20-35 साल की उम्र में  
व्यक्त्ति सबसे ज्यादा काम करता है. बाइक चलाना, स्पोर्ट्स एक्टिविटी, कम्प्यूटर या लैपटॉप पर घन्टो काम करना सर्वाइकल को बढ़ावा देते हैं.

55 साल की उम्र के बाद
इस उम्र में व्यक्त्ति की हडिडयां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. जिसका असर डिस्क पर भी पड़ता है. जिससे व्यक्त्ति को ज्यादा तकलीफ होती है.

ये हैं शुरुआती लक्षण
1.गर्दन के मूवमेंट के दौरान अकड़न महसूस होना.
2. गर्दन में होने वाला दर्द धीरे-धीरे कंधे की तरफ जाने लगे. उंगलियों में सूनापन मससुस होना.
3.हाथ में चींटी रेंगने जैसा कंपत्र, वजन उठाते समय गर्दन में दर्द महसूस होना.

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ऐसे कम करे खतरे को
1. गर्दन को लंबे समय तक एक ही पोजिशन में नही रखना चाहिए,
2. न ही बहुत ज्यादा एक्सरसाइज या वर्कआउट करने चाहिए और न बिल्कुल कम. संतुलित लेकिन नियमित व्यायाम करना फायदेमंद है.
3.भारी भोजन करने से शरीर को कैल्शियम और प्रोटीन सही मात्रा में नही मिल पाते हैं, जिसका असर हडिड्यों पर भी होता है. जो स्पॉडिलोसिस की समस्या को बढ़ाता है. कैल्शियम, प्रोटीन युक्त्त आहार लेना चाहिए.
4. रोजाना की दिनचर्या में जितना हो सके गर्दन को झटकों से बचाने का प्रयास करना चाहिए.

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