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कई बार ऐसा होता हे की हमें किसी की आदत अच्छी नहीं लगती, या हमें बार बार उन्हें सुधारने की कोसिस करनी पड़ती हे. आज यह कहानी भी ऐसी हे जिसमे किस तरह एक महिला ने अपनी पड़ोसिन का इलाज किया. आईये पढ़ते हे कहानी.

मुझे पढने का बहुत शोक हे इसलिए कुछ पत्रिकाएं घर मंगवाती हु. यह जानकारी पड़ोसिन को भी थी, इसलिए वो अक्सर मेरे दफ्तर निकल जाने के बाद घर आती और सास से पत्रिकाए ले जाती. बात 2-4 घंटे पढने तक तो ठीक थी, लेकिन समस्या तब होती, जब पत्रिकाए 1-2 दिन बाद वापिस मिलती और उसमे अक्सर कोई चित्र या विज्ञापन कटा-फटा होता. 

मेने पड़ोसिन को कई बार इशारों में और यंहा तक की प्रत्यक्ष रूप से भी समझाया. मेने कहा पत्रिकाओं में कई काम की जानकारी होती हे, जो पन्ने कटे होने से अधूरी रह जाती हे, अत: वो ऐसा ना किया करे. मगर वो हर बार अपने बच्चों और पति पर बात डालकर बच जाती. 

इस बार मेने समस्या का एक उपाय सोचा. जब पेपरवाला बिल लेने आया तो उसे आधा बिल देकर, बाकि के लिए पड़ोसिन के घर भेज दिया. थोड़ी देर बाद वो लोटकर आया और बोला “मेडम कह रही हे की हमारी अलग पत्रिकाएं आ रही हे, इसलिए सारा बिल आप ही देगी”. उस दिन के बाद उसने पत्रिकाएं ले जाना तो दूर, कभी मेरे घर आने पर उन्हें उल्टा-पलता तक नहीं.
अच्छा सबक सिखाया हे न. कई बार छोटी-छोटी कहानियाँ भी अच्छा सबक सिखा देती हे और बहुत बड़ी परेशानियों से छुटकारा दिला देती हे. उम्मीद करता हु की यह कहानी आपको पसंद आई होगी. इस ब्लॉग से जुड़े रहे और नई-नई जानकारियाँ पाते रहे.

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