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Home  loan detail kaise le jankari hindi आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका खुद का घर हो लेकिन कीमतें ज्‍यादा होने के चलते घर खरीदना आसान नहीं रह गया है आज समझे भारतीय स्टेट बैंक होम लोन स्कीम होम लोन के लिए आवश्यक दस्तावेज ग्रामीण होम लोन होम लोन की ब्याज दर होम लोन क्या है sbi होम लोन की जानकारी एचडीएफसी होम लोन की ब्याज दर इसलिए लोगों को होम लोन का सहारा लेना पड़ता है

लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो चाहकर भी होम लोन लेने से कतराते हैं इसकी वजह है कि उन्‍हें होम लोन चुकाने के केवल एक ही ऑप्‍शन का पता होता है

जिसके तहत उन्‍हें लोन फिक्‍स्‍ड EMI और तय इंट्रेस्‍ट चुकाना होता है और लोन लेने के साथ ही रीपेमेंट शुरू हो जाता है ऐसे में वे इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि अगर इस फिक्‍स्‍ड EMI का इंतजाम न हो सका तो लोन कैसे चुकाया जाएगा

 लेकिन इस ट्रेडिशनल तरीके के अलावा भी होम लोन चुकानेे के कुछ अन्‍य ऑप्‍शन भी हैं, जिनके जरिए आपके लिए होम लोन चुकाना आसान हो जाता है

आइए आपको बताते हैं कि क्‍या हैं वे तरीके और कैसे पहुंचाते हैं फायदा- कुछ सालों बाद ईएमआई चुकाना शुरू करना इस ऑप्‍शन में आप लोन लेने के बाद एक तय समय तक केवल इंट्रेस्‍ट अदा कर सकते हैं

 उस समय के खत्‍म होने के बाद EMI का पेमेंट शुरू होता है। केवल इंट्रेस्‍ट अदा करने की अवधि 3 साल से लेकर 5 साल हो सकती है। हालांकि यह लोन केवल सैलरीड और वर्किंग प्रोफेशनल्‍स के लिए उपलब्‍ध है। इस तरह के लोन पर नॉर्मल लोन से 20 फीसदी ज्‍यादा अमाउंट लिया जा सकता है

अकाउंट से लोन की लिंकिंग कुछ बैंक आपको होम लोन को बैंक में मौजूद करंट अकाउंट से लिंक करने की सुविधा भी देते हैं
  •  SBI मैक्‍सगेन, 
  • ICICI बैंक की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी आदि
 इस सुविधा में होम लोन की इंट्रेस्‍ट लाय‍बिलिटी अकाउंट में मौजूद सरप्‍लस फंड के आधार पर कम हो जाती है। यानी आपको कम इंट्रेस्‍ट देना होता है। इस ऑप्‍शन में आप जरूरत पड़ने पर करंट अकाउंट से विदड्रॉ और डिपॉजिट कर सकते हैं।

 अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी पर पेमेंट 

अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो इसके तहत लोन का अमाउंट किश्‍तों में आपके अकाउंट में आता है। ऐसे में आपको आखिरी किश्‍त आने यानी लोन के फुल पेमेंट आने तक केवल इंट्रेस्‍ट चुकाना होता है और फुल पेमेंट के बाद EMI शुरू होती है।

 लेकिन इससे कस्‍टमर पर बोझ पड़ता है। इसलिए अब कुछ फाइनेंशियल इंस्‍टीट्यूशन में लोन की पहली किश्‍त आने से ही EMI चुका सकने का ऑप्‍शन है। उदाहरण के लिए HDFC। इस ऑप्‍शन के तहत चुकाई गई EMI में से पहले इंट्रेस्‍ट एडजस्‍ट किया जाता है, उसके बाद बचे अमाउंट को प्रिन्सिपल रीपेमेंट में डाला जाता है।

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