केचुआ जाने कब कब खाना पड सकता हे केंचुए Eating - Top.HowFN.com

केचुआ जाने कब कब खाना पड सकता हे केंचुए Eating


What do worms eat and drink - कभी कभी समय ऐसी परिस्थति में ला कर खड़ा कर देता हे की ना चाहकर भी हमें वह सब करना पड़ता हे जो जीवन के लिए जरुरी हे ऐसा ही

भूख मिटाने के लिए केंचुए खाए

हिमाचल प्रदेश शिमला के कुल्लू जिले में गायब हुअ आठ पर्वातारोहियों की लोकेशन का पता चलने पर छह छात्रों को सुरक्षित निकाल भी लिया गया छात्रों ने इस दौरान केंचुए खाकर अपनी भूख मिटाई। यही नहीं प्यास बुझाने के लिए बर्फ खाई मनाली पहुंचे दो छात्रों ने आपबीती सुनाई
केंचुए पृथ्वी के अंदर लगभग 1 या 1 फुट की गहराई तक रहते हैं यह अधिकतर पृथ्वी पर पाई जानेवाली सड़ी पत्ती बीज, छोटे कीड़ों के डिंभ (लार्वे), अंडे इत्यादि खाते हैं। ये सब पदार्थ मिट्टी में मिले रहते हैं। इन्हें ग्रहण करने के लिये केंचुए को पूरी मिट्टी निगल जानी पड़ती है। ये पृथ्वी के भीतर बिल बनाकर रहने वाले जंतु हैं। इनके बिल कभी कभी छह या सात फुट की गहराई तक चले जाते हैं। वर्षा ऋ तु में, जब बिल पानी से भर जाते हैं, केंचुए बाहर निकल आते हैं
इनका बिल बनाने का तरीका रोचक है

ये किसी स्थान में मिट्टी खाना प्रारंम्भ करते हैं और सिर को अंदर घुसेड़ते हुए मिट्टी खाते जाते हैं। मिट्टी के अंदर जो पोषक वस्तुएँ होती हैं उन्हें इनकी आँतें ग्रहण कर लेती हैं। शेष मिट्टी मलद्वारा से बाहर निकलती जाती हैं। केंचुए के मल, जो अधिकतर मिट्टी का बना होता है, मोटी सेंवई की आकृति का होता है। इसको वर्म कास्टिंग (worm casting) कहते हैं। प्राय: बरसात के पश्चात पेड़ों के नीचे, चरागाहों और खेतों में, वर्म कास्टिंग के ढेर अधिक संख्या में दिखाई पड़ते हैं

केंचुए रात में कार्य करनवाले प्राणी है

भोजन और प्रजनन के लिये वे रात में ही बाहर निकलते हैं; दिन में छिपे रहते हैं। साधारणत: शरीर को बिल के बाहर निकालने के पश्चात ये अपना पिछला हिस्सा बिल के अंदर ही रखते हैं, जिसमें तनिक भी संकट आने पर यह तुरंत बिल के अंदर घुस जाएँ। फेरिटाइमा (Pheretima) जाति के केंचुए पृथ्वी के बाहर बहुत कम निकलते हैं। इनकी सारी क्रियाएँ पृथ्वी के अंदर ही होती है।

केंचुए मछलियों का प्रिय भोजन है-

 मछली पकड़नेवाले काँटे में केंचुए को लगा देते हैं, जिसको खाने के कारण वे काँटे में फँस जाती हैं। केंचुए की कुछ जातियाँ प्रकाश देनेवाली होती हैं। इनके चमड़े की बाहरी झिल्ली प्रकाश को दिन में ग्रहण कर लेती है और रात्रि में चमकती रहती है। भारत में कई जातियों के केंचुए पाए जाते हैं। इनमें से केवल दो ऐसे हैं जो आसानी से प्राप्त होते हैं। एक है फेरिटाइमा और दूसरा है यूटाइफियस। फेरिटाइमा पॉसथ्यूमा (Pheretima Posthuma) सारे भारतवर्ष में मिलता है। उपर्युक्त केंचुए का वर्णन इसी का है। फेरिटाइमा और यूटाइफियस केवल शरीररचना में ही भिन्न नहीं होते, वरन्‌ इनकी वर्म कास्टिंग भी भिन्न प्रकार की होती है। फेरिटाइमा की वर्म कास्टिंग मिट्टी की पृथक्‌ गोलियों के छोटे ढेर जैसी होती है और यूटाइफियस की कास्टिंग मिट्टी की उठी हुई रेखाओं के समान होती है

केंचुए किसानों के सच्चे मित्र और सहायक हैं। इनका मिट्टी खाने का ढंग लाभदायक है। ये पृथ्वी को एक प्रकार से जोतकर किसानों के लिये उपजाऊ बनाते हैं। वर्म कास्टिंग की ऊपरी मिट्टी सूख जाती है, फिर बारीक होकर पृथ्वी की सतह पर फैल जाती है। इस तरह जहाँ केंचुए रहते हैं वहाँ की मिट्टी पोली हो जाती है, जिससे पानी और हवा पृथ्वी की भीतर सुगमता से प्रवेश कर सकती है। इस प्रकार केंचुए हल के समान कार्य करते हैं। डारविन ने बताया है कि एक एकड़ में 10,000 से ऊपर केंचुए रहते हैं। ये केंचुए एक वर्ष में 14 से 18 टन, या 400 से 500 मन मिट्टी पृथ्वी के नीचे से लाकर सतह पर एकत्रित कर देते हैं। इससे पृथ्वी की सतह 1/5 इंच ऊंची हो जाती है। यह मिट्टी केंचुओं के पाचन अंग से होकर आती है, इसलिये इसमें नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ भी मिल जाते हैं और यह खाद का कार्य करती हैं। इस प्रकार वे मनुष्य के लिये पृथ्वी को उपजाऊ बनाते रहते हैं। यदि इनको पूर्ण रूप से पृथ्वी से हटा दिया जाए तो हमारे लिये समस्या उत्पन्न हो जायगी what do worms drink do worms eat grass what do earthworms eat in captivity what do worms eat in the wild what do worms eat in a worm farm what do worms eat for kids what do nightcrawlers eat

1 Response to

  1. We are urgently in need of kidney donors for the sum of $450,000 USD,
    for more details:
    Dr. Micheal Varghese
    Email: drmichealvarghes @gmail.com
    call number: +919500703584
    WhatsApp: +919500703584

    ReplyDelete

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel