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गोवर्धन पूजा की कहानी पूजा कैसे करते हैं why we celebrate govardhan puja in hindi hd image

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दीपावली के दूसरे दिन ही हर वर्ष कार्तिक महीने में गोवर्धन पूजा का महत्व बताया गया है और इस दिन गोवर्धन पर्वत की आराधना की जाती है दोस्तों क्या आप जानते हो कि इस पर्वत की पूजा करने का महत्व क्यों है आइए यही हम जानते हैं इस दिन भारतवर्ष की हिंदू धर्म में कई लोग 56 या 108 तरह के भिन्न-भिन्न प्रकार के पकवान भी बनाए थे हैं और गोवर्धन पर्वत को भगवान श्री कृष्ण कोई पकवान समर्पित किए जाते हैं

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दोस्तो गोवर्धन पर्वत की पूजा मनाने के पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है कहां जाता है जब इंद्र देवता पृथ्वी के मानवों को परेशान करने के लिए  क्योंकि गो इंद्र की पूजा कम करने लग गई थी मानव तो क्रोधित होकर इंद्र ने भारी बारिश कर दी थी और मथुरा में भारी बारिश के कारण सभी तरह की पशु पक्षी व मानव समाज भगवान श्री कृष्ण जी के पास पहुंचे की इतनी भयंकर बरसात से कैसे बचा जाए tab Shri Krishna Govardhan Parvat ki Sharan Mein jakar Unse Mohabbat Mangi Thi Ishq Ki Ek Kahani yeh bhi hai

Ki Bhagwan Shri Krishna ki maa Yashoda Jab andar ki Puja karne ki taiyari kar rahi thi

तब श्रीकृष्ण ने अपनी मां यशोदा से पूछा था कि वह इंद्र की पूजा क्यों कर रही हैं तब श्रीकृष्ण के इस तरह के सवाल के जवाब में यशोदा ने उनको जवाब में कहा था की सारे गांव बाबा खुद इसलिए भगवान इंद्र की पूजा करते हैं
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 ताकि उनकी ग्रामीण इलाकों में बा पशु पक्षियों को बारिश क्यों चलती है अच्छी फसलें हो पाती है और पैदावार अच्छी होती है तो इस तरह के सवाल को सुनकर भगवान श्री कृष्ण ने यशोधरा को कहा था कि ऐसी बात है तो हमें इंद्र की जगह भगवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए क्योंकि इस पर्वत पर जाकर ही तो गाय चारा खाती हैं और उन्हें घास मिलता है श्री कृष्ण की इस तरह की बात का असर उनकी मां के साथ साथ ब्रज वासियों पर भी होने लग गया और ब्रज वासियों ने इंद्र देवता की पूजा करने की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की ठान ली और वहीं से भगवान गोवर्धन की पूजा स्टार्ट हुई है

गोवर्धन पूजा करने की विधि भी बताई गई है

भगवान गोवर्धन की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी स्नान कर लिया जाता है और घर की रसोई में ताजे पकवान बनाए जाते हैं बा खेत और आंगन में भगवान गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है गाय भैंस खलियान खेत बेल दूध दही एवं दिवाली चुना आदि को गोबर अथवा मिट्टी से बनाया जाता है इस प्रकार सभी खेती से जुड़े हुए चीजें एवं पकवान प्राकृतिक साधनों की पूजा की जाती है जितना भी हो प्राकृतिक चीजों को इस पूजा में शामिल किया जाता है उसके बाद ही पूजा-अर्चना की जाती है इसके बाद भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज की आरती भी की जाती है इस दिन कहा जाता है पूरे कुटुंब के साथ बैठकर भोजन सात करना चाहिए

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