वीर्य स्पर्म बेचकर कमाई कर रहे बेरोजगार युवक - Top.HowFN

वीर्य स्पर्म बेचकर कमाई कर रहे बेरोजगार युवक


आज की जानकारी चौका देगी ये सब जानोगे Price process pregnancy और हाल ही में आगरा में हुए आल इंडिया कांग्रेस ऑफ आब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी (आईकोग-2016) सम्मेलन में यह बात सामने आई

देश में कृत्रिम गर्भाशय का चलन तेज हो गया है और पता चला कि इस चलन ने विशेषत: युवाओं को नया रोजगार मिले है युवक शुक्राणु (स्पर्म) तो महिलाएं अंडाणु बेचकर मोटी कमाई कर रही हैं जिससे जिन दम्पति के यहाँ संतान नहीं होती वह मोती रकम में ख़रीदते है 

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शुक्राणु (स्पर्म) के लिए युवक को 800 से 1400 रुपये प्रति सैंपल मिल जाते हैं। अंडाणु की कीमत महिला की मांग निर्भर है। ऐसा इसलिए है कि एक तो ‘दानदाता’ महिलाएं कम मिलती हैं वहीं अंडाणु प्राप्त करने की शर्तें अपेक्षाकृत कड़ी हैं

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weird therapies to treat ailmentsदेश में कृत्रिम गर्भाशय का चलन तेज हो गया है। अधिकांश दंपति इन विंट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के जरिए संतान पा रहे हैं। न केवल औसतन एक से डेढ़ लाख दंपति प्रतिवर्ष इस तकनीक से लाभान्वित हो रहे हैं बल्कि यह कई बेरोजगारों के लिए मोटी कमाई का साधन भी बन गई है। आगरा ही नहीं गुड़गांव में भी आईवीएफ केंद्रों में आने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है

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इंडियन मेडिकल रिसर्च सेंटर (आईसीएमआर) की गाइडलाइन के मुताबिक शादीशुदा और एक बच्चे की मां के ही अंडाणु लिए जा सकते हैं। आईकोग सचिव और रेनबो एआरटी सेंटर की संचालक डा. जयदीप मल्होत्रा ने भी इसकी तस्दीक की है

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। उधर, गुड़गांव में टेस्ट ट्यूब बेबी का प्रचलन बढ़ रहा है स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सरयू शर्मा का कहना है कि बांझपन की वजह से अधिकांश दंपति अब इस तकनीक को अपनाने लगे हैं

इसके साथ ही ‘दानदाताओं’ का भी चलन बढ़ा है। पूरी नहीं हो पाती तमाम खूबियों की मांग बच्चे की आंखें नीली हों, ऊंचाई ठीक निकले, चेहरा गोल हो, रंग गोरा हो और विशेष ब्लड ग्रुप जैसी तमाम डिमांड के अनुसार सैंपल मिलता है

 डिमांड के तहत एआरटी बैंक ऐसे युवक-युवतियों का प्रोफाइल आईवीएफ सेंटर को भेजता है। खूबी का मिलान होने पर सैंपल जुटाए जाते हैं। एक सैंपल में ही तमाम खूबियों की मांग पूरी नहीं हो पाती।

जेनेटिक हिस्ट्री जानने के साथ ही होती है कई जांचें इच्छुक सेलर की विशेषज्ञ जेनेटिक हिस्ट्री तैयार कर रक्त और हार्मोंस की जांच कराते हैं।

  • एचआईवी, 
  • हेपेटाइटिस, 
  • टायफायड समेत 17 तरह की जांच होती है 


पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी इन सैंपल को तीन महीने के लिए स्टोर किया जाता है दोबारा से फिर यही जांच कराई जाती हैं पूरी तरह से आश्वस्त होने पर ही सेलर को ‘दानदाता’ की सूची में शामिल किया जाता है
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