Diwali 2017 ke upay benefits of wearing shree yantra बारे में सभी लोगों ने सुना होगा। यह साक्षात महालक्ष्मी का प्रतीक होता है। प्राचीन युग से ही माना जाता है कि श्रीयंत्र में स्वयं महालक्ष्मी निवास करती है इसलिए यह जहां भी स्थापित होता है वहां अटूट लक्ष्मी का वास होता है।

जिस जगह श्रीयंत्र होता है वहां समस्त प्रकार के भौतिक सुख-सुविधाएं बरसने लगती हैं। इसलिए इस दीपावली आप भी श्रीयंत्र की स्थापना अपने घर और प्रतिष्ठान में करें और सुख सौभाग्य की प्राप्ति करें।

  श्रीयंत्र के लाभ sri yantra benefits power how to use hindi
  • प्राण प्रतिष्ठित श्रीयंत्र की घर में स्थापना से न केवल उस घर में धन-संपदा बनी रहती है, बल्कि उस घर में निवास करने वाले लोगों के बीच प्रेम बना रहता है।
  • श्रीयंत्र की स्थापना से समस्त प्रकार के अभावों और रोगों का नाश होता है।
  • चूंकि यह त्रिपुर सुंदरी देवी का प्रतीक है इसलिए सौंदर्य प्रदाता है। इसकी नियमित पूजा करने से व्यक्ति के सौंदर्य में वृद्धि होती है और उसमें जबर्दस्त आकर्षण प्रभाव पैदा होता है।
  • व्यापारिक प्रतिष्ठान में श्रीयंत्र की स्थापना से व्यापार-व्यवसाय में लगातार तरक्की होती जाती है।
श्रीयंत्र एक विशेष प्रकार का ज्यामितिय नक्शा होता है जिसका उपयोग प्राचीन काल में विद्वान मनीषियों ने ब्रह्मांड के रहस्य जानने और धन संपदा प्राप्ति के लिए किया
नवचक्रों से बने श्रीयंत्र में चार शिव चक्र, पांच शक्ति चक्र होते हैं। इसमें 43 कोण एक विशेष संयोजन में जमे होते हैं जिनमें 28 मर्म स्थान और 24 संधियां बनती हैं। इसमें तीन रेखाओं के मिलन केा मर्म स्थान और दो रेखाओं के मिलन को संधि कहा जाता है। श्रीयंत्र के बारे में कहा जाता है कि यह न केवल देवी की असीमित शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह साक्षात महालक्ष्मी का ज्यामितिय रूप है।

कैसे करें स्थापित

श्रीयंत्र की अधिष्ठात्री देवी स्वयं श्रीविद्या यानी त्रिपुर सुंदरी देवी हैं। यह अत्यंत शक्तिशाली ललितादेवी का पूजा चक्र है और इसे त्रैलोक्य मोहन यंत्र भी कहा जाता है। श्रीयंत्र को अपने घर या प्रतिष्ठान में स्थापित करने के लिए इसे प्रातःकाल गंगाजल, कच्चे दूध और पंचगव्यों से धोकर शुद्ध कर लें। इसे लाल रेशमी वस्त्र पर रखें। इसके बाद इस पर चंदन से सात बिंदियां लगाएं। ये सात बिंदी देवी के सप्तरूप का प्रतीक हैं। इस पर लाल गुलाब के पुष्प अर्पित करें और मिश्री का भोग लगाएं।

मंत्र: ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः