जब अचानक दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन होना बंद हो जाये या नली फट जाए तब पैरालिसिस होता हे और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आसपास की जगह पर खून जमा हो जाता हे. लेकिन 60 वर्ष की उम्र में इसके चांस 10-15% बढ़ जाते हे. इसका असर चेहरे, सिर और शरीर के दोनों भागों की तरफ, कमर से नीचे दोनों पैर लकवाग्रस्त हो सकते हे, लेकिन तुरंत इलाज के द्वारा इस बीमारी से बच सकते हे.


कारण
ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, डाइबिटीज और स्मोकिंग इस बीमारी के होने के महत्वपूर्ण कारक हे. इसके अलावा अल्कोहल, बढ़ता कोलेस्ट्रोल, नशीली दवाइयों का सेवन, आनुवांशिक या जन्मजात कारणों की वजह से भी लकवा हो सकता हे.

लक्षण
बोलने में तकलीफ, शरीर में सुन्नापन आना, आँखों के सामने अँधेरा आना, बाएं पैर या बाएं हाथ से काम नहीं कर पाना, याददाश्त कमजोर होना आदि इसके लक्षण हे. 

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लेने योग्य आहार
अखरोट, हर सब्जियां और कम वासा युक्त दूध आदि का सेवन करें. ज्यादा और बार-बार खाने से बचें. वसायुक्त आहार का सेवन ना करें. कमजोर या लकवाग्रस्त शारीरिक हिस्सों को ठीक करने के लिए हल्का व्यायाम जरुरी हे. नियमित रूप से वाक करने और हल्की गर्दन और हाथ-पैरों की कसरत करें. खान-पान का विशेष ध्यान रखें.

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