कहते हे चिता हमारे शव को जलाती हे लेकिन चिंता तो जीते जागते इंसान को जला देती हे ! इंसान अपनी जिंदगी में बचपन से लेके बुडापे तक किसी ना किसी चिंता, घुटन, अवसाद या तनाव में रहता हे! दुनिया में कही ऐसे लोग हे जो कैंसर से पीड़ित हे तो कही लोग ह्रदय रोग से पीड़ित हे ! कही करोड़ ऐसे लोग हे जो एड्स से पीड़ित हे ! लेकिन सामान्य लोग भी अपने अंदर की विशेष रोग पाले हुए हे और वो हे चिंता ! बचपन, जवानी, युवावस्था, बुडापे तक हमारी चिंता हमारे साथ चलती रहती हे और जब हम दुनिया छोड़ के जाते हे तब कही जाके इस से मुक्ति मिलती हे ! 


चिंता सब कुछ छीन लेती हे यंहा तक की हमारा चैन भी

student स्कूल जाता हे तो study की चिंता, परीक्षा के बाद result की चिंता ! आगे बड़ने पर नोकरी की चिंता, फिर कैरीअर की चिंता, फिर व्यक्तित्व निर्माण की चिंता, फिर विवाह की चिंता, फिर कभी कभी घर खर्च की चिंता फिर अपने लड़के-लड़की की शादी की चिंता ! इस तरह ना जाने कितनी चिंताए इंसान को घेरती रहती हे ! दिन में जितने घंटे होते हे चिंताएं उस से ज्यादा ही होती हे ! बुडा हो गया तो सार-सम्हाल की चिंता, तबियत बिगड़ गयी तो सही होने की चिंता और ना हुयी तो मरने की चिंता ! मरने के बाद स्वर्ग में जाऊंगा या नरक में इसकी चिंता ! इस तरह जिंदगी भर चिंता हमारे साथ चलती रहती हे ! चिंता ने हमसे हमारा चैन तक छीन लिया हे ! हम एक इंसान कम चिंता से चिता का पुतला बन के रह जाते हे !

चिंता से चिता भली

कहते हे घुट-घुट के मरने की बजे एकदम मरना अच्छा हे ! किसी चीज की टेंसन तो नहीं रहती ! इसलिए भगवान चिता की सेज पर सुला दे लेकिन चिंता की सेज पे ना सुलाए ! चिंता हमें तड़पा-तड़पा के मारती हे ! हमारे शरीर का सारा खून चूस लेती हे ! चिंताग्रस्त इंसान हमेशा दुखी रहता हे एक जिंदा लाश बन के रह जाता हे ! उसका ना तो खुद पे भरोसा होता हे और न ही दूसरों पे ! वो दुसरो को भी शक की नजर से देखता हे ! इसलिए जिंदगी को एक लड़ाई की बजाये खेल मान के चले !

चिंता से कैसे बचे

कोई भी घटना हुयी हो उसे लगतार मानसिक रूप से ना जोड़े ! उसके लिए चिंतन करे की यह समस्या कहाँ से पैदा हुयी, केसे इसका हल निकाला जा सकता हे ! चिंता नहीं चिन्तन करे ! किसी एक चीज के बारे में लगातार ना सोचे ! अपने मन में देखे की किस किस तरह की चिंताए आपको घेरे बेठी हे ! उन्हें एक कागज़ पे लिखे और उनका समाधान खोजे ! दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं जिसका हल नहीं ! चिंता का सबसे मूल कारण हे नेगेटिव विचार ! अगर इस तरह के विचार को अपने मन से निकाल ले तो आधी से ज्यादा चिंता तो अपने आप खत्म हो जाए ! लोगो से जलना छोड़े और हमेशा खुश रहे ! छोटी-छोटी बातो को दिल पे ना ले क्योकि यह छोटी बाते ही बाद में जाके बड़ी बन जाती हे ! हमेशा यह मान के चले की जो हो रहा हे अच्छा हो रहा हे और जो होगा अच्छा होगा ! सोते समय यह सोचे की हर सांस के साथ आप अच्छा महसूस कर रहे हे ! दुनिया में कोई भी चीज स्थायी नहीं हे ! परिवर्तन प्रकृति का नियम हे ! हमेशा भगवान को शुक्रिया कहे की जो किया अच्छा किया और एक अच्छी जिंदगी देने के लिए में तेरा अहसानमंद हु ! अपने अतीत को भूल जाए और आगे बड़े ! क्योकि कुछ चीजे आपके हाथ में नहीं होती इसलिए उन्हें उपर वाले पे छोड़ दे और हमेशा खुश रहे !

किसी ने सही ही कहा हे की :-

गुजरी हुयी जिंदगी को याद ना कर,

तकदीर में लिखा हे उसकी फ़रियाद ना कर,

जो होना हे वो तो होकर रहेगा,

तू कल की फ़िक्र में अपनी आज की हंसी बर्बाद ना कर !



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