महाराणा प्रताप की कहानी मृत्यु कैसे हुई Maharana Prtaap - Top.HowFN

महाराणा प्रताप की कहानी मृत्यु कैसे हुई Maharana Prtaap


Maharana pratap history in hindi - वीर जवानों की बदोलत हमारा देश सोने की चिड़िया हुआ करता था. आज ऐसे ही एक वीर योद्धा महाराणा प्रताप के बारे में कुछ अनसुनी बातें जानते हे.  :मेवाड़ी शान बचवाण ने वो लड्यो गणों, वो भिडयो गणों यह संदेश वीर जवानों की गाथा से हमेशा से मशहूर रहा हे. महाराणा प्रताप का जन्म 7 जून 1540 उदयपुर के संस्थापक उदयसिंह और महारानी जयवंता बाई के घर हुआ.
1. यह ऐसे वीर योद्धा थे जो कभी भी मुगलों के आगे नहीं झुके.

2. महाराणा प्रताप का भाला 81 कीलो का था और छाती का कवच 72 कीलो का था और यह आज भी मेवाड़ राजघराने के म्यूजियम में सुरक्षित हे.

3. महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर अपने दिन गुजारे थे. हल्दी घाटी युद्ध के समय मायरा की गुफा में महाराणा प्रताप ने अपने हथियार छुपाये थे.

4. महाराणा प्रताप के बारे में कहा जाता हे की वे इतने बहादुर थे की एक वार से दुश्मन के दो टुकड़े कर देते थे.

5. वे अपनी माँ जयवंता की सलाह पर अपने पास दो तलवार रखते थे, ताकि निहत्थे दुश्मन को भी बराबर का मोका मिले.

6. महाराणा प्रताप के पास तेज दोड़ने वाला घोडा चेतक था. उसके बारे में कहा जाता हे की वो इतना तेज दोड़ता था की उसके पैर जमीन पे दीखते भी नहीं थे. जब महाराणा प्रताप घायल हुए तो चेतक 26 फीट लम्बे नाले को लांघ गया था.

7. महाराणा प्रताप के 14 पत्नियां, 17 बेटे और 5 बेटियाँ थी.
8. हल्दीघाटी का युद्ध इतना बिनाशकारी था की अकबर सपने में भी सोचकर डर जाता था.

9. अकबर 30 वर्षों तक कोशिशों के बाद भी महाराणा प्रताप को बंधक नहीं बना सका था. वह उसकी बहादुरी का कायल था. कहते हे जब महाराणा प्रताप का निधन हुआ तो अकबर भी रो पड़ा था.

10. हल्दी घाटी का युद्ध इतना खतरनाक था की वंहा 300 सालों बाद भी तलवारें पाई गयी. अकबर के पास 85000 सैनिक थे और महाराणा प्रताप के पास 20000 सैनिक थे. फिर भी महाराणा प्रताप डरे नहीं और उनका मुकाबला किया.history in hindi full video maharana pratap history in hindi video prithviraj chauhan history in hindi maharana pratap height maharana pratap history in hindi language story of maharana pratap in hindi pdf maharana pratap history in hindi language wikipedia
11. महाराणा प्रताप को भारत का प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी भी कहा जाता हे, क्योकि उन्होंने कभी अकबर के सामने समर्पण नहीं किया.

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