एक कम्पनी में नोकरी के लिए इंटरव्यू हो रहे थे. चूँकि पद जिम्मेदारी भरा था तो लोगो की निर्णय क्षमता की जांच की जा रही थी. कही टास्क देने के बाद सभी से एक सवाल पूछा गया की यदि आप अपने माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त और पत्नी के साथ नाव में घूम रहे हे और अचानक तूफ़ान आ जाये और नाव पलट जाए तो आप सबसे पहले किसे बचायेंगे और हा याद रखे की सिर्फ और सिर्फ आपको ही तैरना आता हे. कोई खुद को ज्यादा अच्छा बेटा साबित करने के लिए माता-पिता कहने लगा तो कोई अच्छा भाई साबित करने के लिए बहन कहने लगा. इसी तरह किसी ने पत्नी तो किसी ने दोस्त कहा. उनमे से एक व्यक्ति ऐसा था जिसने किसी का नाम नहीं लिया था. जब उनसे पूछा गया की ऐसे समय में आप क्या करेंगे. तो उसका जवाब था- ऐसे संकट के समय में अगर में किसी एक व्यक्ति विशेष को खोजने निकलूंगा तो समय बर्बाद हो जायेगा. इसलिए में उसे ही सबसे पहले बचाऊंगा जो मेरे सबसे पास में होगा. उसके इस जवाब से इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य खुश हो गए. उसे नियुक्त करते हुए उन्होंने कहा की हमें ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो हालातों के हिसाब से सही निर्णय लेने में सक्षम हो.
यह बात पूरी तरह से सही हे की हम हालत में कैसे निर्णय लेते हे और परिस्थिति में खुद को कैसे ढालते हे. यह कहानी भी हमें यही सीख देती हे की मुश्किल हालातों में घबराने की बजाय समझदारी भरे निर्णय ले. कभी-कभी ऐसी कंडीसन भी आ जाती हे की हालत इतने मुश्किल हो जाते हे की रिश्ते, नोकरी, दोस्ती सभी के बीच में तालमेल बिठाना भी मुश्किल लगता हे, ऐसे हालत में समझदारी से निर्णय लेने वाला ही सफल होता हे.

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