कहनी सच्चे मित्र की Story Of True Friend in Hindi


sache mitra ki pehchan in hindi एक आदमी के तीन मित्र थे. वह पहले मित्र को बहुत चाहता और मानता था. दुसरे को थोडा कम चाहता था. लेकिन तीसरे मित्र की तरफ ध्यान ही नहीं देता था. एक बार उसका बुरा समय आया और उसने अपना सब कुछ खो दिया. यह बात जब राजा को पता लगी तो उसने सिपाहियों द्वारा आदमी को राजमहल पहुँचने का आदेश दिया. वह डर गया की राजा का बुलावा क्यों आया हे?

तब आदमी ने तीनो दोस्तों को सारी बात बताई और मदद मांगी. पहले मित्र से कहा की “क्या तुम मेरे साथ राजमहल चलोगे”. तो पहले मित्र ने साफ़ मना कर दिया. उसे बहुत दुःख हुआ की उसका सबसे चहेता मित्र उसकी मदद नहीं कर रहा.
आदमी ने दुसरे मित्र से पूछा की “क्या तुम मेरे साथ राजमहल चलोगे”. तब दुसरे मित्र ने कहा में राजमहल के दरवाजे तक तुम्हारे साथ जा सकता हु उसके बाद अंदर तुम्हे अकेले ही जाना होगा. फिर आदमी निराश होकर अपने तीसरे दोस्त की तरफ मुड़ा और उससे भी यही बात कही. वह अब तक सारी बाते चुपचाप सुन रहा था उसने कहा “में चलूँगा तुम्हारे साथ और जरूरत पड़ने पर तुम्हारी मदद भी करूँगा”. यह सुनकर आदमी को हैरानी हुयी की जिस मित्र को उसने कुछ नहीं समझा आज वही उसकी मदद कर रहा हे और जिन्हें अपना माना वे छोड़कर चले गए.

अब आपको बता दे की यह तीन मित्र कोन थे.

पहला मित्र जिसे वह सबसे ज्यादा चाहता था वह थी उसकी दोलत, जो मुसीबत के समय आपकी कोई मदद ना कर सकी.

दूसरा मित्र जिसे वो थोडा कम चाहता था वह थे उसके घर-परिवार वाले, जो केवल थोड़े समय के लिए ही उसका साथ दे सकते थे.
तीसरा मित्र जिसकी तरफ उसने कभी ध्यान ही नहीं दिया वह था उसका सत्कर्म, जो हमेशा उसके साथ रहा और वक्त आने पर मदद भी की.

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