डॉक्टर ने अवधेश की माँ को अस्पताल से छुट्टी दे दी. उनके रोग का निदान संभव नहीं था. घर में बिस्तर पर पड़ी अपनी सास की देखभाल में अवधेश की पत्नी शोभा दो दिन में ही परेशान हो गई. उसने अपने और अपने दोनों बच्चों के कपड़े सूटकेस में पैक किये और अवधेश से कहा की “मेरी माँ की तबियत सही नहीं हे इसलिए मुझे जाना पड़ेगा.Story OF Wife’S Moral Duty
अवधेश समझ गया की शोभा बहाना बना के जा रही हे, क्योंकि कल ही उसके भाई से बात हुयी थी तो उसने कहा था की यहाँ सब मजे में हे. अवधेश ने शोभा से कहा की माँ को तुम्हारी देखभाल की जरूरत हे. टॉयलेट ले जाना, नहाना-धोना, कौन कराएगा. शोभा ने कहा अपनी कामवाली राधा को कह देना. उसे थोड़े ज्यादा पैसे दे देंगे. इतना कहकर वो बच्चों को लेकर चली गई.

दो दिन बाद शोभा ने अवधेश को फोन कर हाल-चाल पूछा. अवधेश ने कहा राधा को फुर्सत नहीं थी इसलिए वो अपने रिश्तेदार को साथ ले आई. वह बहुत अच्छी हे. दिन-रात माँ का ख्याल रखती हे और खाना भी अच्छा बना लेती हे. शोभा ने ऐसी किसी कामवाली के बारे में सोचा ही नहीं था. वह परेशान होकर पूछने लगी “वह रात को अपने घर क्यों नहीं चली जाती”. वह कितनी बड़ी हे और दिखने में कैसी हे.

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“उसे तो रात में भी यंही रहना होगा और वह अपना काम ईमानदारी से कर रही हे”. उसकी उम्र और रंग-रूप से मुझे कुछ लेना-देना नहीं हे. अवधेश ने कहा.
पति के जवाब से शोभा आश्वस्त नहीं थी. मर्दों का क्या भरोसा. उसी शाम शोभा ने अवधेश को फोन किया और कहा की “मेरी मम्मी अब ठीक-ठाक हे और में सुबह वापिस आ रही हु”. शोभा ने अपने कर्तव्य से मुहं मोड़ा तो अवधेश ने उसे अपने तरीके से समझा दिया.

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