Mother teresa essay in hindi साल 1997 में 5 सितंबर को नोबेल पारितोषिक विजेता मदर टेरेसा का कोलकाता में देहवासन हो गया था। वह उस समय 87 साल की थी। 26 अगस्त 1910 को मैसेडेनिया गणराज्य के एक रोमन कैथोलिक परिवार में मदर टेरेसा का जन्म हुआ था। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था तथा 1919 में भारत आ गई थी तब वह सिस्टर थी और दार्जिलिंग में रहती थी।

इसके बाद वह कोलकाता गई और वहां ही रह गई। 194३ में बंगाल में पड़े अकाल से हजारों लोगों की मृत्यु हो गई। उस समय मिशनरी के निर्देशों की परवाह किए बिना मदर टेरेसा ने लोगों की मदद की जिसके कारण वह बीमार पड़ गई। मदर टेरेसा ने भारत में गरीब असहाय लोग रक्तपित्त के रोगी और बालकों की सेवा करने में अपना सारा जीवन बिता दिया। रोमन कैथोलिक के मुख्य गुरु पोप ने उनकी बहुत प्रशंसा की। 1980 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

बहुत से हिंदू संगठन ने उनकी कड़ी आलोचना की। हिंदू संगठनों का आरोप था कि वह लोगों को बहला-फुसलाकर उनका सेवा के नाम पर धर्मांतरण करवाती थी। बहुत से और लोग भी जो कट्टरपंथी थे वह मदर टेरेसा को नापसंद करते थे। 

मदर टेरेसा ने मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापना करी थी। स्थापना के 5 दायकों के अंदर इनके संगठन में 130 देश काम कर रहे थे और लाखों बीमार लोगों को मदद कर रहे थे। फिलहाल भारत में कई ऐसे लोग हैं जो यह आरोप लगाते हैं कि मदर टेरेसा ईसाइयों की एजेंट थी। वह भारत में सेवा के नाम पर दूसरे धर्मों के लोगों का धर्मांतरण करवाती थी।

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