हर किसी का सपना होता हे की उसका अपना एक घर हो जंहा वो अपने परिवार के साथ सुखी से रह सके ! मगर अगर आप घर खरीदने जा रहे हैं तो इससे पहले यह खबर को जरूर पढ़ लें। कंही ऐसा न हो कि सपनो का घर खरीदने के बाद आपको किसी ऐसी बात का पता चले जिससे की आपकी ज़िन्दगी भर की कमाई के सारे पैसे डूब जाएं। कही बार हम ठगे जाते हे ! इसलिए इस पोस्ट को जरुर पड़े ताकि आपको पता चल सके की क्या क्या सावधानियां रखनी पड़ती गे खुद का घर खरीदने में !
नो अब्जेक्सन सर्टिफिकेट, या बाधा प्रमाण पत्र

:यह दस्तावेज रजिस्ट्रार दफ्तर से जारी किया जाता है। जिससे आपको यह पता चल जाएगा कि जिस घर को आप खरीदने जा रहे है उस पर कोई विवाद या नहीं या किसी तरह का लोन व् किसी तरह का कोई क़र्ज़ तो बकाया नहीं।

इस प्रमाण पत्र से आपको पता चलेगा कि इस प्रॉपर्टी पर किसी प्रकार का कोई विवाद तो नहीं है। यह आपको प्रॉपर्टी के मालिक के पास मिलेगा।

सेंक्शन.प्लान.अप्रूवल

सेंक्शन प्लान नजदीकी के नगर पालिका या महानगर पालिका में होता है। इस आपको यह पता चल जाएगा कि इस इलाके में कितनी प्रॉपर्टी पर मालिक का हक है। इसका लेखा जोखा ऐसे दफ्तरों में ही होता है।

मदर डीड

मदर डीड एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें ये सभी जानकारी मिलती है कि यह प्रॉपर्टी पहले किस-किस ने खरीदा था या इसका पहला मालिक कौन था। इसको कितनी बार बेचा गया।

प्रॉपर्टी टैक्स

अपने सपनों का घर खरीदने से पहले आपको यह भी देख लेना चाहिए कि प्रॉपर्टी बेचने वाले व्यक्ति (कंपनी) अपना प्रॉपर्टी टैक्स चुकाया है या नहीं। इसके लिए तुरंत की रशीद आपको मांग सकते हैं। एक खास बात और ध्यान में रखें तो ज्यादा अच्छा होगा कि घर खरीदने से पहले एक अच्छा वकील से संपर्क कर लें। जिससे आपका काम और भी आसान हो जाएगा।जो आपको एक बेहतर जानकारी मुहैया करवाने में आपकी मद्दद करेगा और आपका काम भी आसान हो जाएगा

लग्जरी मकानों की घटी डिमांड


नाइटफ्रेंक की हालिया रिपोर्ट की मानें तो इकोनॉमिक क्राइसिस की वजह से दुनिया भर में लग्जरी हाउसिंग की डिमांड में कमी आई है। भारत में जहां बिल्डर्स का रुझान अफोर्डेबल और लो कॉस्ट हाउसिंग की तरफ बढा है वहीं मोनाको और बारबाडोस जैसे शहरों में भी ऐसे घरों की कीमतों में कमी आई है।

नाइटफ्रेंक ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कंट्रीसाइड, स्की रिजॉटर्स में संपत्तियों के दामों में १२ फीसदी तक की कटौती हुई है। ये ऐसे इलाके हैं जहां रियल्टी सेक्टर के निवेशक दूसरी संपत्ति खरीदने के लिहाज से निवेश करते हैं। साथ ही ऐसे घरों को किराये के जरिये आमदनी या फिर वीकएंड रिजॉर्ट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिन शहरों की प्रॉपर्टीज में सबसे ज्यादा कमी आई है, उनमें पुर्तगाल के अल्गार्वे के पद्गिचमी हिस्से, स्पेन के मालोरका द्वीप और डबलिन हैं। इन क्षेत्रों में संपत्तियों के दाम करीब २२ फीसदी तक गिरे हैं।

नाइटफ्रेंक के रेजिडेंशियल रिसर्च के प्रमुख लियाम बैली का कहना है कि एंड यूज के लिए खरीदी जाने वाली संपत्तियों के दामों में बहुत ज्यादा कमी नहीं है, कमी ऐसी प्रॉपर्टीज के दामों में आई है, जिन्हें आराम और मौज-मस्ती के लिए खरीदा जाता है।

जहां तक लग्जरी प्रॉपर्टीज की बात है तो लंदन में इनकी डिमांड सबसे ज्यादा रही। जबकि अमेरिका और कनाडा में लग्जरी मकानों की कीमत में औसतन आठ फीसदी की कमी आई है।

जुलाई से पहले मकान लेना फायदेमंद

अगर आप मकान खरीदने का मन बना रहे हैं तो जुलाई से पहले बुकिंग कराना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जुलाई से निर्माण (कंस्ट्रक्शन) पर नया सर्विस टैक्स लागू होने जा रहा है. इसके बाद फ्लैट का दाम कुल खरीद का करीब तीन फीसदी बढ़ जाएगा. हाल में पेश केंद्रीय बजट में कंस्ट्रक्शन सर्विस और लेवी टैक्स की परिभाषा को निर्माणाधीन मकानों तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है. बजट पर संसद की मुहर लगने के बाद प्रभाव में आने वाला नया नियम कहता है कि अगर भुगतान निर्माण पूरा होने से पहले किया गया है, तो सर्विस टैक्स लगाया जाएगा. रियल्टी कंपनियां आम तौर पर निर्माण शुरू होने से पहले ही प्रॉपर्टी बेच देती हैं और उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि सरकार का यह कदम इस सेक्टर को गहरी चोट पहुंचाएगा क्योंकि मकान की कीमतें बढ़ेंगी और मांग में घटेगी. हालांकि कई कंपनियों ने इस पर चिंता जताई है. उनका तर्क है कि सरकार को निर्माणाधीन आवासीय इकाइयों पर सर्विस टैक्स लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए क्योंकि रियल एस्टेट उद्योग पहले ही अप्रत्यक्ष करों के रूप में 14-16 फीसदी चूका रहा हे !

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