अगर दांत मजबूत हो तो आप बुढ़ापे में भी जवान है और दाँत कमजोर तो आपका बुढ़ापा शुरू ही समझे दांतों की कैविटी व सेंसिटिविटी का कारण हमारा भोजन और ब्रश करने का तरीक़ा है। दांतों की ऊपरी कड़क त्वचा या सतह के नीचे मौजूद डेन्टाइन पर जब कोई ठंडी या गर्म चीज़ लगती है, तब हमें झनझनाहट या तकलीफ़ होती है। tips for strong teeth and gums in hindi


डेन्टाइन में तरल भरा होता है जब कुछ ठंडा या गर्म पीते हैं, तब डेन्टाइन में मौजूद तरल की गति पर असर पड़ता है, इससे ही दर्द होता है। कैविटी में दांतों के बीच बारीक़ जगह में कीड़े लग जाते हैं। ज़्यादा एसिडिक खाना खाने से भी कैविटी और दूसरी समस्याएं होती हैं। इससे बचने के लिए रोज़ाना दो बार ब्रश के साथ अच्छा एंटी बैक्टीरियल माउथवॉश उपयोग करें। लगातार एक ही प्रकार के माउथवॉश के उपयोग से भी सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। इससे बचने के लिए डेंटिस्ट से सलाह लें या न्यूट्रल फ्लोराइड सॉल्यूशन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ब्रश खरीदते वक़्त उसके ब्रिसल्स अच्छी तरह देखें। फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट सेंसिटिविटी कम करने के लिए कारगर होता है

जबसे भारत में टूथ पेस्ट और ब्रश आया दांतों की समस्या भी बहुत बढ़ गयी आज 90 % लोगों को किसी ना किसी प्रकार की दांतों की समस्या है फिर भी वे नहीं सोचते के उनकी दिनचर्या में क्या कमी है किसी भी दूकान या मॉल में देखे तो कोलगेट पेप्सोडेंट ही भरे हुए है फिर भी  दांतों में पहले केविटी होती है फिर उसे भरवाते है फिर अगली बार और अधिक भरवाते है फिर RCT फिर एक दिन वो दांत गिर जाता है फिर उसकी जगह नकली दांत आ जाता है मसूढ़ों की मूंह में बदबू की और प्लाक की समस्या आम है जिसके लिए लोग डेंटिस्ट के पास जा कर सफाई करवाते है क्या ये टूथ पेस्ट काफी नहीं है सफाई के लिए? उलटे ये हमें खतरनाक रोग देती है क्यों की इसमें होता है सोडियम लोराइल सल्फेट या फ्लोराइड 

Teeth care tips in hindi language
  1. -सुबह उठते ही पानी पिए फिर किसी अच्छे दन्त मंजन से दांतों और मसूढ़ों में मालिश करे
  2. - उंगलियों से मसूड़ों की मालिश का कोई विकल्प नहीं है. अगर मसूड़े मजबूत हैं, तो दांत स्वतः ही सुरक्षित रहेंगे. आधुनिक दंतमंजन में कृत्रिम शक्कर, महक और कैंसरज रसायनों का भरपूर उपयोग होता है जो किसी के लिए भी लाभकारी नहीं हैं (सिवाय कुछ उद्योगपतियों को छोड़कर). मसूढ़ों की सूजन, पायरिया, श्वास में दुर्गन्ध आदि कई रोग इस दन्त मंजन से ठीक हो सकते हैं.
  3. - हमेशा मध्यमा से मंजन करे तर्जनी से एक प्रकार की ऊर्जा निकलती है जो दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है .
  4. - भोजन या कोई भी पदार्थ खाने के बाद गिन कर 11 बार जोरदार कुल्ले किया करें।
  5. - अधिक गर्म या अधिक ठण्डे पदार्थों का सेवन न किया करें जैसे गर्म-गर्म चाय पीना या बहुत गर्म भोजन (चपाती व दाल शाक आदि) करना, फ्रीज का पानी या अन्य ठण्डे पेय पीना या आइसक्रीम खाना।
  6. - कोई गर्म पेय या पदार्थ पी-खाकर तुरंत ठंडी चीज ठण्डे पेय का सेवन न करें।
  7. - खाने को इतना चबाये की रस बन जाए (आजकल अधिकतर ३२ दांत तो होते नहीं ; २८ होते है ! ) 
  8. - पेय पदार्थ जैसे पानी , दूध या कोई ज्यूस को धीरे धीरे पिए .यानी के " ठोस पदार्थों को पिए और पेय पदार्थों को खाए ."
  9. - ज़्यादा मीठी चीज़ें खाने या पिने से दांतों का केल्शियम घुल जाता है .
  10. - बचपन से ही कड़ी चीज़ें चबाने को दे जैसे चने, दाने ,गन्ना ,सलाद ,फल . इससे दांतों और जबड़ों की कसरत होती है .
  11. - नस्य लेने और कपालभाती प्राणायाम करने से केल्शियम का एब्ज़ोर्प्शन अच्छा होगा .
  12. - विको वज्रदंती या त्रिफला या नमक सरसों का तेल या गौशाला में बना काला दन्त मंजन भी बहुत अच्छा होता है .
  13. - सिंहासन , शीतली शीतकारी प्राणायाम भी दांतों और जबड़ों के लिए अच्छे है .
  14. - अगर ये सब किया तो बहुत की कम मामलों में हमें डेंटिस्ट के पास जाना पडेगा
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