आखिर फांसी की सज़ा के बाद जज क्यों तोड़ देता हे कलम - Top.HowFN.com

आखिर फांसी की सज़ा के बाद जज क्यों तोड़ देता हे कलम

आप अदालत जहाँ जज की कार्यवाई चलती हे और मुजरीम को सज़ा दी जाती हे वहां आप शायद नहीं गए होंगे, लेकिन आपने फिल्मों में अक्सर देखा होगा की जज सज़ा सुनाने के बाद अपनी कलम का निब तोड़ देता हे
जिसे बाद में कोई use ना कर सकें. अक्सर आपने देखा होगा की किसी को फांसी की सज़ा सुनाने के बाद जज अपनी कलम तोड़ देता हे. आखिर इसके पीछे कारण क्या हे वो आज में आपको इस पोस्ट में बताऊंगा.

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जब किसी को फांसी की सज़ा दी जाती हे तो वो अपने आप में एक बहुत बड़ी सज़ा होती हे. फांसी की सज़ा उसे ही मिलती हे जिसने कोई गंभीर अपराध किया हो. इसलिए उसे मौत की सज़ा सुनाई जाती हे. हाल ही में निर्भया काण्ड के अपराधियों को फांसी की सज़ा सुनाई गयी थी. एक कारण यह हे की जब जज किसी को फांसी की सज़ा देता हे तो जिस कलम से उसे फांसी की सज़ा दी जाती हे उसे भी मौत की सज़ा दे दी जाती हे. 

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इसका मतलब यह हे की उस कलम को भी मनहूस माना जाता हे जिसने किसी की जिंदगी ले ली हे. कलम को इसलिए भी तोड़ा जाता हे की ताकि इससे दोबारा किसी को फांसी की सज़ा ना सुने जाए और इसके बाद कोई ऐसा अपराध ना करें. कलम की निब तोड़ने का एक कारण यह भी हे की जज उस कलम को तोड़कर अपना प्रायश्चित करते हे. जिस तरह कलम से लिखी हुयी बात कोई नहीं मिटा सकता उसी तरह इस सज़ा को भी कोई नहीं रोक सकता.

जिस कलम से किसी की जिंदगी लिखी जाती हे अगर उसी कलम से किसी की जिंदगी ले ली जाये तो उसे रखना अच्छा भी नहीं माना जाता. इस लिए उस मनहूस कलम को तोड़ दिया जाता हे. इसलिए जज फांसी की सज़ा के बाद कलम तोड़ देता हे.

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