इस्लामिक बैंक क्या है भारत में क्यों रोक देखे Islamic banking in India list Loan hindi - Top.HowFN.com

इस्लामिक बैंक क्या है भारत में क्यों रोक देखे Islamic banking in India list Loan hindi

MEANING OF Islamic banking इस्लामिक बैंकिंग में बैंक फंड्स के ट्रस्ट्री की भूमिका निभाता है। बैंक में लोग पैसे जमा करते हैं और जब चाहें वहां से निकाल सकते हैं। यहां सेविंग्स बैंक अकाउंट पर ब्याज कमाने की अनुमति नहीं है, लेकिन जब आपके अकाउंट में पड़े पैसे के इस्तेमाल से फायदा होता है तो आपको उपहारों के रूप में बैंक कुछ ना कुछ देता है।

लोन कैसे देता है -
इस्लाम में सूद पर पैसे देने की मनाही है क्योंकि वहां सूदखोरी को हराम माना गया है। इस्लामिक बैंक अच्छे व्यवहार के आधार पर LOAN देता है और कर्ज लेने वाले को सिर्फ मूलधन यानी जितनी रकम ली है उतनी ही लौटानी पड़ती है। यानी, लोन पर ब्याज नहीं लिया जाता इस्लामिक कानून में कर्ज देने वाले और कर्ज लेकर उसका इस्तेमाल करने वाले, दोनों पर समान रिस्क होता है। यानी, पैसे डूबने पर सारी जिम्मेवारी सिर्फ कर्ज लेने वाले की नहीं होती है।

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आरबीआई नई दिल्ली एक बड़े कदम के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने देश में इस्लामिक बैंक लाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में केंद्रीय बैंक ने कहा कि सभी नागरिकों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं की 'विस्तृत और समान अवसर' की सुलभता के मद्देनजर यह फैसला लिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी परिवारों को व्यापक वित्तीय समावेशन के दायरे में लाने के लिए 28 अगस्त 2014 को एक राष्ट्रीय मिशन जन धन योजना की लॉन्चिंग की थी।

आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन के नेतृत्व में वित्तीय क्षेत्र में सुधारों को लेकर एक समिति का गठन किया गया था। इसी कमिटी ने देश में ब्याज मुक्त बैंकिग प्रणाली के मुद्दे पर गंभीरता से सोचने की जरूरत पर जोर दिया था। कमिटी ने कहा, 'कुछ धर्म ब्याज लेने-देनेवाले वित्तीय साधनों के इस्तेमाल को नाजायज ठहराते हैं। ब्याज मुक्त बैंकिंग प्रॉडक्ट्स नहीं होने की वजह से कुछ भारतीय धर्म के कारण बैंकिंग प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इनमें समाज की आर्थिक रूप से पिछड़ी आबादी भी शामिल है।'

बाद में केंद्र सरकार के निर्देश पर आरबीआई में एक इंटर-डिपार्टमेंटल ग्रुप (आईडीजी) गठित कर दिया गया। इस ग्रुप ने देश में ब्याज मुक्त बैंकिंग प्रणाली शुरू करने के कानूनी, तकनीकी और नियामकीय पहलुओं की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। आरबीआई ने पिछले साल फरवरी महीने में आईडीजी रिपोर्ट की एक कॉपी वित्त मंत्रालय को भेज दी और धीरे-धीरे शरिया के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम शुरू करने के लिहाज से तत्काल परंपरागत बैंकों में ही एक इस्लामिक विंडो खोलने का सुझाव दिया।

मंत्रालय को लिखी एक चिट्ठी में आईडीजी ने कहा, 'सरकार की ओर से जरूरी अधिसूचना जारी करने के बाद शुरुआत में परंपरागत बैंकों के इस्लामिक विंडो के जरिए परंपरागत बैंकिंग प्रॉडक्ट्स के तरह ही कुछ सामान्य प्रॉडक्ट्स लाने पर विचार किया जा सकता है।' पत्र में आगे कहा गया, 'हमें यह भी लगता है कि फाइनैंशल इनक्लूजन के लिए ब्याज मुक्त बैंकिंग में प्रॉडक्ट्स को शरिया नियमों के तहत प्रमाणित करने की सही प्रक्रिया अपनाने की जरूरत होगी। इसमें जमा धन और कर्ज, दोनों समाहित होंगे और इन्हें दूसरे फंड्स के साथ मिलाया नहीं जा सकता। ऐसे में ब्याज मुक्त बैंकिग के लिए एक अलग विंडो की जरूरत होगी।'

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