• स्मार्टफोन से निकलने किरणें दिमागी तकलीफों के लिए बेहद जिम्मेदार 
  • इंफेक्शन स्मार्टफोन के स्क्रीन पर कीटाणु होते हैं जो त्वचा संबंधी कई तरह की समस्याओं को उत्पन्न करने में सक्षम है. और ये कीटाणु आपको बीमार भी कर सकते हैं.
  • स्मार्टफोन का इस्तेमाल अनजाना भय और घबराहट भी महसूस होता है. जो कि एक गंभीर समस्या है.
  • Mobile phone disadvantages भ्रम पैदा होना
क्या मोबाइल की लत बाकी नशों की तरह बीमारी है? अमेरिका के मशहूर मनोचिकित्सक पैट्रिक फेहलिंग मोबाइल की तुलना खतरनाक ड्रग्स हेरोइन से करते हैं. उनका कहना है जब स्मार्टफोन यूजर्स को इतना कुछ ऑफर कर रहे हैं तो कैसे ना कोई इसका लती हो? अब सबसे बड़ी चुनौती है कि कैसे पहचानें कि आप या आपके आस-पास के लोग मोबाइल के लती हैं या इसके लती हो रहे हैं.

डॉ फेहलिंग कहते हैं, अगर आप अपना ज्यादातर वक्त स्मार्टफोन पर बिताते हैं. किसी से बातचीत के दौरान भी आपका मन स्मार्टफोन में ही रमा रहता है. हर वक्त अपना स्मार्टफोन चेक करते रहते हैं. फोन पर परिवार वालों से झगड़ते हैं, और बीवी-बच्चों से ज्यादा आपका ध्यान अपने स्मार्टफोन पर रहता है तो समझ लीजिए आपको मोबाइल की लत लग गई है.

हम मोबाइल पर खपाते हैं इतना वक्त
डॉ फेहलिंग के मुताबिक, हम दिन में 100 से ज्यादा बार अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं. पांच घंटे वेब ब्राउजिंग और ऐप पर खर्च करते हैं. ये समय साल-दर-सा बढ़ता जा रहा है. पिछले साल तक व्यक्ति औसतन 85 बार दिन में स्मार्टफोन यूज करता था. एनालिटिकल फर्म फ्लरी का भी कहना है कि स्मार्टफोन को लेकर हमारा जुनून बढ़ता जा रहा है. हम इसके लती हुए जा रहे हैं.

हमारे 300 मिनट खा जाता है मोबाइल 
फ्लरी ने 2013 से 2016 के बीच स्मार्टफोन यूज करने की प्रवृत्ति को लेकर स्टडी की. इसमें बताया कि हम रोज 300 मिनट मोबाइल पर बिताते हैं. अपना 8 फीसदी वक्त ब्राउजिंग में खपाते हैं. मोबाइल पर सबसे ज्यादा फेसबुक, व्हॉट्सऐप और इंस्टाग्राम चलाते हैं. फ्लरी की रिसर्च बताती है यूजर्स स्मार्टफोन पर 15 फीसदी वक्त म्यूजिक, मीडिया और एंटरटेंमेंट कंटेंट में बिताते है. जबकि 11 फीसदी वक्त गेम खलने,  4 फीसदी वक्त यूट्यूब और 2 फीसदी वक्त स्नैपचेट चलाने में बिताते हैं.
यूजर्स मोबाइल पर सबसे ज्यादा फेसबुक, ट्विटर और इंस्टग्राम करते हैं यूज

हमारा ब्लड प्रेशर तो नहीं बढ़ा रहा मोबाइल
metro.co.uk के मुताबिक,  पश्चिमी देशों के 11 फीसदी लोग टेक्नोलॉजी के एडिक्ट हैं. ब्रिटेन की स्वानसी यूनिवर्सिटी का कहना है कि स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ने का खतरा है. हालांकि, इस बात को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि स्मार्टफोन यूजर्स के लिए  इंफोर्मेशन, सर्विस, एजुकेशन  और कम्युनिकेशन का सशक्त माध्यम है. मेट्रोकॉडॉटयूके के मुताबिक, आप कुछ काम में जुटे हैं, स्मार्टफोन में आपका मेलबॉक्स खुला है और तभी कोई मेल आता है तो आपके दिमाग को वापस उस काम में मन लगाने में 64 सेकेंड लगते हैं, चाहे आपने मेल चेक किया हो या नहीं.

गूगल के पूर्व कर्मचारी त्रिस्टान हैरिस ने अपनी वेबसाइट Time Well Spent में उन चार स्टेप्स के बारे में बताया है, जिनके जरिए हम स्मार्टफोन की लत को कम कर सकते हैं.

