आपको यह जानकार हैरानी होगी की आपकी भावनाएं आपके शरीर को भारी मात्रा में नुक्सान पहुंचा सकती हे. यदि सही समय पर इनका सही इलाज नहीं किया जाये तो यह भावनाएं हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगो की कार्यप्रणाली में बाधा डाल सकती हे. इसलिए यदि आप बेहतर शरीर चाहते हे तो अपनी भावनाओं का भी अच्छी तरह से ख्याल रखना होगा. इस 5 तरह की भावनाओं को सही तरह से इस्तेमाल करना जरुरी हे.
गुस्सा :- आपके लीवर को नुकसान पहुंचाता हे.
दुःख :- आपके फेफड़ों को कमजोर करता हे.
चिंता :- आपके पेट को ख़राब कर देती हे.
तनाव :- आपके दिमाग और दिल दोनों को नुकसान पहुंचाता हे.
डर :- आपकी कीडनी के लिए घातक हो सकता हे.


इसलिए जीवन को इन भावनाओं की ओवरडोज से ना लादे. हर मिनट जब भी आप गुस्सा हे आप अपनी शांति के पलों के सांठ सेकंड खो देते हे और हर बीतता हुआ पल अनमोल हे. इसलिए यदि आप बेहतर जीवन जीने की चाह रखते हे तो, जितना हो सके गुस्सा कम करें. हम सभी के जीवन में सुख और दुःख के भाव आते जाते रहते हे ऐसे में इसे लेकर ज्यादा परेशान ना हो. मनुष्य के जीवन में दो तरह के दुःख होते हे पहला की उसके जीवन की अभिलाषा पूरी नहीं हुई और दूसरा यह की उसके जीवन की अभिलाषा पूरी हो गई. इस बात को ध्यान में रखे और जब भी मन में दुःख का भाव आये तो यह सोचते हुए उसे दूर करे की यह जीवन का हिस्सा हे. 

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कहते हे चिंता चिता के समान हे. चिंता करने से रूप, बल और ज्ञान का नाश होता हे. नश्वर संसार में सब कुछ खत्म हो जायेगा. हमेसा हर प्रकार की चिंता को छोड़कर तनाव मुक्त रहें. बिना मतलब के डर को अपने जीवन में स्थान ना देते हुए बीतते पल को सजग होकर प्रसन्नता से जीयें. भय को नजदीक मत आने दो, अगर वो पास में आये तो उस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत उसका सामना करो.

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