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खालिस्तान का सच क्या है आंदोलन भिंडरावाले का इतिहास khalistan history in hindi 2020 operation blue star movement

Operation blue star documentary in hindi एक ऐसा भारतीय सेना का ऑपरेशन है जो इन्दरा गांधी की हत्या पर  ख़त्म हुआ जिसे खालिस्तान नक्शा खालिस्तान की मांग खालिस्तान आंदोलन खालिस्तान 2020 क्या है भिंडरावाले का इतिहास नाम से जाना जाता है

क्या ऑपरेशन ब्लू स्टार विध्वंस की साजिश थी यह बात है 6 जून 1984 की जब बारूद ने अकाल तख्ते को छल्ली किया था

आक्रोश कि उस उगलती शाम में स्वर्ण मंदिर में सिखों की सबसे काली तारीख लिखी जानी थी बंदूकों को थामे हाथ तो फौजियों के थे लेकिन कंधा सियासत का देश बंटवारे के भावनात्मक और आर्थिक चोट के बावजूद पंजाब अपने पैरों पर खड़ा हो चुका था पंजाब की मेहनत की उपज पूरे देश का पेट पाल नहीं थी लेकिन सिक्खों के दिलों में एक अजीब सा संदेह चल रहा था
शायद यह सरहद पार की साजिश थी कि हिंदुओं को मिला हिंदुस्तान मुसलमानों को मिला पाकिस्तान और बीच में दो फिसदी सिक्क आवादी जिनकी किस्मत में सिर्फ अनदेखी उधर देश वंशवाद की पहली कढ़ी का साक्षी बन रहा था इंदिरा गांधी 1966 में प्रधानमंत्री बनी इंदिरा की चुनोतियों में देश की सुरक्षा भी शामिल थी 1970 के मध्य की बात है जब अकाली दल सिक्खों के Bulandi का झंडा ऊंचा करना जारी रखा

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    केंद्र से मांग की कि पंजाब को अधिक स्वायत्तता दी जाए लेकिन इंदिरा कई मोर्चों पर उलझी थी ना तो वह इस मांग को मानना चाहती थी ना ही इस बात पर ध्यान देने के लिए उनके पास वक्त था खैर बढ़ती ताकत ने उनको ऐसी पटकनी दी कि वह सत्ता से बेदखल ही होगई

     तभी पंजाब में एक नया नाम उभर रहा था राज्य के सबसे प्रभावशाली भिंडरावाले

    1984 blue star operation in punjabi

    भिंडरावाले के शब्दों में अजीब सा जादू था जो जोशीले भाषण में गजब का खिंचाव था लेकिन उनकी सोच बेहद कट्टर थी गैर सिख के बारे में अच्छी राय नहीं रखते थे निरंकारियों से उनकी कुछ ऐसी ही रंजिश थी पंजाब की सड़कें आए दिन गुटों की रंजिश का गवाह बनने लगी अप्रैल 1978 में ऐसी ही एक भिड़ंत हुई निरंकारियों के हाथों भिंडवाले के 13 समर्थक मारे गये

     भिंडरावाले के पास ऐसी भीड़ रहती थी जो उनको जान भी देने के लिए तैयार रहती थी

    भिंडरावाले के समर्थक खुलेआम मारकाट मचाते थे 24 अप्रैल 1980 को निरंकारी के गुरु बाबा की हत्या कर दी गई कुछ ही दिनों बाद फिर न्यूज़पेपर में भीमराव वाले के खिलाफ लिखा तो उसकी भी हत्या कर दी गई इस मामले में भिंडरावाले को गिरफ्तार किया गया

    जेल के बाहर उनके समर्थक और पुलिस के बीच खूनी संघर्ष भी हुआ पुलिस वालों ने भिंडरावाले के 18 समर्थक भी मार गिराए लेकिन अब भिंडरावाले का समर्थन और भी कट्टर होता जा रहा था

    1 महीने के बाद जब भिंडरावाले को सबूतों के अभाव में जेल से रिहा कर दिया गया तो भिंडरावाले को आभास हुआ कि लोग उसे अपने नायक के रूप में देखने लगे हैं पंजाब के ग्रामीण इलाकों में भिंडरावाले का समर्थन बहुत तेजी से बढ़ता ही जा रहा था उधर 1980 में केंद्र में बैठी इंदिरा गांधी सरकार का तब तक भिंडरावाले से कोई भी तकरार भी नहीं था आगे पढ़े - 8 तथ्य रामायण राम को सत्य साबित कर देती हे
      लेकिन अब भींडवाले पर राज्य में हिंसा फैलाने के कई आरोप लगने लगे थे देश का सबसे समृद्ध राज्य अंदरूनी हिंसा के आग में झोंक रहा था 1983 की शुरुआत में कई मारकाट लूटपाट की घटनाएं सामने आने लगी उंगलियां सीधे भिंडरावाले की तरफ उठने लगी लेकिन शुरुआत में सरकार की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं हुई 5 अक्टूबर को पंजाब में हथियारबंद लोगों ने एक बस को अगवा कर लिया गया जिसमें हिंदुओं को एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी गई इंदिरा आग बबूला हो उठी तो पंजाब में इमरजेंसी लगा दी गई पुलिस को आदेश दिया गया कि उपद्रवियों को देखते ही गोली मार दी जाए

      भिंडरावाले के टेप रिकोरेट भाषण हर गांव में भेजा जाने लगे जो खालिस्तान स्थान की मांग करते नजर आने लगे अब तक भिंडरावाले वाले के साथ में 95% सिख इकट्ठे होने लग गए थे

      दिल्ली में खलबली मची हुई थी 2 साल से पंजाब के आतंक को काबू में करने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था