क्या करें
- सारे नोटिफिकेशन टर्न ऑफ कर दें
- मोबाइल स्क्रीन से सारे ऐप्स हटा दें
- अपने स्मार्टफोन को बैडरूम में चार्ज ना लगाएं
- मोबाइल पर अलार्म ना लगाएं

ऐसे पता करें कितना वक्त बिताते हैं मोबाइल पर..
अब सवाल उठता है कि आप कैसे पता करेंगे कि मोबाइल आपका कितना वक्त खा रहा है. इसके लिए आप Moment ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे कुछ साल पहले iOS वर्जन के लिए लॉन्च किया गया था.  इसे आप ऐप स्टोर से भी डाउनलोड कर सकते हैं. लंबे वक्त से साइकोथैरपिस्ट और स्कॉलर हाथ में पकड़ने वाले उपकरणों के साथ मानव के संबंधों में स्टडी कर रहे हैं. उनका मानना है कि  तकनीकी के तेजी से विकास के साथ ही मानवीय प्रवृत्तियों और व्यवहार में बदलाव आया है.  इस पर “Growing Down: Theology and Human Nature in the Virtual Age'' किताब भी आई है. इसे जैको जे हैमने ने लिखा है.  इसमें उन वजहों के बारे में विस्तार से बताया गया है, जो स्मार्टफोन से हमें चौबीस घंटे जोड़े रखते हैं. किताब बताती है कि डिजिटल युग में रह रहा मानव क्यों स्मार्टफोन से इतना प्यार करने लगा है? क्यों उसका लती होता जा रहा है.

हमारी जिंदगी में बढ़ रहा है मोबाइल का दखल
न्यूरोसर्जन डॉक्टर मनीष कुमार कहते हैं, मोबाइल हमारी जरूरत तो है लेकिन अब इसका दखल हमारी जिंदगी में बढ़ता जा रहा है. युवा पीढ़ी मोबाइल की लती होते जा रही है. इस लत को पहचानना बेहद आसान है. अगर आप चंद सेकेंड में ही मोबाइल के बिना खुद को अधूरा महसूस करने लगते हैं, तो समझो आप मोबाइल एडिक्ट है. मोबाइल की लत लगते ही हमारी जीवनशैली में बदलाव आने लगता है. ये बदलाव- देर रात तक मोबाइल पर चिपके रहना, बेवजह बार-बार मोबाइल चेक करना. घंटों नेट पर बिताना, रियलिटी से कटकर वर्चुअल लाइफ में सुकून खोजना आदि रूपों में होता है.

भारत में चार साल में दोगुनी हुई स्मार्टफोन की लत
एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में करीब 40 फीसदी स्मार्टफोन यूजर्स रोज 9-25 फीसदी वक्त इंटरनेट पर बिताते हैं. सुबह उठने के 30 मिनट के भीतर यूजर्स अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं. काम के दौरान करीब 42 फीसदी भारतीय अपना स्मार्टफोन चलाते हैं, 38 फीसदी यूजर्स रात में स्मार्टफोन पर वक्त बिताते हैं. स्टडी में बताया गया है कि 2013 से 2017 के बीच भारत में स्मार्टफोन और इंटरनेट पर वक्त बिताने वाले यूजर्स की वक्त पहले दोगुना हुआ है.
हमें ऐसे लगती है स्मार्टफोन की लत....
पांच साल में 89 करोड़ हो जाएंगे स्मार्टफोन यूजर
अगले पांच सालों में भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या 45 करोड़ से बढ़कर 89 करोड़ हो जाएगी. जून 2017 तक ये संख्या 45 करोड़ है. रिसर्च में बताया गया है कि  67 फीसदी भारतीय मोबाइल के बिना खुद को पूरी तरह से अधूरा महसूस करते हैं. 86 फीसदी यूजर्स स्मार्टफोन के जरिए सोशल मीडिया एक्सेस करते हैं. 74 फीसदी स्मार्टफोन पर गाने सुनते हैं. 61 फीसदी वीडियो देखते हैं और 59 फीसदी गेम्स खेलते हैं. 63 फीसदी भारतीय विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्मार्टफोन के जरिए अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हैं.

कहीं आपको मोबोफोबिया तो नहीं है..
फोबिया की तरह ही मोबोफोबिया भी एक मानसिक बीमारी है. फोबिया में जहां लोगों को अलग-अलग चीज़ों से डर लगता है वहीं मोबोफोबिया में मोबाइल दूर होने पर व्यक्ति को घबराहट महसूस होने लगती है. वो आशंकाओं से घिर जाता है और परेशान हो उठता है.

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