पेट में गैस बनने समस्या कारण पादने में दुर्गन्‍ध symptoms acidity and gas problem solution in hindi


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पादना आखिर क्‍या है? - खाने पीने के दौरान भी बहुत सी हवा हमारे शरीर में पहुंचती है इसके अलावा हमारी आंतों में केमिकल रिएक्‍शन और वैक्‍टीरिया से भी कुछ गैस बनती है वह ही पादने में शरीर से बाहर निकलती है. कोई भी इंसान जब पादता है तो जो गैस उसके शरीर से बाहर निकलती है उसमें सामान्‍य तौर पर 59% नाइट्रोजन, 21% हाइड्रोजन, 9% कार्बन डाईऑक्‍साइड, 7% मीथेन, 4% ऑक्‍सीजन और सिर्फ 1% सल्‍फर युक्‍त गैस होती है.

पादने में दुर्गन्‍ध क्‍यों आती है? - खाने पीने में हम जितनी ज्‍यादा सल्‍फर युक्‍त डाइट लेते हैं, उतनी ही ज्‍यादा बदबू हमारे पादने में आती है. पत्‍तागोभी, बीन्‍स, चीज़, सोडा और अंडे आदि खाने से शरीर में ज्‍यादा बदबूदार गैस बनती है.

कोइ भी व्‍यक्‍ित औसत रूप से एक दिन में 14 बार पादता है. यह आंकड़ा मेल और फीमेल में मामले में लगभग एक जैसा है, हालांकि महिलांए जनरली इसे एक्‍सेपट नहीं करती हैं. एक फन फैक्‍ट यह भी है कि किसी इंसान के पादने से लगभग 7 सालों में इतनी गैस और ऊर्जा पैदा हो जाएगी जो एक परमाणु बम की इनर्जी के बराबर

किसी इंसान के पादने में गैस के शरीर से बाहर निकलने की औसत स्‍पीड 10 फिट प्रति सेकेंड होती है. डाक्‍टरों में इस बात को लेकर मतभेद हैं कि अगर कोई संकोच में पादने को रोक कर रखता है तो ऐसा करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा नहीं है. एक्‍सपर्टस् के अनुसार गैस को शरीर से बाहर निकालना हमारे डाइजेस्‍टिव सिस्‍टम का सामान्‍य काम है इसलिए गैस को पेट में रोकना हमें कोई नुकसान नहीं पहुचाता, हालांकि ऐसा करने से आपको अनकम्‍फर्टेबल महसूस हो सकता है.

आफिस कल्‍चर वाले लोगों के बीच पादने को आमतौर पर असभ्‍यता माना जाता है लेकिन बहुत से समाज और कल्‍चर्स में लोगों के बीच आवाज के साथ पादने को भी सामान्‍य ढंग से लिया जाता है. इसको लेकर एक मजेदार फैक्‍ट यह भी है कि चाइना में professional fart-smeller के तौर पर आप जॉब भी पा सकते हैं.

रिसर्च के मुताबिक किसी व्‍यक्‍ति के पादने में मीथेन और हाइड्रोजन गैस की जितनी ज्‍यादा मात्रा होगी उतनी ही वह गैस ज्‍यादा ज्‍वलनशील होगी यानि इस गैस को इकट्ठा कर लिया जाए तो यह आग के गोले में बदल सकती है.

आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि इंसान और बड़े जानवरों की अपेक्षा छोटे छोटे कीड़े मकोड़े अपने पेट से बहुत ज्‍यादा मीथेन गैस बाहर छोड़ते हैं जो पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुचाती है.

अगर आप संकोच और श्‍ार्म से पब्‍लिक प्‍लेस पर अपने पेट की गैस को बाहर नहीं निकलने देते हैं तो फिर्क न करें सोने के दौरान जब आपकी बॉडी रिलैक्‍स होगी तो वह गैस अपने आप शरीर से बाहर निकल जाएगी.

यह सुनकर तो आप शाक्‍ड रह जाएंगे कि मरने के बाद भी क्‍या कोई इंसान अपने शरीर से गैस बाहर निकाल सकता है. रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि मरने के 3 घंटे बाद तक शरीर से कई प्रकार की गैस अपने आप बाहर निकल सकती है.

