घास, रेत पर नंगे पैर चलने से फायदे Benefits Of Going Barefoot Nange pair - Top.HowFN

घास, रेत पर नंगे पैर चलने से फायदे Benefits Of Going Barefoot Nange pair


  • इलेक्ट्रॉन संतुलन 
  • मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र  एक्टिव 
  • संवेदी अनुभवों सक्रिएता बढ़ाये 
मिट्टी, घास या रेत पर नंगे पांव चलने का मतलब हमारी बॉडी प्राकृतिक सतह पर चलने से प्राकृतिक चार्ज होती है उर्जा स्तर बढ़ने के साथ ही हाईपरटेंशन, अस्थमा, जोड़ों में दर्द,तनाव, नींद न आना,हृदय संबंधी समस्या, ऑस्टियोपोरोसिस, ऑथ्राईटिस, की समस्याएं भी समाप्त होती है -
 


ऐसा हमारे पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामायण में लिखा है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के समय 14 वर्षो तक नंगे पैर चलकर और पृथ्वी पर ही सोकर, बैठकर दिव्यशक्ति प्राप्त की थी, जिन शक्तियों के बल पर उन्होंने रावण का अंत किया था। इसी तरह से ऐसे बहुत से और महान लोग थे जिन्होंने पृथ्वी की अपार दिव्यशक्ति को जाना और उससे लाभ उठाया। पुराने जमाने में विद्यार्थियों को भी पृथ्वी पर ही बैठकर पढ़ाया जाता था।



योग साधना में एक बहुत जरूरी नियम है कि पृथ्वी पर बिना कुछ बिछाए सोना चाहिए। पहले के योगी ऐसा ही करते थे वो सोने के लिए किसी भी चीज का इस्तेमाल नही करते थे और वे चमत्कारिक रूप से शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियां प्राप्त करके संसार को आश्चर्यचकित कर देते थे।
नंगे पैर घूमने से पैर मजबूत और स्वस्थ बनते हैं। कुछ लोग बोलते हैं कि सर्दियों में नंगे पैर घूमने से ठंड शरीर में चढ़ जाती है लेकिन यह बात बिल्कुल गलत है। पृथ्वी पर बैठना भी बहुत ज्यादा लाभदायक होता है तथा इसी तरह से पृथ्वी पर लेटने से शरीर को और भी ज्यादा लाभ मिलता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन स्थितियों में बैठने या लेटने से पृथ्वी से हमारा संसर्ग बहुत ज्यादा रहता है। पृथ्वी से स्पर्श और संयोग से ही प्राणियों में जीवनशक्ति की पूरी उपलब्धि होती है। इसलिए अच्छे स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए पृथ्वी पर बैठना, लेटना और सोना जरूरी है।

पृथ्वी के अंदर एक बहुत ही अदभुत विद्युतशक्ति होती है जो नंगे पैर चलने वाले व्यक्ति के शरीर में जीवनशक्ति और ताजगी भरती है। बिल्कुल वैसे ही जैसे यह पेड़ों में शक्ति और जीवन भरती है, जो उस पर पूरी तरह से टिके हुए होते हैं। इस तरह से मनुष्य को भी एक चलता-फिरता पेड़ ही मानना चाहिए और यह मान लेना चाहिए कि जिस तरह से एक पेड़ पृथ्वी से अलग होकर पनप नहीं सकता उसी तरह से मनुष्य भी पृथ्वी से अलग होकर सुख शान्ति नहीं पा सकता जैसे पेड-पौधों को पृथ्वी से पोषण प्राप्त होता है, उसी तरह से मनुष्य भी पृथ्वी पर नंगे पैर चलकर पृथ्वी से रोगों से लड़ने की शक्ति, ताकत और लंबी उम्र प्राप्त कर सकता है। नंगे पैर चलने से मनुष्य को कभी भी आंखों के रोग नहीं होते।

अगर रोजाना कुछ समय तक नंगे पैर जमीन पर चला जाए तो इससे शरीर में बहुत ज्यादा शांति और ताजगी महसूस होती है तथा इससे बहुत से रोग भी दूर होते हैं।

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