कभी तो साम ढले अपने घर गये होते...
किसी की आँख रह कर संवार गये होते
गाज़ल ने बहते हुए फूल चुन लिए वरना
गमो में डूब कर हम मार गये होते

आवारा हवा का
आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए

दौलत ना कोई ताज महल छ्चोड़ जाएँगे
दौलत ना कोई ताज महल छ्चोड़ जाएँगे
हम अपनी यादगार गाज़ल छ्चोड़ जाएँगे
तू उडा ले मेरी  हसी आज
रोता हुआ मगर तुम्हे कल छ्चोड़ जाएँगे
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए

ज़ररो में रह गुज़र के चमक छ्चोड़ जवँगा
ज़ररो में रह गुज़र के चमक छ्चोड़ जवँगा
पहचान अपनी डोर तलाक़ छ्चोड़ जवँगा
खामोशिो की मौत गंवारा नही मुझे
शीशा हूँ टूट कर बी खनक छ्चोड़ जौंगा
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए

आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
तुम आज तो पत्थर
तुम आज तो पत्थर बरसा लो
कल रोगे मुझ पागल के लिए
तुम आज तो पत्थर
तुम आज तो पत्थर बरसा लो कल
रोगे मुझ पागल के लिए
तुम आज तो पत्थर
तुम आज तो पत्थर बरसा लो कल
रोगे मुझ पागल के लिए

दिल और जिगर तो कुछ कुछ तो नही
दिल और जिगर तो कुछ कुछ तो नही
एक बार इशारा तो कर्दे
एक बार इशारा तो कर्दे
एक बार इशारा तो कर्दे

आज वो भी इश्क़ के मारे नज़र आने लगे
आज वो भी इश्क़ के मारे नज़र आने लगे
उनकी भी नींद उड़ गयी तारे नज़र आने लगे
आँख वीरान दिल परेशान ज़ुलफ मरहम लब खामोश
आँख वीरान दिल परेशान ज़ुलफ मरहम लब खामोश
अब तो कुछ और भी प्यारे नज़र आने लगे
एक बार इशारा तो कर्दे
एक बार इशारा तो कर्दे

ये आईने जो तुम्हे कम पसंद करते है
ये आईने जो तुम्हे कम पसंद करते है
वो जानते है तुम्हे हम पसन करते है
एक बार इशारा तो कर्दे
एक बार इशारा तो कर्दे
दिल और जिगर तो कुछ कुछ तो नही
एक बार इशारा तो कर्दे
एक बार इशारा तो कर्दे

मैं खुद को जला भी सकता हूँ
मैं खुद को जला भी सकता हूँ
तेरी आँखो के काज़ल के लिए
मैं खुद को जला भी सकता हूँ
तेरी आँखो के काज़ल के लिए
मैं खुद को जला भी सकता हूँ
तेरी आँखो के काज़ल के लिए

हम लोग है ऐसे दीवाने
हम लोग है ऐसे दीवाने
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो

इश्क़ में जो भी मुफ़्टीला होगा
इश्क़ में जो भी मुफ़्टीला होगा
उसका अंदाज़ ही जुड़ा होगा
और भाव क्यूँ गिर गया है सोने का
भाव क्यूँ गिर गया है सोने का
उसने पीतल पहें लिया होगा
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो

शहेर की एक अमीर जड़ी को
शहेर की एक अमीर जड़ी को
कल इन आँखों से मैने देखा था
ठीक उस वक़्त मेरी हसके मेरा मिज़ाज पुचछा था
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
हम लोग है ऐसे दीवाने
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो
जो ज़िद पे कभी आ जाए तो

सेहरा से उठा कर लाएँगे
सेहरा से उठा कर लाएँगे
तेरी पायल की झंकार के लिए
सेहरा से उठा कर लाएँगे
तेरी पायल की झंकार के लिए
सेहरा से उठा कर लाएँगे
तेरी पायल की झंकार के लिए

ये खेल तमाशा लगता है
ये खेल तमाशा लगता है
तक़दीर के घुलशन का शायद
तक़दीर के घुलशन का शायद

फूल के साथ साथ घुलशन में
सोचता हूँ बाबुल भी होंगे
फूल के साथ साथ घुलशन में
सोचता हूँ बाबुल भी होंगे
क्या हुआ उसने बेवफ़ाई की
उसके अपने आसूल भी होंगे
तक़दीर के घुलशन का शायद
तक़दीर के घुलशन का शायद

यूँ बड़ी देर से पैमाना लेकर बैठा हूँ
यूँ बड़ी देर से पैमाना लेकर बैठा हूँ
कोई देखे तो ये समझे पीए बैठा हूँ
ज़िंदगी भर के लिए रूठ कर जाने वेल
मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिए बैठा हूँ
ये खेल तमाशा लगता है
तक़दीर के घुलशन का शायद
तक़दीर के घुलशन का शायद

काँटे है मेरे दामन के लिए
काँटे है मेरे दामन के लिए
और फूल मेरे आँचल के लिए
काँटे है मेरे दामन के लिए
और फूल मेरे आँचल के लिए
काँटे है मेरे दामन के लिए
और फूल मेरे आँचल के लिए

आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
आवारा हवा का झोंका हूँ
आ निकला हूँ पल दो पल के लिए
तुम आज तो पत्थर बरसा लो
कल रोगे मुझ पागल के लिए
तुम आज तो पत्थर बरसा लो
कल रोगे मुझ पागल के लिए
कल रोगे मुझ पागल के लिए
कल रोगे मुझ पागल के लिए
कल रोगे मुझ पागल के लिए..

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