स्मोकिंग से केवल लंग्स कैंसर ही नहीं होता, बल्कि इसका आँखों पर भी बुरा असर पड़ता हे. स्मोकिंग करते वक्त तम्बाकू में पाया जाने वाला निकोटीन रेटिना और ऑप्टिक नर्वस के सेल्स को प्रभावित करता हे. लंबे समय तक स्मोकिंग से आँखों की नसे सूज जाती हे. जिससे चलते ऐज रिलेटेड मैक्युलियर डीजनरेशन और एम्बलायोपिया हो जाती हे. यह प्रॉब्लम होने पर विजन धीरे-धीरे कम होता हे.
सेण्टर विजन हो जाता हे कम
स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति को वो ही चीज नजर आती हे जो वह देखना चाहता हे. यानी उसका सेंटर विजन खत्म हो जाता हे. हालाँकि विजन पूरी तरह से खत्म नहीं होता हे. स्मोकिंग के साथ अल्कोहल लेने पर यह प्रॉब्लम जल्दी आती हे. यह ड्राई और वेट दो तरह की होती हे. ड्राई में विटामिन्स, न्युत्ट्रीशियंस, कॉपर, जिंक के सपप्लिमेंट देते हे. वेट eye होने पर इंजेक्शन लगाना ही ट्रीटमेंट हे. 

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अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निकोटीन में मौजूद ओक्सीडेंटस आँखों को नुकसान पहुंचाते हे. इन कैमिकल्स से कन्जेकटीवा के ग्लोबलेट सेल्स डैमेज हो सकते हे, यह सेल्स आँखों की सतह पर नमी बनाये रखते हे. इसी तरह धुएं में मौजूद कार्बन पार्टिकल्स के पलों पर जमा होने से आँखों की नमी और गीलापन खत्म हो सकता हे. अगर यह लंबे समय तक बना रहे तो आँखों में खुजली और धुंधलापन आ सकता हे. स्मोकिंग के जरिये टोबेको के सम्पर्क में आने वाले लोगों में दूसरों के मुकाबले मोतियाबिंद होने का खतरा अधिक होता हे.

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