एक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता हे, उसके सपने बड़े होते हे, उसकी उम्मीदें बड़ी होती हे. आज पूरा देश भले ही नोटबंदी को लेकर चर्चाओं में उबल रहा हे, लेकिन कोटा में आज भी कोर्स, इक्वेशंस और रिजल्ट की ही चर्चा हे. आधे से ज्यादा युवाओं के सपने कुछ और होते हे, लेकिन माँ-बाप की जिद्द के आगे उन्हें झुकना पड़ता हे और कोटा में आते हे डॉक्टर, इंजीनियर बनने, लेकिन खुद से हार जाते हे तो मौत को गले लगा देते हे. आज की इस पोस्ट में एक लेखक के तौर पर नहीं बल्कि एक स्टूडेंट होने के नाते उन बच्चों के दर्द को बंया कर रहा हु. जंहा उन्होंने जिंदगी से हार मान ली 


यह उन छात्रों और छात्राओं की चिट्ठियाँ हे जो जबरन लादे गए सपनों का बोझ नहीं सह पाए और कर ली आत्महत्या.
1. पापा में डिज़ाइनर बनना चाहती थी, में अलग दुनिया बनाने के लिए आप को छोड़ कर जा रही हु.

2. यह अकेलापन मुझे खाए जा रहा हे, दुनिया में मेरा कोई नहीं हे, जब कोई नहीं तो इस दुनिया में रहकर क्या फायदा.

3. मम्मी दुनिया चाँद पर पहुँच रही हे और में अकेले कमरे में कैदियों की तरह रह रहा हु, में भी जा रहा हु भगवान के पास.

4. दिमाग और दिल के बीच लड़ाई हो गई दीदी, मैंने दिल की सुन ली, यह बात पापा को मत बताना.

5. उस टेस्ट में इतने कम नंबर क्यों आये?? मेरिट में आना हे की नहीं?? कभी तो पूछो की में कैसा हु.

6. पापा में इस टेंशन के डॉक्टर नहीं बन सकता, मेरे बाद सारा सामान छोटे भाई को दे देना.

7. मम्मी-पापा में हमेशा आपके साथ रहूँगा, छोटे भाई को दूर मत भेजना.

8. इस जन्म में आपने मेरे सपने ले लिए, अगले जन्म में ऐसा मत करना.

9. मुझे खुद से ही नफरत हो गयी हे.

10. पापा सॉरी. में आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकता.

आज उन माँ-बाप के जेहन में एक ही चीज गूंज रही होगी की काश मेने बेटे की सुन ली होती. आखिर था तो मेरा ही अंश, कैसे मेने अपने सपने उस पर लाद दिए, क्यों मेने पड़ोसियों की बाते सुनी, क्यों मेने उसे नहीं समझा. 

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अगर आप एक बेटे हे तो मम्मी-पापा को अपने सपनो के बारे में समझाएं और अगर आप एक माँ-बाप हे तो यह पढ़कर आप समझ ही गए होंगे की अपने बेटे को अपने सपने जीने दो. जब वो खुद अपने सपने जियेगा तब वो आपका नाम इस जग में रोशन करेगा.

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