आईटी विभाग की ब्याज से होने वाली कमाई पर नजर है। ऐसे लोग उनके रडार पर हैं जो बताते कम हैं छुपाते ज्यादा हैं एफडी, सेविंग अकाउंट, पीपीएफ, किसान विकास पत्र जैसे तमाम सेविंग इंस्ट्रूमेंट है जिनमें लोग निवेश करते है लेकिन उनसे होने वाली कमाई का हिसाब किताब नहीं रखतें।   आपको यही बताएंगे कि कहां ब्याज से होने वाली कमाई पर टैक्स लगेगा और कहां आमदनी टैक्स फ्री होगी। इसके अलावा हम आपकी निवेश से जुड़ी उलझने भी सुलझाएंगे। इस खास शो में हमारे साथ जुड़ रहे हैं ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के पंकज मठपाल।

इन्कम टैक्स अथॉरिटीज की नजर अब उन हजारों-लाखों लोगों पर जा पड़ी है जिन्होंने एफडी पर इंट्रेस्ट से मोटी कमाई की है, लेकिन टैक्स नहीं भरा। इनका पूरा ध्यान उन लोगों पर है जिन्हें 5 लाख रुपये या इससे ज्यादा की आमदनी फिक्स्ड डिपॉजिट या एफडी पर मिले ब्याज से हुई है। इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपनी कर योग्य आय में ब्याज से मिली रकम को शामिल नहीं करने और रिटर्न फाइल नहीं करते। आईटी अधिकारी बैंक से जानकारी जुटा रहे हैं। एफडी पर 10 फीसदी टीडीएस कटवाने वाले लोगों पर नजर आईटी की नजर है इसके साथ ही सीनियर सिटिजंस पर भी सरकार की नजर है। सरकार का मकसद टैक्स बेस बढ़ाना है।

आपको बता दें कि सेविंग अकाउंट से 10,000 रुपये तक सालाना ब्याज टैक्स फ्री है। ब्याज से होने वाली 10,000 रुपये से ज्यादा कमाई पर टीडीएस कटता है। बैंक 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस काटते हैं। फॉर्म 26 एएस में ब्याज से होने वाली पूरी कमाई का ब्यौरा रहता है जिससे आईटी विभाग के लिए टैक्स चोरी पकड़ना आसान है।

लोग अलग-अलग बैंकों में छोटी रकम जमा करा कर टीडीएस बचाने की कोशिश करते हैं। एचआरए छूट और फर्जी रेंट स्लिप पर भी आईटी की नजर है क्योंकि इनके जरिए भी टैक्स चोरी होती है।

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