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सच में अपने ही सामने अपने बेटे का शव देखने का साहस किसी माँ में नहीं होता. लेकिन फिर भी एक सैनिक की माँ हिम्मत करके अपने कलेजे के टुकड़े को विदा देती हे. उसकी आँखे आंसुओं से भर जाती हे. किसी ने सच ही कहा हे की जब सेना से किसी का फोन आता हे तो कोई भी माँ वो फोन नहीं उठा पाती होगी, क्योकि क्या पता किस माँ को उसके बेटे के आखिरी सलाम का संदेश मिल जाये.
आज उन सैनिकों की बदोलत ही हम चैन की नींद सो पा रहे हे. वो 20-20 किलो का वजन लादे, भारी-भरकम हथियार लादे हुए अपने देश, अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए रात-दिन तैनात रहते हे. आज भी जब सुनते हे की अमुख जगह पर हमला हुआ, वंहा हमारे इतने सैनिक मारे गए तो दिल पसीज जाता हे, आँखों से आंसू आ जाते हे. सच में बहुत ही भयानक पल होता हे वो.

लेकिन उस शहीद सैनिक की माँ बड़े गर्व से कहती हे एक देश के लिए गया हे दुसरे को भी सेना में भेजूंगी. सच में इतना साहस तो हिन्दुस्तान की माँ में ही हो सकता हे. “एक बच्चा अपनी माँ से पूछता हे माँ क्यों तिरंगे में लिपटे पापा आये हे, बता ना माँ क्यूँ तू आंसू बहायें हे.” 

इन शहीदों को कंधे देने वाले यह मासूम हाथ तो अभी समझ ही नहीं पाते की आखिर पापा को क्या हुआ हे. हजारो की भीड़ देखकर वो मासूम अपनी माँ से पूछते हे माँ यह सब क्यों आये हे तब माँ कहती हे की बेटा तेरे पापा देश की रक्षा के लिए शहीद हुए हे और तब उस बच्चे की आँखों में गर्व के आंसू होते हे. आईये उन सब शहीदों को श्रदांजली दे और उनकी शहादत को याद करें.

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