कमलनाथ ने वन्दे मातरम इस मतलब से किया बेन - Top.HowFN

कमलनाथ ने वन्दे मातरम इस मतलब से किया बेन

 भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख अमित शाह ने मध्य प्रदेश में सचिवालय में वंदे मातरम गीत गायन रोकने रोक को लेकर कांग्रेस सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रया दी है

 kamalnath on vande mataram ban in madhya pradesh

उन्होंने देशभक्ति के गीत गायन रोक को "शर्मनाक" और "देशद्रोह" के रूप में कहा हे  मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने वंदे मातरम गायन को लेकर यू टर्न लिया है। सरकार ने हर महीने की पहली तारीख को मंत्रालय के सामने होने वाले वंदेमातरम् कार्यक्रम को रोक दिया था। सरकार ने गुरुवार को वंदे मातरम पर लगाई रोक को हटा दिया है।

 सरकार ने निर्णय लिया है कि अब अरेरा हिल्स पर बने शौर्य स्मारक से महात्मा गांधी प्रतिमा तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। जिसमें सभी अधिकारी और कर्मचारियों के साथ आम नागरिक भी शामिल होंगे। इस दौरान महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने पुलिस बैंड की धुन पर वन्दे मातरम गायन होगा।

 बता दें कि कमलनाथ सरकार द्वारा वंदे मातरम गायन पर रोक के फैसले का बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था। खुद पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इस फैसले पर असहमति जताई थी। सीएम शिवराज ने ट्वीट उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस यह भूल गई है कि सरकारें आती हैं जाती हैं,

 लेकिन देश और देशभक्ति से ऊपर कुछ नहीं है। मैं मांग करता हूं कि वंदे मातरम का गाना हमेशा की तरह हर कैबिनेट की मीटिंग से पहले और हर महीने की पहली तारीख को हमेशा की तरफ वल्लभ भवन के प्रांगण में हो। कमलनाथ के इस निर्णय बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी घेरना शुरू कर दिया मध्यप्रदेश सरकार के इस दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय पर राहुल गांधी को देश की जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.' ऐसे बीजेपी ने कहा है

vande mataram meaning in hindi वन्दे मातरम हिंदी अर्थ सहित 

सुजलां सुफलां मलयजशीतलां
शस्यश्यामलां मातरम्!

हे माँ मैं तेरी वन्दना करता हूँ
तेरे अच्छे पानी, अच्छे फलों,
सुगन्धित, शुष्क, उत्तरी समीर (हवा)
हरे-भरे खेतों वाली मेरी माँ।

शुभ-ज्योत्सना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रमुदल शोभिनीम्
सुहासिनी सुमधुर भाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्!

सुन्दर चाँदनी से प्रकाशित रात वाली,
खिले हुए फूलों और घने वृ़क्षों वाली,
सुमधुर भाषा वाली,
सुख देने वाली वरदायिनी मेरी माँ।

सन्तकोटिकंठ-कलकल-निनादकराले
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृतखरकरबाले
अबला केनो माँ एतो बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदल वारिणीं मातरम्!

तीस करोड़ कण्ठों की जोशीली
आवाज़ें,
साठ करोड़ भुजाओं में तलवारों को
धारण किये हुए
क्या इतनी शक्ति के बाद भी,
हे माँ तू निर्बल है,
तू ही हमारी भुजाओं की शक्ति है,
मैं तेरी पद-वन्दना करता हूँ मेरी माँ।

तुमि विद्या तुमि धर्म
तुमि हरि तुमि कर्म
त्वम् हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति
हृदये तुमि मा भक्ति
तोमारइ प्रतिमा गड़ि मंदिरें-मंदिरे।

तू ही मेरा ज्ञान, तू ही मेरा धर्म है,
तू ही मेरा अन्तर्मन, तू ही मेरा लक्ष्य,
तू ही मेरे शरीर का प्राण,
तू ही भुजाओं की शक्ति है,
मन के भीतर तेरा ही सत्य है,
तेरी ही मन मोहिनी मूर्ति
एक-एक मन्दिर में,

त्वं हि दूर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमल-दल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी नवामि त्वां
नवामि कमलाम् अमलां अतुलाम्
सुजलां सुफलां मातरम्!
वन्दे मातरम्!

तू ही दुर्गा दश सशस्त्र भुजाओं वाली,
तू ही कमला है, कमल के फूलों की बहार,
तू ही ज्ञान गंगा है, परिपूर्ण करने वाली,
मैं तेरा दास हूँ, दासों का भी दास,
दासों के दास का भी दास,
अच्छे पानी अच्छे फलों वाली मेरी माँ,
मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम
धमरणीं भरणीम् मातरम्।

लहलहाते खेतों वाली, पवित्र, मोहिनी,
सुशोभित, शक्तिशालिनी, अजर-अमर
मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

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