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चीन की धमकी - पहाड़ को हिलाना आसान है, चीनी सेना को नहीं china news india today newspapers

Chinese newspapers news सिक्किम सीमा पर डोकलाम विवाद को लेकर चीन ने कहा कि अपने इलाके की सुरक्षा के चीन के इरादे को कोई हिला नहीं सकता। एक पहाड़ हिलाना आसान है, चीन की सेना को नहीं।

 चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि भारत किसी मुगालते में न रहे। चीनी सेना ने अपनी क्षमता और ताकत लगातार बढ़ाई है। हालात सामान्य बनाने के लिए भारत डोकलाम क्षेत्र से सेना हटा ले। वहीं, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले सप्ताह संसद में कहा था कि डोकलाम से दोनों देशों की सेना हटाने से सीमा पर स्थिति सामान्य करने में मदद मिलेगी। भारत का कहना है कि यह हिस्सा भूटान की सीमा में है। इसके पास सड़क बनना सुरक्षा के लिहाज से बेहद घातक साबित हो सकता है।

भारत और चीन के बीच डोकलाम सीमा को लेकर एक महीने से भी ज्यादा समय से तनाव बना हुआ है। भारत मामले का समाधान कूटनीतिक स्तर पर चाहता है, लेकिन चीन ने बातचीत के लिए भारत पर सेना वापस बुलाने की शर्त रख दी है। भारत ने साफ कह दिया है कि जब तक चीन डोकलाम से बाहर नहीं निकलता, तब तक हम भी अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे।

चीन सीमा तक दूरी घटाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) अरुणाचल प्रदेश में दो सुरंगें बनाएगा। यह सुरंगें 4170 मीटर ऊंचे सेला दर्रा से गुजरेंगी, जिससे तवांग से होकर चीन की सीमा तक की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। बीआरओ ने कहा कि इन सुरंगों से तेजपुर में सेना के 4 कॉर्प के मुख्यालय और तवांग के बीच यात्रा के समय में कम से कम एक घंटे की कमी आएगी।

इनसे एनएच 13 और खासतौर से बोमडिला व तवांग के बीच 171 किलोमीटर लंबे रास्ते में हर मौसम में आवाजाही हो सकेगी। भारी हिमपात के समय जब सड़क संपर्क टूटेगा, तब यह सुरंगें काम आएंगी। बीआरओ के अफसरों ने वेस्ट कमेंग के उपायुक्त से सेला सुरंग के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण करने का आग्रह किया है। जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वेक्षण मानसून के बाद शुरू किया जाएगा।

ये है प्लान सुरंगों का निर्माण पूर्वी हिमालय में राज्य के दुर्गम स्थलों से गुजरते हुए तिब्बत के अग्रिम इलाकों तक जल्द पहुंचने की भारत की कवायद का हिस्सा है। सेला-छबरेला रिज के जरिए 475 और 1790 मीटर लंबी दो सुरंगों को नूरांग की ओर मौजूदा बालीपरा-चौदुर-तवांग रोड से जोड़ने की योजना है। अरुणाचल में कलाक्तांग और असम में ओरांग के जरिए भूटान सीमा पर एक छोटी सड़क है, लेकिन उसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाता। सेना की आवाजाही की सुविधा के अलावा सेला सुरंग से तवांग में पर्यटन की संभावनाएं उभरेंगी।

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