गुजरात में अकोदरा के ICICI बैंक में सबकुछ सामान्य दिनों जैसा हे. इक्का-दुक्का लोग ही बैंक आ-जा रहे हे. बाहर ना नोट बदलवाने के लिए लंबी कतार हे और ना ही खुल्ले पैसो के लिए हायतौबा हे.

ऐसा इसलिए हे की अकोदरा देश का पहला डिजिटल और कैशलेस गाँव हे. यंहा बच्चे-बच्चे के हाथ में टेबलेट हे. Education का डिजिटलाइजेशन हो रहा हे. सभी गाँव वालों के खाते हे. अप्रैल 2015 में ICICI बैंक ने इस गाँव को गोद लिया और पुरे गाँव का डिजिटलाइजेशन किया. अधिकांश लेन-देन ऑनलाइन हे, इसलिए 500-1000 रूपये के नोट बंद होने के बाद भी यंहा कोई असर नहीं हे. हां कुछ ग्रामीणों ने जरुर अपने खतों में पैसा जमा करवाया हे.
गाँव के पलकभाई सुरेशभाई पटेल बताते हे की पैसा निकालने और जमा करवाने में कोई दिक्कत नहीं हे. हमारा गाँव डिजिटलाइज्ड हे. जयंतीभाईपटेल बताते हे की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ही नकदी से खरीदारी करते हे. युवा, शिक्षित लोग तो अधिकांश मोबाइल को ही बेहतर मानते हे. 

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अकोदरा की सरपंच ताराबहन पटेल बताती हे की हमारे गाँव को तो नकद की जरूरत ही नहीं हे, हमारे यंहा तो अधिकांश लेनदेन कैशलेस होता हे. नकदी और नोटों की प्रॉब्लम नहीं हे.

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