Emergency Aapatkal in hindi भारत का राष्ट्रपति आपात काल की घोषणा कर सकता है जब आंतरिक अशांति को खतरा हो वित्तीय संकट या बाहरी आक्रमण में आपातकाल की घोषणा की जाती है देश ने 1962 में चीन के साथ एवं 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान आपातकाल का दौर देखा था, पर यह "बाहरी आक्रमण" के कारण लगाया गया था। 25 जून 1975 की मध्यरात्रि से 21 मार्च 1977 के बीच जो आपातकाल का दौर देश ने देखा, वह "आंतरिक अशांति" के करण अनुच्छेद 352 के अंतर्गत लगाया गया था। भारत में अब तक 3 बार आपातकाल की घोषणा हो चुकी है

देश में पहली बार आपात काल की घोषणा हुई
- 26 अक्टूबर 1962
दूसरी बार आपात की घोषणा 
- 3 दिसंबर,1971
तीसरी बार आपातकाल की घोषणा 
- 25 जून,1975

full story of 1975 emergency India in hindi

25 जून, 1975 की मध्यरात्रि को मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। यद्यपि हकीकत यह है कि आपातकाल की घोषणा रेडियो पर पहले कर दी गई तथा बाद में सुबह मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए। यद्यपि संवैधानिक प्रावधान यह है कि मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उसकी अनुशंसा पर जब राष्ट्रपति हस्ताक्षर कर देते हैं तब आपातकाल की घोषणा की जा सकती है।

आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए

अभिव्यक्ति का अधिकार ही नहीं, लोगों के पास जीवन का अधिकार भी नहीं रह गया। 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया। जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नाडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया। जेलों में जगह नहीं बची। आपातकाल के बाद प्रशासन और पुलिस के द्वारा भारी उत्पीड़न की कहानियां सामने आई। प्रेस पर भी सेसरशिप लगा दी गई। हर अखबार में सेंसर अधिकारी बैठा दिया, उसकी अनुमति के बाद ही कोई समाचार छप सकता था। सरकार विरोधी समाचार छापने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। यह सब तब थमा जब 23 जनवरी 1977 को मार्च महीने में चुनाव की घोषणा हो गई।

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