rigveda Book: 8 Hymn: 6 Mantra: 10

    Atharvaveda Book: 8 Hymn: 5 Mantra: 16

    Atharvaveda Book: 20 Hymn: 126 Mantra: 14



    Muhammed (saw) ka zikr “Narashansa” se Veda mein…



    Yajurveda Book: 20 Verse: 37

    Yajurveda Book: 20 Verse: 57

    Yajurveda Book: 21 Verse: 31

    Yajurveda Book: 21 Verse: 55

    Yajurveda Book: 28 Verse: 02

    Yajurveda Book: 28 Verse: 19

    Yajurveda Book: 28 Verse: 42

    Yajurveda Book: 29 Verse: 27



    Rigveda Book: 01 Hymn: 013 Veres: 3

    Rigveda Book: 01 Hymn: 018 Veres: 9

    Rigveda Book: 01 Hymn: 106 Veres: 4

    Rigveda Book: 01 Hymn: 142 Veres: 3

    Rigveda Book: 02 Hymn: 003 Veres: 2

    Rigveda Book: 05 Hymn: 005 Veres: 2

    Rigveda Book: 07 Hymn: 002 Veres: 2

    Rigveda Book: 10 Hymn: 064 Veres: 3

    Rigveda Book: 10 Hymn: 182 Veres: 2



    Muhammed (saw) ka zikr Kalki Purana mein…



    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 4,5,7,11,15

    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 4



    Vishnuyaas k ghar mein paida hoga Kalki Avataar jo sambhala shahar k ameer hai

    Yeh rishi antim rishi hai, is Kalki Avataar ko sab se pahli vahi ek gaar mein aye gi or phir who hijrat karein ga shummal (north) ki taraf. Yeh kalki Avataar saari insaniyat k liye bheja Gaya hai

    (Muhammed (saw) sari insaniyat k liye aye hai yeh likha hai Qur’an mein Ch. 34 V. 28 or Muhammed (saw) Akhri rasool hai yeh likha hai Qur’an mein Ch. 33 V. 40)



    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 5

    Is kalki Avataar k chaar saathi hongey



    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 7

    Devta is kalki Avataar ka saath de gey jang k Maidaan mein

    (Allah (swt) Ney Muhammed (saw) ka saath jang mein diya hai or is ka zikr Qur’an mein bhi hai Ch. 3 V. 123-125 or Ch. 8 V. 9)



    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 11

    Yeh kalki Avataar janam le ga vishnuyaas k ghar mein sumati k cock mein

    Vishnu – Ishwar- Khuda- Allah

    Yaas – Banda

    (yani Khuda ka banda ya Allah ka banda jab Arbi mein tarjuma kartey hai to hota hai Abdullah or Muhammed (saw) ka father ka naam “Abdullah” tha)

    Sumati – Aman

    (Aman ka tarjuma jab hum Arbi mein kartey hai to hota hai “Aamina” or Muhammed (saw) ki maa ka naam Aamina tha)



    Kalki Purana Chapter: 2 Veres: 15

    Yeh kalki Avataar 12 maadhave mahiney ki tarik KO paida hoga

    (Muhammed (saw) 12 Rabi-ul-aw’wal ko paida howey thay)

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  25. Galat mat likho madar..... ! Tere ma Ki ... !

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