जरूरत नहीं हे फिर भी उंगलियाँ मोबाइल स्क्रीन पर चल रही हे. थोड़ी देर अगर notification ना आये तो बैचेनी सी होने लगती हे. यह नशा ही तो डिजिटल डिटाक्स हे. आज हम सबको मोबाइल का नशा ही तो हो रखा हे. ऑफिस में 7-8 घंटे कंप्यूटर पर काम करने के बाद घर आने पर मोबाइल से चिपके रहते हे.
पता ही नहीं चला की कब हम रियल दुनिया से वर्चुअल दुनिया में आ गए. अगर टाइम रहते नहीं सम्भले तो शारीरिक नुकसान के साथ मानसिक रूप से भी कमजोर हो जायेंगे. रिश्ते-नाते कहाँ गए पता ही नहीं गए, बस अगर कोई दुनिया रही हे तो वो हे मोबाइल.

क्यों जरुरी हे डिजिटल डिटाक्स?
1. तकनीक का सबसे ज्यादा असर हेल्थ पर पड़ता हे. इससे आँखों में शुष्कता के साथ-साथ कई दूसरी शारीरिक दिक्कते भी बढती हे.

2. आभासी दुनिया में ज्यादा टाइम देने से रिश्तों पर बुरा असर पड़ता हे.

3. ऑनलाइन व्यवहार करने के चक्कर में सामाजिक तौर-तरीकों क अहमियत खोती जा रही हे.

4. यह सब पढ़ने लिखने की आदत को खम कर रहा हे. 

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इसलिए जितना हो सके मोबाइल से दूर रहे. कुछ टाइम अपने फ्रेंड्स, फॅमिली के साथ बिताएं. दिन में टाइम फिक्स कर ले बस उसी टाइम मोबाइल चेक करे. रात को 9 बजे से सुबह 8 बजे तक मोबाइल से दूर रहें. अपने टारगेट पर फॉक्स करें और एक खुशहाल जिंदगी जीयें.

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