हर इन्सान अपनी जिंदगी में कोई ना कोई डर लेकर जी रहा हे और बाद में यह डर ही उन पर हावी होने लगता हे. इन डर की वजह से जिंदगी में निराशा पैदा होने लग जाती हे. अगर इन डर पे काबू पा लिया जाए तो अपनी जिंदगी को और ज्यादा खुलकर जिया जा सकता हे. आज की इस पोस्ट में, में आपको बताऊंगा की कैसे डर हमारी जिंदगी में हम पर हावी हे और कैसे करे इन पे काबू.

1. सबसे खतरनाक डर दुसरे क्या सोचेंगे
ज्यादातर इंसान तो इस डर के कारण कुछ अच्छा नहीं कर पाते हे की लोग क्या सोचेंगे, लोग क्या कहेंगे. उन्हें लगता हे की उनकी मजाक उड़ाई जाएगी या उन्हें पागल समझ लिया जायेगा. इस कारण वो अपनी जिंदगी खुलकर जी नहीं पाते हे. लेकिन सच्चाई तो यह हे की लोगो के पास खुद की समस्याओं से जूझने का टाइम ही नहीं हे वो लोगो के बारे में क्यों सोचेंगे. फिर भी लोग इस डर के कारन अपनी भावनाओं और सपनो को दबाये रखते हे की लोगो को पता लगेगा तो उन्हें गलत समझा जायेगा. सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग. जिंदगी हमारी तो इसे जीने के तरीके भी हमारे होने चाहिए. इसे इतना खुलकर जीना चाहिए की लोग आपकी तरह जिंदगी जीने के लिए तरसें.

2. किसी से दूर जाने का डर
कभी कभी किसी से दुर जाने का डर भी हमें काफी परेशान करता हे. जब आप अपने दोस्तों या परिजनों की सोच से कुछ अलग करते हे तो वे सब आपका विरोध करते हे पर आप उन्हें चीजो को अलग तरीके से करने का मतलब बताते हे तो वे मान जाते हे. किसी से दूर जाने का या अलगाव का डर मोह के कारण पैदा होता हे. आपको अपने मन को मजबूत करना होगा. साथ रहना और दूर जाना इसके लिए कभी कभी हालात भी जिम्मेदार होते हे. हमें इस बात को समझना होगा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ना होगा.

3. शान खो जाने का झूठा डर
अक्सर लोग दुनिया में खुद को दूसरों से बेहतर बताते रहते हे. ऐसे लोगो को ज्यादातर एक ही डर सताता हे की कही उनकी शान में कोई परेशानी ना आ जाये. इस डर को दूर करने के लिए वे अपने आस-पास झूठ का आवरण बना लेते हे. शान एक ना एक दिन जरुर खत्म होगी, इसलिए आपको सच्चाई का रास्ता अपनाना चाहिए. भगवान ने जैसा बनाया हे वेसे रहिये ना किस बात का झूठा दिखावा करना. दुनिया सच्चाई को मानती हे ना की झूठे दिखावे को.

4. बदलाव का डर
ज्यादातर लोग इस बात से डरते हे की सब चीजे बदल जाएगी. परिवर्तन तो प्रकृति का नियम हे. इसे कोई नहीं रोक सकता. विश्वास और आशा के आभाव में लोग बदलाव को स्वीकार नहीं करते हे. इसके बजाय खुद की सोच में बदलाव लाके होने वाले परिवर्तन को दिल से स्वीकार करना चाहिए. जीवन में नई चीजे आने से व्यक्तित्व का विकास होता हे.

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