      तभी पंजाब में अफवाह उड़ने लग गई कि भिंडरावाले को केंद्र में बैठी इंदिरा गांधी सरकार कभी भी गिरफ्तार कर सकती है

      भिंडरावाले ने अपने को बचाने के लिए स्वर्ण मंदिर में सबसे ऊंची जगह अलंकार तख्ता पर रहने लग गया कुछ महीने में मंदिर परिषद की ऐसी किलेबंदी होना स्टार्ट कर दी गई मानो युद्ध की तैयारी चल रही हो  सरकार के पास सिर्फ मंदिर की घेराबंदी की अलावा कोई चारा नहीं सूझ रहा था

       मई 1984 में इंदिरा को यकीन होने लगा था आतंक को खत्म करने के लिए सीधा अटैक करना ही सही रहेगा बातचीत के साथ 7 जून के महीने से भारतीय सेना पंजाब में जुटना शुरू हो गई मेजर जनरल कुलदीप सिंह कमांडर नियुक्त किए गए [

       दूसरी तरफ हजारों की तादात में श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर में खट्टा हो रहे थे

      2 जून तक अमृतसर पंजाब में भारतीय सेना के 1000 से अधिक सैनिक स्वर्ण मंदिर के आसपास इकट्ठा हो चुके थे

      घेराबंदी पुख्ता कर दी गई किसी को भी बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था श्रद्धा की खुशबू में बारूद की गंध खुलने लगी थी गुरुवाणी की आवाज को एक आतंकी सन्नाटा खामोश करने लगा था आस्था की जगह अविश्वास था मंदिर रणभूमि में परिवर्तित हो रहा था
      भारतीय सेना के रिटायर ब्रिगेडियर जीएस बरार का मानना था कि ऐसी सिचुएशन सेना नहीं मानने वाली थी पर आतंकवाद से निपटने के लिए वह मजबूर हो चुके थे उस रोज पंजाब के अन्य राज्यों से आवाजाही बंद कर दी गई शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया और आधी रात को मंदिर के अंदर और बाहर जबरदस्त गोली बारूद चालू हो गया 5 जून को पत्रकारों को भी पुलिस की गाड़ियों में भरकर पंजाब से बाहर कर दिया गया सरकार को मालूम था जो कदम उठाने वाली है उसके लिए आम राय बना पाना उसके लिए नामुमकिन होगा

      स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकी भरपूर मुकाबला कर रहे थे उनके पास एक से एक अत्याधुनिक हथियार थे सेना को निर्देश दिया सेना को आदेश दिया था कि स्वर्ण मंदिर में दाखिल नहीं होना है

      और स्वर्ण मंदिर परिसर में किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए  पर यह साफ हो चुका था कि बिना मंदिर परिसर में प्रवेश किए आतंकवादियों को मार गिराना बहुत मुश्किल हो रहा था तभी उस समय रात कुछ जवान स्वर्ण मंदिर के दरवाजे से अंदर प्रवेश कर चुके थे पहले 2 घंटे में 17 जवान शहीद हो गए अकालतख्त की खिड़कियों के बीच में पोजीशन बनाई गई थी भली भले भारतीय सैनिकों की तादाद आतंकवादियों से ज्यादा थी पर उनके पास बराबरी के हथियार थे और सबसे बढ़कर अकाली तख्त की ढाल जिस की आड़ लेकर आतंकवादी दनादन गोलियां बरसा रहे थे

       कई जाने गवा कर जब तक भारतीय सैनिक अकाली तक तक पहुंचे तब तक सवेरा हो चुका था जनरल बरार के सामने विकल्प खत्म हो रहे थे तब एक अकल्पनीय फैसला लिया गया सुबह 7:30 बजे army tanks ने दनादन गोलियां बरसाकर अकाल तख्त की दीवार ढहा दी फिर ग्रेनेड और टैंकों की बौछार से जबान अंदर दाखिल हुए साडे 12 घंटों में ऑपरेशन ब्लू स्टार खत्म हो चुका था लेकिन मंदिर परिसर का सफेद संगमरमर लहू से लाल भी हो चुका था आतंक कुचला गया लेकिन यहां पर आस्था भी दागदार हो गई और उसी के साथ लहूलुहान सवालों की शुरुआत हो गई

      समर्थकों की नजर में भिंडरावाले की मौत नहीं हुई तब तो एक शहीद का जन्म हुआ था लेकिन सही मायनों में आतंक के लिए लड़ाई और भी लंबी चलनी थी गोल्डन टेंपल की यह लड़ाई तो खत्म हो गई पर भारत सरकार मैं बैठी इंदिरा गांधी के लिए लड़ाई अब चालू हो गई थी देश ही नहीं पूरी दुनिया में ब्लू स्टार ऑपरेशन की गूंज की रफ्तार तेज हो चुकी थी कहीं

      Operation Blue Star सिख समुदाय के सैनिकों को इतना आहत कर दिया था की सेना में भी बगावत हो गई थी इंदिरा को मालूम था कि उन्होंने सिक्कों को नाराज किया है सलाह दी गई कि  अपने इर्द-गिर्द सुरक्षाकर्मियों में सिख ना रखे
      सुरक्षा एजेंसियों ने इंदिरा गांधी की सुरक्षा बढ़ा दी और सिख समुदाय को हटा दिया पर इंदिरा को जमुना मालूम चला तो वह सुरक्षा एजेंसी से नाराज हुई और सिख समुदाय के लोगों को ही उन्होंने अपने बॉडीगार्ड रख लिए  30 अक्टूबर 1984 को इंदिरा को उनके अपने बॉडीगार्ड संबंध सिंह और महेंद्र सिंह ने गोलियों से छलनी कर दिया

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