यह कान में महसूस होने वाली एक ध्वनी हे जो बिना किसी बाहरी स्त्रोत के खुद ही आती हे तथा सिटी या घंटी बजने जैसी महसूस होती हे. यह महज एक रोग ना होकर कान से सम्बधित बीमारियों का लक्षण हे. 
कारण और लक्षण
वृद्दावस्था में उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता में कमी आना प्रेसवाईक्युसिस कहलाता हे. तेज शोर के लगातार सम्पर्क में रहने से कान के आंतरिक भाग में स्थित संवेदी तंतुओं की संवेदी कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता हे. 85% डेसिबल से कम तीव्रता की आवाज प्रतिदिन 8 घंटे ही सुरक्षित होती हे. इससे ज्यादा तीव्रता के सम्पर्क में रहने से समस्या हो सकती हे. इसी वजह से सुनने में कमी, वेक्स फूलना, आवाज के प्रति सहनशीलता कम होना जैसी बीमारियाँ हो जाती हे. 

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बचाव के उपाय
1. जब अत्यधिक तेज आवाज यानी 75 डेसिबल या उससे ज्यादा आवाज हो जैसे तेज आवाज में बजते बैंड बाजे, तेज म्यूजिक, पटाखे की आवाज उस दौरान कान बंद करने वाला प्लग पहनना चाहिए.

2. किसी शादी-समारोह के दौरान बैकग्राउंड नॉइस के सम्पर्क में बने रहे. इसके प्रभाव से टीनीटस की आवाज दब जाएगी जैसे रात्रि में कम ध्वनी का संगीत सुनने या पंखे की आवाज जैसी बैकग्राउंड नोइस में टिनीटस कम महसूस होता हे.

3. बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन ना करें. यह कान को कमजोर कर सकती हे.

4. तनाव और चिंता को कम कीजिये और हमेशा इसके बारे में ही ना सोचें.

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