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दीपावली अमृत सिद्धी योग पूजा विधि Deepavali date and day


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इस बार दीपावली पर ऐसा महासंयोग पड़ रहा है, जो सदियों में एक बार आता है सौभाग्य, बुधादित्य व धाता योग बन रहा है ये तीनों योग बहुत ही विशेष हैं 131 साल बाद गुरु-राहु का योग- सन् 2016 दीपावली से पहले रवि पुष्य अमृत सिद्धी योग 23 अक्टूबर, रविवार को 15 घंटे का होगा। महामुहूर्त के दौरान धनतेरस व दीपावली से पहले खरीददारी करना शुभ होगा। इस बार धनतेरस से पहले आने वाला रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग श्रीवत्स योग व अहोई अष्टमी, कालाष्टमी एवं सूर्य बुध के एक साथ होने से बनेगा। बुधादित्य राजयोग के साथ बाजार में धन वर्षा कराएगा।
इस बार दीपावली पर गुरु सिंह राशि में रहेगा एवं राहु कन्या में रहेगा। यह योग इससे पहले 1884 में बना था। उस समय भी राहु कन्या राशि व गुरु सिंह राशि में था। इसके बाद यह योग दोबारा 131 साल बाद सन 2145 में बनेगा। गुरु सिंह राशि में व राहु कन्या राशि में रहने से लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए गए उपायों में सफलता मिलेगी। राहु की अच्छी स्थिति के कारण इस दिन किए गए तांत्रिक प्रयोग सिद्ध होंगे।

इन योगों से मिलेगा लाभ:- योगों में की गई लक्ष्मी पूजा से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति संभव है। ये योग धन लाभ के लिए भी बहुत शुभ माने गए हैं। अनाज, किराना, धातु व राजनीति से जुड़े लोगों के लिए ये योग बहुत खास रहेंगे।

इस बार दीपावली से एक ऐसा महासंयोग पड़ रहा है, जो सदियों में एक बार आता है। लगातार 15 घंटे होंगे अति शुभ। यों दीपावली से पहले रवि पुष्य अमृत सिद्धि योग 23 अक्टूबर, रविवार को 15 घंटे का होगा। विद्वानों का माना है कि ये महामुहूर्त है ऐसे में इस दौरान धनतेरस व दिवाली से पहले खरीदारी शुभ होगी। धनतेरस से पहले आने वाला रवि पुष्य नक्षत्र का संयोग श्रीवत्स योग व अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और सूर्य बुध के एक साथ होने से बनेगा। बुधादित्य राजयोग के साथ बाजार में धन वर्षा कराएगा।

ध्यान रहे इस साल दीपावली से 8 दिन और धनतेरस से 6 दिन पहले रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। इस दिन खरीदारी का विशेष महत्व माना गया है। रवि पुष्य अपने आप में श्रेष्ठ नक्षत्र में माना जाता है। दीपावली के पहले 15 घंटे का रवि पुष्य नक्षत्र रहेगा। दिवाली के पहले 23 अक्टूबर को खरीदी के लिए अनुकूल मुहूर्त रवि पुष्य नक्षत्र आ रहा है। यह पुष्य नक्षत्र एक दिन पूर्व 22 अक्टूबर शनिवार को रात्रि 8:41 बजे से लग जाएगा, जो रविवार को रात्रि 8:41 तक रहेगा।

इसकी अवधि रविवार के दिन 15 घंटे रहेगी। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है, इसलिए इसमें की गई खरीदी समृद्धि कारक होती है। पुष्य नक्षत्र की धातु सोना है, जिसे खरीदने से अत्याधिक लाभ मिलेगा। 22 को शनि पुष्य व 23 को रविपुष्य का योग बनने से भूमि, भवन, वाहन व अन्य स्थाई सम्पत्ति में निवेश करने से लाभ प्राप्त होगा।

 रवि-पुष्य (23 अक्टूबर) के लिए महामुहूर्त

सोना-चांदी, बर्तन, कपड़ा, इलेक्ट्रानिक के सामान, बही खाता खरीदने का महा मुहूर्त

प्रात: 9 से 10:30 लाभ रहेगा।

प्रात:10:30 बजे से 12 अमृत रहेगा।

दोपहर 1:30 से 3 शुभ रहेगा।

शाम 6 से 7:30 शुभ रहेगा।

शाम 7:30 से 9 अमृत तक।

स्थिर लग्न वृश्चिक प्रात:काल 8:13 से 10:13 बजे तक।

स्थिर लग्न कुंभ लग्न दोपहर 2:22 से 3:55 बजे तक।

स्थिर लग्न वृषभ सायंकाल 7से रात 9 बजे तक रहेगा
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