पेट में गैस बनने की समस्या काफी तकलीफदेह साबित होती है - यह कई बार आपको शर्मिदा तो कर ही सकती है, आपके पाचन तंत्र की भी सेहत बिगाड़ सकती है। इस गैस के दुष्प्रभाव, कारण और बचाव के बारे में बता रही हैं हर व्यक्ति के शरीर में बनती है गैस यह शरीर से बाहर या तो डकार द्वारा या गुदा मार्ग से निकलती है। अधिकतर लोग 1 से 4 पिंट्स गैस पैदा करते हैं और एक दिन में कम-से-कम 14 से 23 बार गैस पास करते हैं। जिनकी पाचन शक्ति अक्सर खराब रहती है और जो प्राय: कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमें गैस की समस्या अधिक होती है। मशीनों पर निर्भर आधुनिक जीवनशैली ने शारीरिक सक्रियता काफी कम कर दी है। लोगों ने अपनी खानपान की आदतें भी काफी बिगाड़ ली हैं। उन्हें आराम से चबा-चबाकर पोषक भोजन खाने के बजाए जल्दी-जल्दी जंक फूड खाना पसंद है। यही वजह है कि आजकल गैस की समस्या से काफी लोग परेशान रहते हैं। लंबे समय तक रहने वाली गैस की समस्या अल्सर में बदल सकती है जो और कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

क्यों बनती है गैस  - निगली गई हवा द्वारा एरोफैगिया या निगली गई हवा पेट में गैस बनने का सबसे प्रमुख कारण है। हर कोई थोड़ी मात्रा में खाते और पीते समय हवा निगल लेता है। हालांकि, जल्दी-जल्दी खाने या पीने, च्यूंगम चबाने, धूम्रपान करने से कुछ लोग ज्यादा हवा अंदर ले लेते हैं, जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड होती हैं। कुछ हवा डकार के द्वारा बाहर निकल जाती है, लेकिन कुछ आंत में चली जाती है। बची हुई थोड़ी सी गैस यहां से बड़ी आंत में चली जाती है, जो गुदा मार्ग द्वारा बाहर निकलती है।

अनपचे भोजन के टूटने से शरीर कुछ कार्बोहाइड्रेट को न तो पचा पाता है और न ही अवशोषित कर पाता है। कई भोज्य पदार्थों में शुगर, स्टार्च और रेशे पाए जाते हैं। छोटी आंत में कुछ निश्चित एंजाइमों की कमी या अनुपस्थिति से इनका पाचन नहीं हो पाता। यह अनपचा भोजन छोटी आंत से बड़ी आंत में जाता है, जहां बैक्टीरिया इस भोजन को तोड़ते हैं। इससे हाइड्रोजन, कार्बन डाईऑक्साइड और एक तिहाई लोगों में मिथेन निकलती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में एंजाइम का स्तर कम हो जाता है, इसलिए गैस की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है।

लक्षण और समस्याएं

पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं पेट फूल जाना, पेट में दर्द होना, डकार आना और गैस पास करना। इनके कारणों को समझकर उपचार किया जा सकता है।

डकार लेना

जब कोई व्यक्ति खाने के दौरान या बाद में डकार लेता है तो इसका अर्थ है कि उसने खाने के साथ ज्यादा मात्रा में हवा निगल ली है। लेकिन ज्यादा डकार आने का कारण पाचन तंत्र के ऊपरी भाग में पेप्टिक अल्सर या गैस्ट्रोपारेसिस जैसी समस्याएं हो सकता है। 
फ्लैटुलेंस

इसे सामान्य भाषा में गैस पास करना कहते हैं। अधिकतर लोग यह नहीं जानते कि एक दिन में 14-23 बार गैस पास करना सामान्य बात है। अधिक गैस बनना कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण नहीं होने का संकेत है।

