आँखों में पलक झपकते ही भारीपन और खिंचाव महसूस हो रहा है. देखते-देखते Blur हो जाना या फिर दिखाई नही देना. आँखों में ऐसा महसूस कुदरती आँसू नही बनने पर होता है. कुदरती आंसू नही बन पाने से कॉर्निया डेमेज होकर दिखना भी बंद हो सकता है. चालीस से पैतालीस साल की उम्र में हार्मोनल बदलाव होने पर आंसुओ का बनना बन्द हो जाता है. इससे पलक और आँखों के बीच फ़्रेक्शन कम होने से पर्याप्त ऑक्सीजन नही मिल पाती है. यह फ़्रेक्शन नही होने से आँखों में इंफेक्शन होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जबकि ये कुदरती आंसू चौबीस घन्टे लगातार बनते हैं. ये नाक की नली के जरिए बहकर इंफेक्शन से बचाते हैं. कुदरती आंसुओ का नही बनना ड्राई आई कहलाता है...Eye Syndrome Bachav Tips
नुकसान
पलक झपकने पर कॉर्निया की पारदर्शिता रगड़ होती है. इससे पारदर्शिता खत्म होने पर रोशनी जा सकती है. इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता कम होती है. आंसू नही बनने पर मिट्टी के कण बाहर नही निकल पाते हैं. आँखों में इंफ़ेक्शन बढ़ता है.

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उपचार
आंसू बन्द और सुखी आँखे होने पर मोइश्चराइजर डाले. यानी आँखों में रिफ्रेश टियर ड्रॉप डाले. डॉक्टर के नही लिखने पर भी यह ड्रॉप आँखों में डाल सकते है. कारबोक्सी मिथाइल सेल्युलोज साल्ट नाम से यह ड्रॉप उपलब्ध है. इस ड्रॉप के साइट इंफेक्शन नही है. कम्प्यूटर पर लंबे समय तक बैठे रहने से यह प्रॉब्लम होती है. इसलिए कम्प्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाले इस दवा की दो-तीन ड्रॉप डालते रहे.

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