अक्सर हम सोचते हे की हम क्यों किसी का भला करे, हमें इस से क्या फायदा. लेकिन आज में आपको जो कहानी बता रहा हु उस से आप जान जायेंगे की किसी पर दिखाई गयी दया या किया गया उपकार बेकार नहीं जाता. कहते हे ना की जैसा दोगे वैसा पाओगे.
एक लड़का अपने स्कूल की फीस जुटाने के लिए घर-घर जाकर सामान बेचा करता था. एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे भूख सताने लगी. उसने एक घर जाकर दरवाजा बजाया. घर के अंदर से एक लड़की आई और उसने दरवाजा खोला. उसे देखकर लड़के ने पानी माँगा. लड़की उसकी हालत देखकर भांप गयी और वो पानी की जगह दूध का गिलास ले आई. दूध पीकर लड़के ने पूछा, ‘कितने पैसे’ ? तब लड़की ने कहा की किसी की मदद करने के बदले पैसे नहीं लेते हम. तब लड़के ने उसे धन्यवाद दिया और वंहा से चला गया. कुछ वर्षों बाद वो लड़की बीमार पड़ी और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वंहा डॉक्टर ली होवार्ड को मरीज की जांच के लिए बुलाया गया. जैसे ही डॉक्टर ने लड़की को देखा वो उसे पहचान गया. उसने सोच लिया की वो किसी भी हालत में लड़की को बचाकर ही रहेगा और उसके प्रयासों से लड़की बच गयी. डॉक्टर ने अस्पताल से उसका बिल लेकर उस पर एक नोट लिखा. ‘एक गिलास दूध द्वारा इस बिल का भुगतान किया जा चूका हे’. जब लड़की ने यह नोट पड़ा तो उसके मुहं से निकला ‘हे भगवान आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! आपका प्यार इंसानों के मन में अभी तक जीवित हे.

इसलिए कहते हे ना की किसी पे किया गया उपकार कभी बेकार नहीं जाता वो किसी ना किसी रूप में वापिस हमें मिल ही जाता हे. इसलिए जब हम किसी का बुरा करते हे तो लोग कहते हे की उपरवाला देख रहा हे. जैसा करोगे वैसा भरोगे. अब यह आप पे हे की आप किस और जाना चाहते हे.

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