मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में पहला बड़ा राज्य बनता जा रहा है। सबसे अधिक उल्लेखनीय यह है कि मध्यप्रदेश में शरबती गेहूं का उत्पादन किया जाता है। यह गेहूं विश्व प्रसिद्ध है। इस गुणवत्ता का गेहूं अन्य किसी राज्य में पैदा नहीं होता है। आटा बेचने वाली अनेक कंपनियां मध्यप्रदेश के शरबती गेहूं से बना आटा के नाम से अपना उत्पाद बेचते हैं। मध्यप्रदेश में इस बार भी गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।

मध्यप्रदेश के गेहूं से महाराष्ट्र कर्नाटक गुजरात राज्य के निवासियों की मांग आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2014-15 के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 7.64 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 में 171.०३ लाख टन का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2015 में बढ़कर 184. १० लाख टन हुआ है। वर्ष 2016-17 में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 225 लाख टन हो सकता है।

इस बार रबी सीजन के दौरान मौसम अनुकूल रहने से कुछ क्षेत्रों को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्र में उत्पादकता बड़ी है। मध्य प्रदेश के किसानों की वजह से सरकारी गोदाम भरते जा रहे हैं। कई दशकों से पंजाब हरियाणा गेहू उत्पादन करने वाले समर्थन मूल्य पर खरीदी कर भारतीय खाद्य निगम को देने में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। दशकों से चली आ रही इस परिपाटी को मध्य प्रदेश के किसानों ने पिछले कुछ वर्षों में तोड़ दिया है। इसके अलावा मध्यप्रदेश का गेहूं बेहतर होने से निर्यात में प्राथमिकता के साथ बिकता है।

सरकारी गोदामों में गेहूं देने से मध्यप्रदेश उच्च स्तर की ओर अग्रसर है। मध्यप्रदेश इस बात का प्रमाण है कि कृषि के विकास के जरिए कैसे राज्य बीमारू से विकसित राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विकास अभियान सराहनीय है। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकी के प्रयोग और सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने से मध्य प्रदेश यह कर पाया है। मध्यप्रदेश को लगातार पांचवीं बार भारत सरकार का प्रतिष्ठित कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। वर्ष 2015-16 के लिए यह पुरस्कार गेहूं उत्पादन कि श्रेणी में मिला है। मध्यप्रदेश को ट्रॉफी प्रशस्ति पत्र और दो करोड़ रुपए नगद पुरस्कार मिलेगा। भारत सरकार ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में कृषि कर्मण पुरस्कार मिलने की सूचना देते हुए बधाई और शुभकामनाएं दी है।

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