क्या आपको यह डर रहता है कि कही आपकी फेसबुक या ट्विटर की प्रोफाइल का दुरूपयोग ना हो जाये? देखा जाए तो आपका डर गलत नहीं है क्यूंकि दिन प्रतिदिन यह संकट और गहरा होता जा रहा हैI आज की इस पोस्ट में हम चर्चा करेंगे की ऑनलाइन उत्पीड़न क्या हे और इस से कैसे बचे !
ऑनलाइन उत्पीड़न क्या है?

कानूनी रूप से बात करें तो अगर कोई ऑनलाइन आपको परेशान कर रहा है, पीछा कर रहा है, डरा रहा है या किसी किस्म का दबाव डाल रहा है तो उसे ऑनलाइन उत्पीड़न कहते हैंI टेक्नोलॉजी हमारे फायदे के लिए हे लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल करते हे ! लोगो को तंग करते हे ! इसका ज्यादातर शिकार लडकियां होती हे ! उनकी फेक id बनके और उनके फोटो का गलत इस्तेमाल करके उन्हें ब्लैक मेल किया जाता हे ! यह सब ऑनलाइन उत्पीड़न हे !

ऑनलाइन उत्पीड़न के आरोपी को कितनी सजा हो सकती है?

पहले इसके लिए कोई एक्ट नहीं था लेकिन अब इसके लिए भी अलग से कानून हे ! ईनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत ऐसा करने वाले को 3 साल या उस से ज्यादा की सज़ा और जुर्माना भी हो सकता हे !

क्या ऑनलाइन उत्पीड़न से बचा जा सकता है?

कभी भी सार्वजनिक कंप्यूटर का इस्तेमाल ना करे ! अनजान लोगो को अपनी फोटो और मोबाइल नंबर ना दे. अपना मोबाइल या कंप्यूटर किसी को बेचने से पहले सारा डाटा डिलीट कर दे ! और अगर आपको लगता हे की आप किसी खतरे में हे तो तुरंत रिपोर्ट दर्ज़ करवाए !

ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ कैसे रिपोर्ट दर्ज करवाई जा सकती है?

अगर कोई ऑनलाइन आपको किसी भी तरह से परेशान कर रहा है तो उसके खिलाफ निकटतम साइबर सेल में जल्द से जल्द लिखित में बयान देंI साइबर सेल की गैर मौजूदगी में आप स्थानीय पुलिस थाने में भी ऍफ़. आई. आर. लिखवा सकते हैंI अगर पुलिस आपकी रपट दर्ज नहीं कर रही है तो आप पुलिस कमिशनर या न्यायिक न्यायाधीश से भी संपर्क कर सकते हैंI

भारतीय दंड संहिता के अनुसार आपका बयान गोपनीय रूप से लिया जाएगाI इसके अलावा अगर आप एक महिला हैं और साइबर स्टाकिंग के लिए पुलिस से संपर्क करती हैं तो उन्हें आपको एक कानूनी परामर्शदाता मुहैया करना पड़ेगा जो आपका केस दर्ज करने में आपकी मदद करेगाI

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