पेट फूलना

पेट का फूलना गैस की वजह से हो सकता है या बड़ी आंत का कैंसर या हार्निया भी इसका कारण बन सकता है। ज्यादा वसायुक्त भोजन करने से पेट देर से खाली होता है। इससे भी पेट फूल जाता है और बेचैनी होती है।

पेट दर्दजब आंत में गैस मौजूद होती है, तब कुछ लोगों को पेट दर्द होता है। जब बड़ी आंत की बायीं ओर दर्द होता है, तो इससे हृदय रोग का भ्रम होता है, लेकिन जब दर्द दायीं ओर होता है, तो यह एपेन्डिक्स हो सकता है।

ये मुश्किलें बढ़ा सकती हैं गैस

जीभ पर सफेद पर्त जमा होने से खाने का जायका बिगड़ सकता है
सांस में बदबू की समस्या का सामना करना पड़ सकता है
मल से बदबू आने की समस्या हो सकती है
घरेलू नुस्खे

लहसुन पाचन की प्रक्रिया को बढ़ाता है और गैस की समस्या को कम करता है

नारियल पानी गैस की समस्या में काफी प्रभावकारी है

अदरक में पाचक एंजाइम होते हैं। खाना खाने के बाद अदरक के टुकड़ों को नींबू के रस में डुबोकर खाएं। गैस की समस्या से छुटकारा मिलेगा

लंबे समय से गैस से पीड़ित हैं तो लहसुन की तीन कलियों और अदरक के कुछ टुकड़ों को खाली पेट खाएं

प्रतिदिन खाने के साथ टमाटर खाएं। अगर टमाटर में सेंधा नमक मिला लें तो और अधिक फायदेमंद रहेगा

पुदीना खाएं, क्योंकि इससे पाचनतंत्र ठीक रहता है

हरी इलाइची के पाउडर को एक गिलास पानी में उबालें। इसको खाना खाने के पहले गुनगुने रूप में पी लें। इससे गैस कम बनेगी

ज्यादा गैस बनाने वाले भोजन

सब्जियां में ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी और प्याज

फल में नाशपति, केला और आड़ू

साबुत अनाज में गेहूं

सॉफ्ट ड्रिंक्स और फलों का जूस

दूध-दूध से बने उत्पाद, जैसे पनीर, आइस्क्रीम और डिब्बाबंद भोजन

ऐसे भोजन जिनमें सोर्बीटोल होता है। जैसे शूगर फ्री कैंडी या च्यूंगम

मटर, ब्रेड, सलाद, फलियां  >गैस से बचने के उपाय
कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और वाइन न पिएं, ये कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ती हैं

पाइप के द्वारा कोई चीज न पिएं बल्कि सीधे गिलास से पिएं

तला-भुना, मसालेदार भोजन न करें

तनाव भी गैस बनने का एक प्रमुख कारण है, इससे दूर रहने की कोशिश करें

कब्ज भी इसका एक कारण हो सकता है। जितने लंबे समय तक भोजन बड़ी आंत में रहेगा, उतनी मात्रा में गैस बनेगी

खाने को धीरे-धीरे और चबाकर खाएं। दिन में तीन बार के बजाए कुछ-कुछ घंटों के अंतराल पर मिनी मील खाएं

खाकर तुरंत न सोएं। थोड़ी देर टहलें ताकि पाचन भी ठीक रहे, पेट भी नहीं फूले

अपनी बायोलॉजिकल घड़ी को दुरस्त रखने के लिए एक निश्चित समय पर खाना खाएं

कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन ज्यादा गैस बनाते हैं। वसा और प्रोटीन युक्त भोजन कम मात्रा में गैस बनाते हैं

लैक्टोस से यह समस्या होती है, तो दूध और दूध से बने उत्पाद न लें

मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें

चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक का इस्तेमाल कम करें

जंक फूड और स्ट्रीट फूड न खाएं

व्यायाम, योग को दिनचर्या में शामिल करें और पैदल चलने की आदत डालें

धूम्रपान और शराब से दूर रहें

अधिक से अधिक रेशेदार भोजन लें

सर्वागासन, उत्तानपादासन, भुजंगासन आदि नियमित रूप से करना चाहिए<

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