फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा की रिलीज से पहले अक्षय कुमार ने हमसे कहा था कि मेरी फिल्म के बैकड्रॉप में कहीं सोशल मैसेज है वर्ना मेरी फिल्म विशुद्ध मनोरंजन है. लेकिन इस फिल्म को देख कर आ रहे लोग और फिल्म समीक्षक ऐसा नहीं मानते हैं. फिल्म में हमेशा की तरह अक्षय ने कमाल का अभिनय किया है और भूमि पेडनेकर ने भी अच्छी परफ़ॉर्मेंस दी है, लेकिन एक समय पर जाकर फिल्म सोशल मैसेज कैंपेन लगने लगती है.

NDTV ने इस फिल्म को पांच में सो दो सितारे देते हुए लिखा है कि फिल्म एक छोटे से मुद्दे को खींच खींच कर बड़ा कर रही है. सरकार की स्वच्छ भारत योजना का प्रचार करती इस फिल्म में ऐसे डॉयलॉग्स हैं जो आपके पेट के साथ-साथ सिर में भी दर्द कर सकते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस फिल्म को पांच में से चार सितारे देते हुए लिखा है कि फिल्म एक बेहद जरुरी मुद्दे पर रौशनी डालती है और एक अहम फिल्म है. फिल्म के अंदर टॉयलेट जैसी बेसिक चीज के लिए लड़ती हमारी आधी आबादी की बड़ी समस्या को दिखाया गया है और ऐसी फिल्में बेहद जरुरी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की शुभ्रा गुप्ता अक्षय कुमार के इस फिल्म को करने के डिसीजन की सराहना करती हैं और कहती हैं कि एक ए लिस्ट स्टार ने एक सोशल मैसेज देने वाली फिल्म के लिए हां कह कर अच्छा किया लेकिन ये फिल्म एक लिमिट के बाद जाकर एक सोशल कैंपेन बन जाती है और किसी सरकारी एड जैसी लगने लगती है.  इंडियन एक्सप्रेस की ओर से फिल्म को मिले हैं 5 में से 2 स्टार.

फ़र्स्टपोस्ट ने फिल्म को 5 में से 1.5 स्टार देते हुए लिखा है कि निर्देशक श्री नारायण सिंह की इस फिल्म को देखकर विद्या बालन के टॉयलेट दीदी वाले विज्ञापन और अमिताभ के 'दरवाजा बंद करो' कैंपेन की याद आती है. यह फिल्म कम और सरकारी प्रमोशन ज़्यादा लगती है.

इस फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा भूमि पेडनेकर और अनुपम खेर भी नजर आते हैं लेकिन जैसा कि फिल्म के प्रोमो से साफ होता है इस फिल्म में आपको टॉयलेट के लिए संघर्ष करते एक आदमी की कहानी नजर आएगी और शायद शहरी दर्शक इस समस्या से खुद को जोड़ न पाएं.

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